टैक्स प्लानिंग की सटीक रणनीति -


वित्तीय वर्ष की के शुरुआती महीनों में ही निवेश की योजना बनाई जा सकती है। इसके जरिए आप निवेश का सही निर्णय ले पाएंगे।   
कर कटौती योग्य निवेश विकल्प को अलग करना
जो भी मद धारा 80 C के तहत आते हैं उन्हें दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। एक अनिवार्य और दूसरा वैकल्पिक। पहली श्रेणी में हैं लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम, आपके बच्चों की कोचिंग की फीस, प्रॉविडेंट कंट्रीब्यूशन और आपके घर के ईएमआई की किश्तें। ये ऐसी चीजें हैं जिनपर आप ज्यादा सोच विचार नहीं कर सकते हैं। इस कैटेगरी में जो भी आ रहे हैं उनका भुगतान करना ही होगा।
इन विकल्पों को गहराई से समझिए
स्कूल की फीस-
अगर आपके दो बच्चे हैं तो उनकी स्कूल की पढ़ाई, कॉलेज की पढ़ाई और यूनीवर्सिटी और भारत के किसी अन्य संस्थान में होने वाली पढ़ाई के लिए खर्च करना ही होता है और इसके लिए कर कटौती की कोई सीमा नहीं है।
अगर आपके दो से ज्यादा बच्चे हैं तो आपके तीसरे बच्चे के खर्च को आपकी कमाऊ पत्नी या पति अपने टैक्स में क्लेम कर सकते हैं। इसमें करदाता पर जो भी संभावित खर्च का भार आता है उसका आकलन साल की शुरुआत में आसानी से किया जा सकता है और उसी आधार पर टैक्स प्लानिंग भी।
प्रोविडंट फंड में करें योगदान-
जो लोग नौकरीपेशा हैं उनके लिए भी प्रोविडंट फंड भी जरूरी है और आपकी बेसिक सैलरी के आधार पर इसमें होने वाली सालाना कटौती का आंकलन टैक्स छूट के लिए किया जा सकता है। सरल भाषा में समझें तो आपकी सैलरी में से कुछ भी हिस्सा पीएफ के अंतर्गत काटा जाएगा उस पर आपको टैक्स की छूट मिलेगी।
3 लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम-
आप सभी लाइफ इंश्योरेंस बीमा पॉलिसियों के इंश्योरेंस प्रीमियम को भी इसमें शामिल करें। गर आप एक अतिरिक्त बीमा पॉलिसी लेने जा रहे है या उसकी योजना बना रहे हैं तो आप इसकी संभावित प्रीमियम राशि को भी अपनी लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम की अनुमानित  राशि में शामिल करें। आप अपनी संभावित या मौजूदा यूलिप पालिसी को भी अपने प्रीमियम में शामिल करना न भूलें। आपकी, आपकी पत्नी और आपके बच्चे की लाइफ इंश्योरेंस पालिसी का प्रीमियम कटौती योग्य होता है। हालांकि अगर आपकी कोई ऐसी बीमा पॉलिसी है जिसका प्रीमियम कुल बीमा राशी से 10 फीसदी अधिक है तो 10 फीसदी से ऊपर की रकम पर टैक्स कटौती का लाभ नहीं मिलेगा। लाइफ इंश्योरेंस पॉलसी को कम से कम दो साल तक चालू रखना जरूरी है। अन्यथा आप उस राशि पर टैक्स कटौती के लिए क्लेम नहीं कर सकते और आपको पिछले वर्षों में क्लेम की गई राशि पर टैक्स देना होगा।
4 होम लोन की मूल राशि की अदायगी-
आप अपने बैंक से ब्याज का अंतरिम प्रमाणपत्र मांगे जिसमें ब्याज की राशि समेत आपकी कुल ईएमआई राशि का महत्वपूर्ण घटक शामिल होता है। अगर आपने किसी वित्तीय संस्थान से होम लोन लिया है और आपने घर की पजेशन के बाद जो भुगतान किया है आप उस पर भी टैक्स रिबेट के लिए क्लेम कर सकते हैं। आपको अपने घर को कम से कम पांच साल तक (पजेशन के वित्तीय वर्ष के अंत से) रखना होगा। ऐसा न होने पर आपने जिस साल अपने घर को बेचा है उस साल आपको पहले मिली छूट राशि पर कर देना होगा। लाभ मिलेगा। घर खरीदने पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज की रकम पर भी आप छूट का दावा कर सकते हैं।
इन निवेश विकल्प से भी बचाएं टैक्स
ऊपर जिक्र किए गए मद पर खर्च करने के बाद भी कर छूट की सीमा 1.5 लाख रुपए की लिमिट पार नहीं होती तो आप तमाम अन्य विकल्पों का रुख कर सकते हैं। इनमें निवेश आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। प्राथमिक तौर पर इस श्रेणी में बैंक एफडी, पीपीएफ, एनएससी, ईएलएसएस और सीनियर सिटिजन स्कीम के तहत जमा की हुई राशि होती है। ये कुछ ऐसे मद हैं जिनमें हैं निवेश की रकम आपकी उम्र, आपके जोखिम की सीमा और आपकी अपेक्षित जरूरत पर निर्भर होती है।
सीनियर सिटिजन के लिए सीनियर सिटिजन में और 5 साल की बैंक फिक्सड डिपाजिट में पैसा जमा करना उचित होता है क्योंकि एक निश्चित अवधि में उस एक तय ब्याज मिल जाता है।
अन्य लोग जो लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं उनके लिए ईएलसीसी जैसे विकल्प बेहतर परिणाम देते हैं। लंबी अवधि के लिए निवेश के लिहाज से धारा 80 सी के तहत आने वाले तमाम निवेशों में ईएलएसएस सबसे बेहतर रिटर्न देता है। तीन साल के लॉक इन पीरियड के बाद ईएलसीसी पर जो भी लाभ मिलता है वो टैक्स फ्री होता है।
ईएलसीसी के अंतर्गत साल की शुरूआत में हम अपने तय निवेश को एसआईपी के जरिए निवेश कर सकते हैं।  एसआईपी में निवेश के जरिए आप स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव से अपने आप को बचा सकते हैं।  ईएलएसएस में एसआईपी के जरिए ‘रूपी कॉस्ट एवरेजिंग’ सिद्धांत के संदर्भ में आप लाभ कमा सकते हैं।
इस बजट में प्रस्तावित एनपीएस पर 50,000 रुपए के अतिरिक्त निवेश को आप 12 महीनों में बराबर बांट सकते हैं। हर महीने थोड़ा-थोड़ा करके आप सालभर में 50000 रुपए की राशि पर कर लाभ ले सकते हैं।
इस तरह तमाम निवेश विकल्पों पर वित्त वर्ष की शुरुआत में विचार करके आप कर प्लानिंग के लिए सटीक रणनीति बना सकते हैं।

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