गोपाल  को एक बार कारोबार के सिलसिले में अपने शहर से दूर सिंगापुर जाना पडा। एक दिन वहां के मशहूर बाजार में घूमते हुए उन्हें एक सामान पसंद आ गया। उस कीमती वस्तु को खरीदने के लिए उन्होंने अपना पर्स खोला, तो उसमें उतने पैसे नहीं थे। एकाएक उन्हें अपने क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड याद आए। फिर चिंता किस बात की। उन्होंने एटीएम से पैसे निकाले और भुगतान कर दिया। दरअसल, यह कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कमाल है। क्रेडिट-डेबिट कार्ड के अलावा नेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग, रेल या एयर रिजर्वेशन आदि भी नेटवर्किग के ही उदाहरण हैं। एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर, एक ऑफिस या एक शहर से दूसरे शहर या फिर एक देश से किसी अन्य देश में डाटा का ट्रांसफर भी नेटवर्किग का ही कमाल होता है।
क्या है नेटवर्किग?
नेटवर्किंग शब्द नेट यानी जाल से बना है, जिसका अर्थ है दो या दो से अधिक चीजों को आपस में जोडना। कम्प्यूटर के संदर्भ में नेटवर्किग का मतलब है दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को एक कंपनी, एक शहर, एक देश के विभिन्न स्थानों को आपस में जोडना व उनके संस्थानों को एक्सेस करना तथा विश्व के किसी भी कोने में स्थित कंप्यूटरों को आपस में जोडना। इंटरनेट मोबाइल कम्युनिकेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्किंग का ही नतीजा है। कम्प्यूटर नेटवर्किंग को निम्न भागों में बांटा जा सकता है :
लोकल एरिया नेटवर्किंग (लैन) : इस तरह की नेटवर्किंग को लैन के नाम से जाना जाता है। इस तरह की नेटवर्किंग की मदद से किसी एक इमारत में रखे कम्प्यूटरों को आपस में जोडा जाता है। इसके तहत जोडे जाने वाले कम्प्यूटरों के बीच की दूरी 100 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसका कारण यह है कि इस तरह की नेटवर्किंग में कंप्यूटरों को केबल द्वारा एक-दूसरे से जोडा जाता है। ज्यादा दूरी होने पर डाटा के लॉस हो जाने की आशंका रहती है।
मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्किंग (मैन) : इसमें वायरलेस तथा वायर दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह की नेटवर्किग में एक शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित विभिन्न इमारतों या कंपनियों में रखे कम्प्यूटरों को आपस में जोडा जाता है। इसमें सामान्यत: ऑप्टिकल केबल, फाइबर केबल, राउटर, स्विच, रिपीटर इत्यादि एडवांस इस्ट्रूमेंट का उपयोग किया जाता है।
वाइड एरिया नेटवर्क (वैन) : वाइड एरिया नेटवर्क के तहत अलग-अलग शहरों या देशों में कार्यरत कम्प्यूटरों को जोडा जाता है। इसमें भौगोलिक दूरी कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि यह पूर्णतया वायरलेस टेक्नोलॉजी पर आधारित होता है। इसमें कम्प्यूटरों को सैटेलाइट, राउटर, आईएसडीएन स्विच, वैन लाइनस, (ISDN, X-25, ATM, Frame Relay etc.) द्वारा आपस में जोडा जाता है।
स्टोरेज एरिया नेटवर्क (सैन) : इस तरह की नेटवर्किंग का उपयोग प्राय: बडी कंपनियों तथा इंटरनेट सर्विसेस प्रदान करने वाली कंपनियों द्वारा किया जाता है। इसके तहत एक सर्वर तथा स्टोरेज डिवाइसों को अनेक सर्वरों और स्टोरेज डिवाइसों के साथ सीधे जोडा जाता है।
नेटवर्किंग से लाभ
आईटी रिवॉल्यूशन के इस दौर में नेटवर्किग बेहद जरूरी है। बीपीओ कंपनियों का सारा काम-काज नेटवर्किग पर निर्भर होता है। कम्प्यूटर नेटवर्किंग के लाभों को मुख्यत: दो भागों में बांटा जा सकता है :
1. रिसोर्स शेयरिंग : इसकी सहायता से उपकरणों तथा सर्विसेस के उपयोग को कम करके किसी एक या दो कम्प्यूटर के साथ जोड दिया जाता है। इससे हर कम्प्यूटर के लिए अलग-अलग उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है और कंपनियों की खर्चो में काफी बचत होती है। 2. इन्फॉर्मेशन शेयरिंग : इसकी मदद से किसी एक कम्प्यूटर और उसके डाटा को दुनिया के दूसरे कोने में रखे कम्प्यूटर में सहजता से आदान-प्रदान किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इसकी मदद से हम वॉयस (बोलती हुई) फोटो, लाइव टेलिकॉस्ट आदि भी शेयर कर सकते हैं।
कौन-सा करें कोर्स
नेटवर्किंग के कोर्स मुख्यत: दो तरह के होते हैं-नेशनल और इंटरनेशनल। इंटरनेशनल कोर्स के तहत वे कोर्स आते हैं, जिनकी परीक्षा तथा सर्टिफिकेट इंटरनेशनल संस्थानों द्वारा लिए जाते हैं। इनकी विश्व में हर जगह मांग होती है। इंटरनेशनल कोर्सो में प्रमुख हैं : एमसीएसई यानी माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम इंजीनियर, एमसीएसए यानी माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर, सीसीएनए यानी सिस्को सर्टिफाइड नेटवर्क असोसिएट, आरएचसीई यानी, रेडहैड सर्टिफाइड इंजीनियर काम्पटिया ए+, काम्पटिया एन+, काम्पटिया सिक्योरिटी +, काम्पटिया सर्वर+ आदि। इसके अलावा, नेशनल कोर्सो में प्रमुख के नाम इस प्रकार हैं :
1. डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी
2. डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी ऐंड डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेशन
3. एडवांस डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी ऐंड सिक्योरिटी एक्सपर्ट
4. मास्टर इन नेटवर्क इंजीनियरिंग
प्रवेश के लिए योग्यता
कम्प्यूटर नेटवर्किग से संबंधित अधिकांश कोर्सो में प्रवेश के लिए बारहवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। हालांकि, इन कोर्सो को ग्रेजुएट या ऊंची शिक्षा प्राप्त स्टूडेंट भी कर सकते हैं। यदि अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त योग्यता होगी।
संभावनाएं व सैलॅरी पैकेज
आज भारत सहित पूरे विश्व में जिस तरह से कम्प्यूटरों का प्रयोग तेजी से बढ रहा है तथा पूरे विश्व का जिस तरह से आधुनिकीकरण हो रहा है, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि नेटवर्किंग इंजीनियरिंग में अपार संभावनाएं हैं। ऐसी स्थिति में आने वाले दशक में अकेले भारत में ही लाखों स्किल्ड लोगों की जरूरत होगी। एक स्किल्ड नेटवर्किंग इंजीनियर किसी भी छोटी या बडी कंपनी में निम्न पदों पर कार्य कर सकता है : नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, टीम लीडर टेक्निकल हेड, टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर, सिस्टम एनालाइजर आदि। इन पदों पर 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक आसानी से कमा सकते हैं। योग्यता और अनुभव के आधार पर कोई नेटवर्किंग इंजीनियर प्रोग्रेस करते हुए सीनियर सिस्टम मैनेजर या इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मैनेजर भी बन सकता है।

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