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Tuesday, April 8, 2014

डेडिकेशन से मिलेगी Success

Geeta Kapoor
कुछ-कुछ होता है, कभी खुशी-कभी गम, मोहब्बतें, कल हो न हो, मैं हूं न और ओम शांति ओम जैसी बॉलिवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में कोरियोग्राफी कर चुकीं फेमस कोरियोग्राफर गीता कपूर डांस इंडिया डांस के सीजन 2 समेत तमाम शो में जज बनकर आ चुकी हैं। क्या है उनकी सक्सेस का सीक्रेट, बता रही हैं खुद गीता कपूर..
डेडिकेशन है जरूरी 
मैं इस फील्ड से शौकिया जुडी थी, लेकिन जब मैंने पाया कि डांस में भी एक जादू है, जिससे हम दुनिया का दिल जीत सकते हैं, तो मैं जुट गई दिल से इस काम में। उसके बाद मैंने जो भी काम किया, दिल से किया और उसमें पूरी तरह खो गई। मैं समझती हूं कि काम में डूबे बिना सफलता नहीं मिल सकती।
लर्न फ्रॉम एक्सपीरियंस
मैं हर काम को अपने या दूसरे के अनुभव से जोड कर देखती हूं। यह दरअसल एक जीवन यात्रा की तरह है। आप जीवन भर कुछ न कुछ सीखते ही रहते हैं। जैसे पढने की कोई उम्र नहीं होती वैसे ही सीखने की भी कोई उम्र नहीं होती। जब चाहो पढो, लेकिन दिल से। जब चाहो डांस सीखो..। मैंने पहले भी बताया है कि मैं बच्चों की गुरु कहलाती हूं, वे मुझे मां कहते हैं, लेकिन सच यही है कि मैं भी बच्चों से बहुत कुछ सीखती हूं। जीवन में नए अनुभव हासिल होते रहते हैं और हम इसी के जरिए आगे बढते हैं। अनुभव हमारे लिए बहुत जरूरी हैं।
बनें अच्छा इंसान
आपकी पहली पहचान अपने घर में बनती है, फिर मोहल्ले और समाज में। फिर इसका दायरा कुछ आगे बढता है और फिर इसी तरह से आप दुनिया भर में जाने जाते हैं। यानी आप अगर इंसान अच्छे हैं, तो आपको पहचान और सफलता मिलते देर नहीं लगेगी। आप चाहे किसी भी पेशे में हों, कुछ भी करते हों, इंसान बनना हस्ती बनने की बुनियाद है। आप सामाजिक होंगे, तो अच्छे समाज का निर्माण करेंगे। ऐसा करने पर ही आप समाज के लिए कुछ कर पाएंगे।
जारी रहे चिंतन
कहते हैं कि चिंता चिता समान है और चिंतन आगे का मार्ग..। इसलिए आप किसी भी स्थिति में हों, चिंतन के लिए वक्त जरूर निकालें। अपनी चिंतनशीलता को कभी खत्म न होने दें। यदि ऐसा होगा, तभी आप कुछ रच पाएंगे, कर पाएंगे और बना पाएंगे। लीक से अलग कुछ करने के लिए चिंतन जरूरी है।
करती हूं दिल से प्यार
आज मैं जो भी हूं उसमें लोगों के प्यार की बडी भूमिका है। लोग और खासकर युवा पीढी मुझे गीता मां के नाम से जानती और बुलाती है। वजह साफ है कि युवाओं को मैं मां की तरह गाइड करती हूं। मैं उनकी डांस टीचर भी हूं, लेकिन पहले मां हूं। हमें इस प्यार के बदले उनसे प्यार मिलता है, वे दिल से सीखते हैं और मुझे संतुष्टि मिलती है और साथ ही आगे बढने का हौसला भी।
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बनाएं लाइफ को स्वर्ग



बनाएं लाइफ को स्वर्ग
1. सही रास्ता चुनें
हम तभी कुछ हासिल करते हैं, जब एक टारगेट बनाकर उसी ओर चलते रहते हैं। ऐसा करने से हमें सक्सेस मिलती है, लोग हमारी तारीफ करते हैं। हमारी कामयाबी का गुणगान भी करते हैं। हमें भी खुशी मिलती है, लेकिन यह तभी संभव है, जब हम सही रास्ते पर चलें। इस बात का ध्यान रखें कि गलत रास्ते पर चलकर कभी सक्सेस नहीं मिल सकती। करियर बनाने के लिए हमें बस एक ही राह पर चलना चाहिए। बस, उसी राह को पकडकर आप भी आगे बढते रहें।
2. जरूरी हैं एटिकेट्स  
बहुत से लोग कहते हैं कि जो व्यक्ति अच्छा इंसान नहीं बन सका, वह भला रेस्पेक्ट कैसे हासिल कर सकता है। आप अच्छे इंसान बनेंगे, अच्छे-बुरे का ध्यान रखेंगे, तभी लोग आपकी अच्छाइयों को देखकर आपकी तारीफ करेंगे। अगर आप किसी से सम्मानजनक भाषा में बात नहीं करेंगे, समझदारी नहीं दिखाएंगे, तो सक्सेस भी आपके पास नहीं आएगी। आपको न तो सोशल माना जाएगा और न ही किसी खुशी में आपको शरीक होने दिया जाएगा। इन बातों से भी जुडी हुई है आपकी सक्सेस। अगर आप मा‌र्क्स लाने में परफेक्ट हैं, लेकिन बिहेवियर ठीक नहीं है, तब भी आपकी राह में बैरियर आएंगे। इसी बिहाफ पर सेलेक्शन करने वाले सीनियर्स आपको रिजेक्ट कर सकते हैं। अगर आपने स्माइल के साथ सही आंसर दिया, तो सक्सेस श्योर है।
3. लीक से हटकर
काम तो सभी करते हैं, लेकिन हमें ऐसा कुछ करना है, जिसे देख कर दुनिया कहे- वाह, यह तो कमाल हो गया। तभी आपकी ओर लोगों का ध्यान खिंचेगा। दुनिया में आप जाने जाएंगे और इसी के साथ आपके घर तक कामयाबी आ जाएगी। सामान्य कामों में वक्त जाया करना अच्छी बात नहीं है। अगर खुद को अलग दिखाना है, तो आपको अलग करना ही होगा और इसके लिए जरूरी है, अच्छी सोच के साथ प्रॉपर तैयारी। एक्टिंग की दुनिया में बलराज साहनी, ओमपुरी, नसीर जी, दिलीप कुमार, अशोक कुमार अमिताभ बच्चन का ही नाम क्यों लिया जाता है? इसीलिए न कि उन्होंने अपने काम को उस बखूबी के साथ अंजाम दिया, जो बाकी लोगों के बस की बात नहीं थी।
4. राइट डिसीजन
कोई भी काम शुरू करने से पहले उसके बारे में सोचें जरूर। सबसे पहले यह डिसाइड करें कि वर्क शुरू कैसे करना है? अगर हम सही डिसीजन लेंगे, तो क्वॉलिटी वर्क भी होगा और काम में अडचन भी नहीं आएगी। मुश्किल वक्त में लिया गया हमारा डिसीजन और कॉन्फिडेंस ही हमें सक्सेस दिलाता है। हमारी लाइफ में हर टाइम कोई न कोई मुसीबत आती है, लेकिन हम सही डिसीजन लेकर उससे आसानी से निपट सकते हैं।
5. सच के साथ रहें
अगर आप झूठ का सहारा लेते हैं, तो बहुत बडी गलती कर रहे हैं। कई बार ऐसा होता है कि बच्चे करते कुछ हैं और घर में बताते कुछ और हैं। इससे दूसरे का नुकसान नहीं होता। आपकी जिंदगी का गोल्डेन पीरियड होता है जब आप युवा होते हैं। यंग एज में लिया गया आपका एक सही डिसीजन आपकी जिंदगी को स्वर्ग बना सकता है और अगर डिसीजन गलत लिया है तो नर्क। इसलिए हमेशा सच की राह पर ही चलें।
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काबिलियत से कामयाबी

काबिलियत से कामयाबी

इंजीनिय¨रग

काबिलियत से बनेगी तकदीर
आज 12वींबाद हर बच्चा बीटेक करने का ख्वाब यूं ही नहीं पाल लेता है। दरअसल इस क्षेत्र में पिछले दो दशकों में आए जोरदार बदलावों ने इसे सबसे बडा जॉब मार्केट बना दिया है। आज यहां बडी संख्या में काबिल डिग्रीधारकों की जरूरत है। लेकिन इन डिग्रीधारकों में कामयाबी का शिखर उन्हीं को नसीब होगी जिनमें खास गुण मौजूद होंगे।
हरदम सीखने का नजरिया- अच्छा इंजीनियर वही है, जो हर तकनीकी गुत्थी को सुलझाने में यकीन रखे। लेकिन आजकल के युवा में इसकी कमी देखी जा रही है। यहां यदि तकनीकी विषयों जैसे मैथ्स, फिजिक्स व केमिस्ट्री पर पकड के साथ रुचि नहीं है, तो सफल नहीं हो सकते हैं।
तकनीक की परख- प्रोफेशनल वर्किग के दौरान ये चीजें खासी मदद देंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्री होल्डर इंजीनियर कंप्यूटर फ्रैंडली तो हैं, लेकिन जिस क्षेत्र में उनसे विशेषज्ञता की दरकार है, उसमें उन्हें महारत नहीं हासिल है।
मेडिकल
दर्द को समझो अपना दर्द
दर्द किसी का भी हो उसे अपने सीने में महसूस करने का हुनर ही आपको मेडिकल के क्षेत्र में सफल बनाएगा। भारत जैसे बडी आबादी वाले देश में जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहले से कमी हो, मेडिकल सेक्टर में करने को बहुत कुछ है। बस दरकार है कुछ खास गुणों की।
- सेवा भाव- रोगियों, लाचारों का इलाज करते वक्त उनके प्रति समर्पण की भावना इस फील्ड में सफलता की गारंटी है। आज डॉक्टरी का पेशा अपनाने वालों में समर्पण की भावना कम, वित्तीय रुझान ज्यादा है।
- मानसिक ताकत- यहां कई मौके ऐसे आते हैं, जब आपकी मानसिक दृढता की परीक्षा होती है। दृढता मानसिक मजबूती से आती है। ऑड वर्किग ऑवर, मरीजों का दर्द, लंबे काम के घंटों के बीच युवाओं में जो मानसिक दृढता चाहिए, आज उनमें इसकी कमी है।
- राइट टाइम टू गिव फाइनल पंच- भूल शब्द डॉक्टर की डिक्शनरी में नहीं होता। उनकी एक चूक से जान चली जाती है। यही कारण है कि उन्हें धरती पर भगवान का दर्जा प्राप्त है। यह गुण लंबे अनुभव से ही आता है।
मीडिया
संघर्ष से मिलेगा सफलता का पथ
मीडिया में ग्लैमर की तो कमी नहीं है, लेकिन इस ग्लैमर को पाने का सफर बडा ही टेढा मेढा व संघर्षो से भरा है। आज बहुत से युवा इस ऊपरी चमक-दमक को देखकर इस फील्ड में आ तो जाते हैं, लेकिन कुछ अहम स्किल्स के अभाव में मनचाही सफलता अर्जित नहीं कर पाते।
- मजबूत भाषा- इस फील्ड में हिंदी-इंग्लिश दोनों ही भाषाओं पर पकड बहुत जरूरी है। अगर आप इन दोनों ही भाषाओं में निपुण हैं तो आपको यहां कामयाब होने से कोई?नहीं रोक सकता है।
- टाइम के साथ जुगलबंदी- मीडिया डेड लाइन बेस्ड प्रोफेशन है, जहां टाइम का मतलब ही है सफलता, दूसरों से आगे। लेकिन वक्त के साथ की जाने वाली इस भागम-भाग में अक्सर मीडिया प्रोफेशनल्स पर बहुत अधिक दबाव हो जाता है। यही कारण है कि आज इस फील्ड में टिकने वाले लोग कम ही हैं।
- नो वर्किग ऑवर: इस फील्ड में आप तभी आएं, जब किसी भी समय काम करने के लिए तैयार रहें और देश के किसी भी कोने में जाने को तत्पर रहें। इस तरह की वर्किग कंडीशन में ढलने में कई युवा असफल साबित होते हैं।
डिफेंस
किलर इंस्टिंक्ट है बडा हथियार
कहा जाता है? कि सरहद पर जान देने से बडा नशा और कोई?नहीं है। लेकिन इस क्षेत्र में जाने से पहले आपमें कुछ ऐसे गुणों का होना आवश्यक है?जो दुश्मन के दिलों में सिरहन पैदा कर दे। यदि आप में भी ऐसे ही गुण हैं तो डिफेंस में कॅरियर एक सही विकल्प है।
- बॉडी फिट तो सब फिट- इस फील्ड में वही लोग बेहतर कर सकेंगे, जिनकी फिजिकल फिटनेस का स्तर व स्टेमिना असाधारण होगा। पर आज युवाओं की शारीरिक क्षमता/फिटनेस स्तर नीचे आया है। शायद यही कारण है कि बडी से बडी रिक्रूटमेंट ड्राइव में भी सेना को निराशा ही हाथ लगती है। यहां आज उन्हें अपने स्तर के लायक युवा नहीं मिल पा रहे है।
- त्वरित निर्णय- युद्ध की परिस्थितियों या फिर आंतकरोधी अभियानों में कुछ सेंकेड में लिए गए निर्णय लडाई का रुख मोड देते हैं। इस कारण डिफेंस में तेज निर्णय क्षमता की सख्त जरूरत होती है।
- अनुशासन- डिफेंस में इंट्री का पहला और आखिरी मंत्र अनुशासन है। बगैर इसके यहां एक पग बढाना भी मुश्किल होगा।
मैनेजमेंट
आप बढो तो सब बढें
वो दिन गए, जब अंगुलियों पर गिने जाने लायक एमबीए हुआ करते थे और नौकरी पाना एक औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं हुआ करता था। पर अब तो एमबीए डिग्रीधारकों की भरमार है। लिहाजा अब जॉब उसी को मिल रहा है, जो कंपनी की अपेक्षाओं पर खरा उतरे। इस कसौटी पर सफल होने के लिए खास स्किल्स डेवलप करनी होगी।
- प्रबंधकीय कौशल- इस क्षेत्र में सफल होने के लिए आपको चीजों को बेहतर ढंग से मैनेज करने की कला आनी चाहिए। इस तरह के गुण तभी आ सकते हैं, जब आपमें लोगों की बातें समझने और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता होगी।
- स्पीकिंग इंग्लिश- आज इंग्लिश भाषा अपना ग्लोबल प्रभाव रखती है। इस कारण इस क्षेत्र में कामयाब वहीं हैं, जो इंग्लिश बोलने में सहज हैं। इस इंडस्ट्री में अधिकतर मैनेजमेंट डिग्री प्राप्त प्रोफेशनल, बेरोजगार इसी कारण हैं कि उन्हें अच्छी अंग्रेजी नहीं आती है।
- परफेक्ट नॉलेज- इन गुणों के अलावा व्यवासायिक क्षेत्रों में क्या बदलाव हो रहे हैं, इस बारे में सरकारी नीतियां क्या हैं, कॉरपोरेट सेक्टर का क्या मूड है, आने वाले दिनों में मार्केट ट्रेंड कैसा रहने वाला है, ब्रांड्स की समझ इत्यादि यहां बहुत आवश्यक हैं। यह गुण तभी आ पाएंगे, जब आपको इस क्षेत्र में रुचि होगी।
- टीम कोऑर्डिनेशन- टीम में काम करने की कला एक बडी क्वालिटी होती है। यदि आप कॉरपोरेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और टीम वर्क पर यकीन नहीं करते तो जान लें कि कंपनी के साथ-साथ आप पर भी इसका बुरा असर पडेगा।
बैंक
इरादों में दम तो हर चुनौती है कम
बैकिंगसेक्टर में कॅरियर बूम आज आसानी से देखा जा सकता है। यहां अवसरों की बढी दर के कारण युवा तेजी से इस ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इसके साथ-साथ बैंकों से युवाओं का स्विचओवर रेट भी बढा है। इसका सबसे प्रमुख कारण है बैंक में काम करने के लिए जरूरी स्किल्स की कमी।
- कैलकुलेशन में है राह- यह क्षेत्र पूरी तरह गणनाओं पर ही चलता है। वे छात्र जिनकी कैलकुलेशन पॉवर अच्छी है, यहां बहुत आगे तक बढते हैं। इसके साथ ही करेंट नॉलेज भी जरूरी है।
- कूल रहना जरूरी- इस सेक्टर में आपको कई बार शार्ट टेंपर्ड ग्राहकों से भी निपटना होता है। ऐसे मे मानसिक रूप से सुलझे व ठंडा दिमाग रखने वाले युवा बैकों की पहली पसंद होते हैं।
टीचिंग
अध्ययन आएगा काम
टीचिंग में इन दिनों कॅरियर बनाने वालों की कमी नहीं है। बेहतर सैलरी, काम के निश्चित घंटे, सुविधाओं के चलते यह क्षेत्र हॉट फे वरेट बन चुका है। लेकिन बहुत बार इस फील्ड से युवा असंतुष्ट रहते हैं, कारण-अध्यापन के लिए जरूरी क्वालिटी/ स्किल्स की कमी।
- गहन ज्ञान है पहली शर्त- विषय की गहरी नॉलेज शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता पाने की पहली शर्त?है। इस फील्ड में इंट्री लेने वाले युवाओं में आज धीरज की बहुत कमी देखी जा रही है, जिसके चलते अध्यापन के दौरान छात्रों से सामंजस्य न बिठा पाना, आपा खो देना जैसी समस्याएं बहुत आम हैं। अगर आप इस पर काबू पा लेते हैं, तो आपके लिए टीचिंग जॉब सबसे उपयुक्त और बेहतर हो सकता है।
खुद को पहचानें
गुणों को निखारना एक सतत प्रक्रिया है। इस पर लगातार काम करके ही आप परफेक्शन हासिल कर सकते हैं..
बदलती वैश्विक जरूरतों, बदलते समय में कॅरियर की जरूरतें भी पहले से जुदा हुई हैं। आज आप सिर्फ फलां कोर्स? करके या फलां डिग्री हासिल कर कामयाब कॅरियर नहीं बना सकते हैं। आज तो ज्यादातर जॉब्स में इंट्री व प्रोग्रेस का पैमाना ही बदल चुका है। एक वैश्विक सर्वे से मिले आकंडे भी इनकी वकालत करते हैं, जिसके मुताबिक आज कोई भी कंपनी अपने कर्मचारियों के वर्किग आउटपुट के लिए इंतजार नहीं करती। वह चाहती है कि इम्प्लाई पहले ही दिन से कंपनी की मेनस्ट्रीम वर्किग में शामिल हो जाएं। ऐसे में कॉलेज लेवल पर चलने वाले फिनिशिंग स्कूल, इंटर्नशिप कोर्सेस जॉब फ्रंट पर आपको और काबिल बनाते हैं।
खुद पर भरोसा है कामयाबी का मंत्र
एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स का जीवन, कॅरियर मार्केट में स्किल्स की अहमियत बयां करने वाली परफेक्ट केस स्टडी है, जिसका अध्ययन कर कोई भी तरक्की के पंख पा सकता है। 20 साल की उम्र में उन्होंने एक छोटे से गैराज में एप्पल कंपनी खोली थी। जो महज दस साल के अंतराल में 2 बिलियन डॉलर व 4000 कर्मचरियों वाली विशाल कंपनी बन गई। लेकिन 30 के होते-होते स्टीव को खुद उनकी ही बनाई कंपनी से निकाल दिया गया। स्टीव बेराजेगार हो गए, उनका देखा हुआ सपना सार्वजनिक तौर पर फेल होता दिखा, उनके जैसे तमाम उद्यमियों के लिए यह बडा झटका था। पर असल कहानी तो यहां से शुरू हुई?थी। इसके बाद उन्होंने अपनी नई कंपनियां नेक्स्ट व पिक्सर शुरू कीं, जो आगे चलकर सिलिकॉन वैली की सबसे चमचमाता नाम बन गई। आगे स्टीव ने खुद माना कि एप्पल से निकाला जाना उनके कॅरियर का सबसे बडा बे्रकथ्रू था, यह न हुआ होता तो शायद स्टीव स्टीव न होते। आज कॅरियर के फ्रंट पर स्टीव जॉब्स की यह छोटी सी कहानी लाखों युवाओं को सबक दे रही है, और बता रही है कि आपके पास किसी काम करने का खास गुण है, तो अच्छा होगा कि इन गुणों के जरिए कॅरियर मार्केट में बेस्ट डील अंजाम दें।
सरकारी प्रयासों का दिखता रंग
आज सरकार अपने देश की कार्ययोग्य जनता की कार्यदक्षता बढाने हेतु प्रयासरत है। लिहाजा इस बार के वित्तीय बजट में सरकार ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत दिए जाने वाले फंड को 1000 करोड रुपये से बढाकर 2500 करोड कर दिया है। इसके अलावा के्रडिट गांरटी स्कीम व रोजगारपरक कोर्स संचालित करने वाले संस्थानों को सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर किया गया है। यही नहीं, युवाओं की स्किल बेस्ड इंडस्ट्री में राह आसान करने के लिए सरकार बैंकों के जरिए भी उन्हें वित्तीय मदद पहुंचाती है। देश में कौशलपूर्ण?कामगारों की जरूरत अरसे से महसूस की जा रही थी। इसको पूरा करने के लिए अक्टूबर 2009 में नेशनल स्किल डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन की शुरुआत की गई। क्रमश: 49 व 51 फीसदी सरकारी व निजी सहभागिता से चलने वाली अपनी तरह की यह पहली संस्था सन 2022 तक देश में 50 करोड स्किल्ड इम्प्लाई? बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। अब तक एनएसडीसी ने 21 की सेक्टर चिथ्ति किए हैं।
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चांस को पहचानें

हाल ही में टेरी यूनिवर्सिटी की ओर से डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित की गईं मशहूर बॉलीवुड अदाकारा और सामाजिक कार्यकर्ता शबाना आजमी हार्ड वर्क और ट्रेनिंग को सक्सेस की सबसे बड़ी की मानती हैं..
शोर यूं ही न परिदों ने मचाया होगा
कोई जंगल की तरफ शहर से आया होगा।
पेड़ को काटने वाले को ये मालूम तो था
जिस्म जल जाएंगे गर सर पे न साया होगा।
अपने शायर और कवि पिता कैफी आजमी की ये लाइनें पढ़ते वक्त अभिनेत्री शबाना आजमी काफी भावुक हो उठती हैं। कहती हैं, प्रोग्रेस सही दिशा में होना जरूरी है। उससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम अपनी प्रगति के लिए क्या कीमत चुकाते हैं। वह कीमत ही हमारा भविष्य तय करती है।
अनुभवों से सीखते चलें
मैंने काफी वक्त मुंबई की झुग्गियों में, अंडर-प्रिविलेज्ड लड़कियों के साथ और आजमगढ़ के टाइनी गांव में गरीबों-बेसहारों के बीच रहकर काम किया है। वहां के अनुभवों से बहुत कुछ सीखा है। ये अनुभव कब आपकी पर्सनैलिटी में शामिल हो जाते हैं, आपको पता भी नहींचलता। इसके बाद आप इन्हींअनुभवों से ही सीखते चले जाते हैं।
जिंदगी का कड़वा सच
जिंदगी उतनी आसान नहीं, जितनी हम अक्सर सोचते हैं। लेकिन अगर उसकी हकीकत मालूम हो, तो सब आसान हो जाता है। कदम-कदम पर आपके सामने चुनौतियां आती हैं, आप चाहें तो उन्हें हल्के में लें, चाहें तो गंभीरता से। जैसे-जैसे आप इन चुनौतियों से पार पाना समझ और सीख जाते हैं, आप उतने ही मजबूत होते जाते हैं। इस तरह से जिंदगी एक बहती हुई नदी की तरह आगे बढ़ती रहती है।
सबको साथ लेकर चलें
हमारे भीतर सबको साथ लेकर चलने की भावना होनी चाहिए, तभी हम सही मायने में प्रगति कर सकते हैं। ऐसा न हो कि अपनी प्रगति के लिए कई सारे लोगों की किस्मत दांव पर लगा दी जाए। जब आप केवल अपने बारे में सोचते हैं, तो इसमें सिर्फ आपके स्वार्थ और प्रगति की बात होती है। लेकिन जब अपने साथ-साथ दूसरों के बारे में भी सोचते हैं, तो इससे सबकी तरक्की होती है। इस तरह की सोच आपकी आदत में शुमार हो जानी चाहिए।
अवसर पहचानें
हर किसी के लिए सफलता का कोई एक जैसा पैमाना नहींहोता। अहम सवाल यह है कि आप जो कुछ करना चाहते हैं, उसके लिए कितने ईमानदार हैं और किस हद तक जा सकते हैं। सफलता के लिए दो बातें बहुत जरूरी हैं-पहली, कड़ी मेहनत और दूसरा अवसर। जब तक आप मौके की तलाश में हाथ पर हाथ रखे बैठे रहेंगे, सोचते रहेंगे, तब तक कुछ नहीं होने वाला। जरूरत है कि सही अवसर सामने आते ही उसे पहचानें और उसके लिए जी-जान से मेहनत करें।
न चूकें मेहनत से
हो सकता है अवसर आपके दरवाजे पर दस्तक दे, लेकिन आप आलस्य के कारण उसे छोड़ दें। इसलिए लाइफ में अलर्टनेस और हार्ड वर्किग होना बहुत जरूरी है। जो लोग सफल हैं, उनकी लाइफ पर नजर डालें, तो उसके पीछे उनकी मेहनत साफ नजर आएगी। सिनेमा के पर्दे पर आपको जो नजर आता है, सब बहुत खूबसूरत और आकर्षक लगता है, लेकिन कम ही लोगों को पता होता है कि इसके पीछे कितनी मेहनत होती है। दर्शकों के सामने जो आता है, वह एडिटेड होता है।
मौका न छोड़ें
कई बार आपको चांस ही नहीं मिलता और मिलता भी है, तो हम खुद को अच्छी तरह प्रूव नहीं कर पाते। उसकी बड़ी वजह है, हम अपना सही आकलन नहीं कर पाते कि हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं। ऐसे में कोई अवसर आपकी जिंदगी के दरवाजे पर दस्तक देता भी है, तो यह सोचकर दरवाजा नहींखोलते कि यह मेरे लायक नहींहै। ऐसा करना ठीक नहींहै, किसी भी मौके को हाथ जाने न दें।
कड़ी ट्रेनिंग जरूरी है
एक्टिंग की फील्ड को ही लें, तो आमतौर पर लोग समझते हैं कि चलो शक्ल अच्छी है, डांस कर सकते हैं, दो-चार प्ले भी कर लिए, तो एक्टिंग भी कर सकते हैं। ऐसा नहीं है। एक्टिंग के लिए आपको अच्छी ट्रेनिंग लेनी होगी। फिल्म इंस्टीट्यूट ऑफ पुणे जाना होगा। वहां सीटें कम हैं, तो सत्यजीत रे इंस्टीट्यूट या और भी दूसरे इंस्टीट्यूट हैं, वहां जाकर पहले आपको सीखना होगा। पहले खुद को समझना होगा, फिर अपनी कला को तराशना होगा। इसके बाद ही मैदान में उतरेंगे, तो कुछ बात होगी। कारण यह है कि आज कॉम्पिटिशन कहीं ज्यादा टफ है। एक छोटी सी गलती भी आपको सालों पीछे कर सकती है।
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Learn Programming सीखें प्रोग्रामिंग की भाषा

अगर आप इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फील्ड में एंट्री करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले आईटी फील्ड की लैंग्वेज को समझना और सीखना जरूरी है। जानते हैं आईटी इंडस्ट्री में कौन-कौन सी लैंग्वेजेज डिमांड में हैं..
 Learn Programming 

सी-लैंग्वेज
सी को मदर ऑफ ऑल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज भी कहा जाता है। सभी पॉपुलर प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज सी से ही जन्मी हैं। एटी एंड टी बेल लैब्स में काम करने के दौरान डेनिस रिची ने 1972 में इसे डेवलप किया था। सी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली लैंग्वेज है। दुनिया के बेहतरीन कंप्यूटर आर्किटेक्चर्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स सी-लैंग्वेज बेस्ड हैं। सी-लैंग्वेज में स्ट्रक्चर्ड प्रोग्रामिंग के साथ क्रॉस प्लेटफॉर्म प्रोग्रामिंग की भी कैपेबिलिटी है। इसके सोर्स कोड में कुछ बदलाव करके कई कंप्यूटर प्लेटफॉ‌र्म्स और ऑपरेटिंग सिस्टम्स में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि माइक्रोकंट्रोलर्स से लेकर सुपरकंप्यूटर्स में सी-लैंग्वेज का इस्तेमाल होता है।
एचटीएमएल/सीएसएस
एचटीएमएल को हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज कहा जाता है, यह व‌र्ल्ड वाइड वेब के किसी भी कंटेंट की स्ट्रक्चरिंग मार्कअप लैंग्वेज है और इंटरनेट की कोर टेक्नोलॉजी है। एचटीएमएल के जरिए किसी भी वेबसाइट की स्ट्रक्चरिंग की जाती है। इस लैंग्वेज के जरिए इमेजेज और ऑब्जेक्ट्स को इंटरैक्टिव डिजाइनिंग में कनवर्ट किया जाता है। वहीं, कैसकेडिंग स्टाइल शीट्स (सीएसएस) स्टाइल शीट लैंग्वेज है, जो एचटीएमएल में कोडेड किसी भी डॉक्यूमेंट की डिजाइनिंग करने में यूज होती है। आमतौर पर एचटीएमएल और एक्सएचटीएमएल में कोडेड वेब पेजेज को सीएसएस एप्लीकेशन के जरिए ही स्टाइल किया जाता है। इसके अलावा यह किसी भी तरह के एक्सटेंसिबल मार्कअप लैंग्वेज (एक्सएमएल), स्केलेबल वेक्टर ग्राफिक्स (एसवीजी) और एक्सएमएल यूजर इंटरफेस लैंग्वेज (एक्सयूएल) डॉक्यूमेंट्स में यूज की जाती है। टैबलेट्स, स्मार्टफोंस और क्लाउड होस्टेड सर्विसेज की डिमांड बढ़ने से इसकी काफी डिमांड है।
पीएचपी
हाइपरटेक्स्ट प्री-प्रोसेसर यानी पीएचपी सर्वर स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है, जिसका यूज वेब डेवलपमेंट के साथ आम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में भी होता है। ओपन सोर्स होने की वजह से पीएचपी आज 24 करोड़ से ज्यादा वेबसाइट्स और 20 लाख वेब सर्वर्स में इस्तेमाल हो रहा है। कैहाइ-स्पीड स्क्रिप्टिंग और ऑगमेंटेड कंपाइलिंग कोड प्लग-इंस जैसी खासियतों के चलते इसे लैंग्वेजेज का फ्यूचर भी कहा जा रहा है। फेसबुक, विकीपीडिया और वर्डप्रेस जैसी हाई-प्रोफाइल साइट्स की पॉपुलरिटी के पीछे पीएचपी का ही हाथ है।
जावा स्क्रिप्ट
जावा स्क्रिप्ट असल में ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है, जो जावा का हल्का वर्जन है। इसे क्लाइंट-साइड लैंग्वेज भी कहा जाता है, क्योंकि ईजी कमांड्स, ईजी कोड्स होने की वजह से यह क्लाइंट-साइड वेब ब्राउजर में इस्तेमाल की जाती है। आज जावा स्क्रिप्ट का इस्तेमाल वेब पेजेज में फॉ‌र्म्स ऑथेंटिकेशन, ब्राउजर डिटेक्शन और डिजाइन इंप्रूव करने में किया जा रहा है। आपके फेवरेट ब्राउजर क्रोम एक्सटेंशंस, एपल का सफारी एक्सटेंशंस, अडोब एक्रोबैट रीडर और अडोब क्रिएटिव सूट जैसी एप्लीकेशंस जावा स्क्रिप्ट कोडिंग के बिना अधूरी हैं।
पायथन
बेहद ईजी कोड्स होने की वजह से कोई भी इसे बेहद आसानी से सीख सकता है। इसका इस्तेमाल वेबसाइट्स और मोबाइल एप्स की स्क्रिप्ट राइटिंग में काफी किया जाता है। पायथन और थर्ड पार्टी टूल्स की मदद से किसी भी प्रोग्राम को कंपाइल किया जा सकता है। इंस्टाग्राम, पिनटेरेस्ट, गूगल और याहू समेत कई वेब एप्लीकेशंस और इंटरनेट प्लेटफॉ‌र्म्स हैं, जहां पायथन का बखूबी इस्तेमाल हो रहा है।
एसक्यूएल
स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज यानी एसक्यूएल अपनी ओपन सोर्स होने की खासियतों के चलते डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम में सबसे ज्यादा यूज की जा रही है, जिससे डाटाबेस को मल्टी-यूजर एक्सेस देना संभव हो पाया है। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को अमेरिकन नेशनल स्टैंड‌र्ड्स इंस्टीट्यूट (एएनएसआइ) और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टैंड‌र्ड्स (आउएसओ) ने 1980 में
डेवलप किया था। आज एसक्यूएल का इस्तेमाल डाटा इंसर्ट, क्वेरी, अपडेट एंड डिलीट, मोडिफिकेशन और डाटा एक्सेस कंट्रोल में किया जा रहा है।
विजुअल बेसिक
माइक्रोसॉफ्ट के डॉट नेट फ्रेमवर्क में विजुअल बेसिक का इस्तेमाल होता है और डॉट नेट फ्रेमवर्क के बिना माइक्रोसॉफ्ट विंडोज की कल्पना भी नहीं की जा सकती। विजुअल बेसिक माइक्रोसॉफ्ट के डॉट नेट फ्रेमवर्क की रीढ़ की हड्डी है। 1991 में माइक्रोसॉफ्ट ने इस इरादे के साथ इसे डेवलप किया था, ताकि डेवलपर्स आसानी से इसे सीख सकें और इस्तेमाल कर सकें। इसकी मदद से ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (जीयूआइ) एप्लीकेशंस, डाटाबेस एक्सेस, रिमोट डाटा ऑब्जेक्ट्स और एक्टिवएक्स कंट्रोल्स को डेवलप किया जा सकता है।
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जावा
जावा लैंग्वेज को 1990 में सन माइक्रोसिस्टम्स के जैम्स गॉस्लिंग ने डेवलप किया था। जावा पूरी तरह से ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है। आज एमपी3 प्लेयर से लेकर बड़ी से बड़ी एप्लीकेशन जावा के बिना अधूरी है। जावा को दोबारा कंपाइल किए बिना ही एप्लीकेशन डेवलपर्स प्रोग्राम को किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी आसानी से चला सकते हैं यानी राइट वंस, रन एनीव्हेयर। इन दिनों जावा का इस्तेमाल एंटरप्राइजेज सॉफ्टवेयर, वेब बेस्ड कंटेंट, गेम्स, मोबाइल एप्स और एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम में बखूबी किया जा रहा है।
सी++
मल्टी-पैराडाइम स्पैनिंग लैंग्वेज होने के चलते इसमें हाइ-लेवल और लो-लेवल लैंग्वेज, दोनों के फीचर हैं। सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को व्यापक बनाने के लिए 1979 में इसे शुरू किया गया था। सिस्टम्स सॉफ्टवेयर, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, सर्वर व क्लाइंट एप्लीकेशंस और एंटरटेनमेंट सॉफ्टवेयर्स जैसे वीडियो गेम्स की लोकप्रियता के पीछे इस लैंग्वेज का अहम योगदान है। फायरफॉक्स, विनएंप और अडोबी के कई प्रोग्राम्स इस लैंग्वेज में ही लिखे गए हैं।
ऑब्जेक्टिव-सी
ऑब्जेक्टिव-सी को ब्रैड कॉक्स और टॉम लव की कंपनी स्टेपस्टोन ने 1980 की शुरुआत में डेवलप किया था। यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिग लैंग्वेज है, जिसका इस्तेमाल सी लैंग्वेज के सपोर्ट में किया जाता है। इस लैंग्वेज का सबसे ज्यादा इस्तेमाल एपल आइओएस और मैक ओएस एक्स में हो रहा है।
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