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Tuesday, February 27, 2018

टैक्स प्लानिंग की सटीक रणनीति -


वित्तीय वर्ष की के शुरुआती महीनों में ही निवेश की योजना बनाई जा सकती है। इसके जरिए आप निवेश का सही निर्णय ले पाएंगे।   
कर कटौती योग्य निवेश विकल्प को अलग करना
जो भी मद धारा 80 C के तहत आते हैं उन्हें दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। एक अनिवार्य और दूसरा वैकल्पिक। पहली श्रेणी में हैं लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम, आपके बच्चों की कोचिंग की फीस, प्रॉविडेंट कंट्रीब्यूशन और आपके घर के ईएमआई की किश्तें। ये ऐसी चीजें हैं जिनपर आप ज्यादा सोच विचार नहीं कर सकते हैं। इस कैटेगरी में जो भी आ रहे हैं उनका भुगतान करना ही होगा।
इन विकल्पों को गहराई से समझिए
स्कूल की फीस-
अगर आपके दो बच्चे हैं तो उनकी स्कूल की पढ़ाई, कॉलेज की पढ़ाई और यूनीवर्सिटी और भारत के किसी अन्य संस्थान में होने वाली पढ़ाई के लिए खर्च करना ही होता है और इसके लिए कर कटौती की कोई सीमा नहीं है।
अगर आपके दो से ज्यादा बच्चे हैं तो आपके तीसरे बच्चे के खर्च को आपकी कमाऊ पत्नी या पति अपने टैक्स में क्लेम कर सकते हैं। इसमें करदाता पर जो भी संभावित खर्च का भार आता है उसका आकलन साल की शुरुआत में आसानी से किया जा सकता है और उसी आधार पर टैक्स प्लानिंग भी।
प्रोविडंट फंड में करें योगदान-
जो लोग नौकरीपेशा हैं उनके लिए भी प्रोविडंट फंड भी जरूरी है और आपकी बेसिक सैलरी के आधार पर इसमें होने वाली सालाना कटौती का आंकलन टैक्स छूट के लिए किया जा सकता है। सरल भाषा में समझें तो आपकी सैलरी में से कुछ भी हिस्सा पीएफ के अंतर्गत काटा जाएगा उस पर आपको टैक्स की छूट मिलेगी।
3 लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम-
आप सभी लाइफ इंश्योरेंस बीमा पॉलिसियों के इंश्योरेंस प्रीमियम को भी इसमें शामिल करें। गर आप एक अतिरिक्त बीमा पॉलिसी लेने जा रहे है या उसकी योजना बना रहे हैं तो आप इसकी संभावित प्रीमियम राशि को भी अपनी लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम की अनुमानित  राशि में शामिल करें। आप अपनी संभावित या मौजूदा यूलिप पालिसी को भी अपने प्रीमियम में शामिल करना न भूलें। आपकी, आपकी पत्नी और आपके बच्चे की लाइफ इंश्योरेंस पालिसी का प्रीमियम कटौती योग्य होता है। हालांकि अगर आपकी कोई ऐसी बीमा पॉलिसी है जिसका प्रीमियम कुल बीमा राशी से 10 फीसदी अधिक है तो 10 फीसदी से ऊपर की रकम पर टैक्स कटौती का लाभ नहीं मिलेगा। लाइफ इंश्योरेंस पॉलसी को कम से कम दो साल तक चालू रखना जरूरी है। अन्यथा आप उस राशि पर टैक्स कटौती के लिए क्लेम नहीं कर सकते और आपको पिछले वर्षों में क्लेम की गई राशि पर टैक्स देना होगा।
4 होम लोन की मूल राशि की अदायगी-
आप अपने बैंक से ब्याज का अंतरिम प्रमाणपत्र मांगे जिसमें ब्याज की राशि समेत आपकी कुल ईएमआई राशि का महत्वपूर्ण घटक शामिल होता है। अगर आपने किसी वित्तीय संस्थान से होम लोन लिया है और आपने घर की पजेशन के बाद जो भुगतान किया है आप उस पर भी टैक्स रिबेट के लिए क्लेम कर सकते हैं। आपको अपने घर को कम से कम पांच साल तक (पजेशन के वित्तीय वर्ष के अंत से) रखना होगा। ऐसा न होने पर आपने जिस साल अपने घर को बेचा है उस साल आपको पहले मिली छूट राशि पर कर देना होगा। लाभ मिलेगा। घर खरीदने पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज की रकम पर भी आप छूट का दावा कर सकते हैं।
इन निवेश विकल्प से भी बचाएं टैक्स
ऊपर जिक्र किए गए मद पर खर्च करने के बाद भी कर छूट की सीमा 1.5 लाख रुपए की लिमिट पार नहीं होती तो आप तमाम अन्य विकल्पों का रुख कर सकते हैं। इनमें निवेश आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। प्राथमिक तौर पर इस श्रेणी में बैंक एफडी, पीपीएफ, एनएससी, ईएलएसएस और सीनियर सिटिजन स्कीम के तहत जमा की हुई राशि होती है। ये कुछ ऐसे मद हैं जिनमें हैं निवेश की रकम आपकी उम्र, आपके जोखिम की सीमा और आपकी अपेक्षित जरूरत पर निर्भर होती है।
सीनियर सिटिजन के लिए सीनियर सिटिजन में और 5 साल की बैंक फिक्सड डिपाजिट में पैसा जमा करना उचित होता है क्योंकि एक निश्चित अवधि में उस एक तय ब्याज मिल जाता है।
अन्य लोग जो लंबी अवधि के लिए निवेश कर सकते हैं उनके लिए ईएलसीसी जैसे विकल्प बेहतर परिणाम देते हैं। लंबी अवधि के लिए निवेश के लिहाज से धारा 80 सी के तहत आने वाले तमाम निवेशों में ईएलएसएस सबसे बेहतर रिटर्न देता है। तीन साल के लॉक इन पीरियड के बाद ईएलसीसी पर जो भी लाभ मिलता है वो टैक्स फ्री होता है।
ईएलसीसी के अंतर्गत साल की शुरूआत में हम अपने तय निवेश को एसआईपी के जरिए निवेश कर सकते हैं।  एसआईपी में निवेश के जरिए आप स्टॉक मार्केट के उतार चढ़ाव से अपने आप को बचा सकते हैं।  ईएलएसएस में एसआईपी के जरिए ‘रूपी कॉस्ट एवरेजिंग’ सिद्धांत के संदर्भ में आप लाभ कमा सकते हैं।
इस बजट में प्रस्तावित एनपीएस पर 50,000 रुपए के अतिरिक्त निवेश को आप 12 महीनों में बराबर बांट सकते हैं। हर महीने थोड़ा-थोड़ा करके आप सालभर में 50000 रुपए की राशि पर कर लाभ ले सकते हैं।
इस तरह तमाम निवेश विकल्पों पर वित्त वर्ष की शुरुआत में विचार करके आप कर प्लानिंग के लिए सटीक रणनीति बना सकते हैं।
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How to Save Income Tax : खर्च करिए और बचाइए इनकम टैक्‍स, सेविंग की भी नहीं होगी जरूरत

How to Save Income Tax : खर्च करिए और बचाइए इनकम टैक्‍स, सेविंग की भी नहीं होगी जरूरत

आपको यह बात थोड़ी आश्‍चर्यजनक जरूर लगे लेकिन सच्‍चाई यही है कि आप सिर्फ बचत या निवेश के जरिए ही नहीं बल्कि खर्च करके भी अपना इनकम टैक्‍स बचा सकते हैं।

इनकम टैक्‍स बचाने का सीजन आ गया है। हर कमाऊ व्‍याक्ति यही चाहता है कि उसे कम से कम टैक्‍स देना पड़े। आपको यह बात थोड़ी आश्‍चर्यजनक जरूर लगे लेकिन सच्‍चाई यही है कि आप सिर्फ बचत या निवेश के जरिए ही नहीं बल्कि खर्च करके भी अपना इनकम टैक्‍स बचा सकते हैं। आइए, जानते हैं कि कहां खर्च करने से बचता है आपका इनकम टैक्‍स।

मेडिक्‍लेम के प्रीमियम पर करें खर्च और पाएं 50,000 रुपए तक के डिडक्‍शन का लाभ
लगातार महंगे होते हेल्‍थकेयर को देखते हुए हर किसी के लिए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस लेना जरूरी है। इससे न केवल आप आपातकालीन परिस्थितियों में अस्‍पतालों के खर्च से बचते हैं बल्कि इसके प्रीमियम के पेमेंट पर आपको इनकम टैक्‍स में कटौती का लाभ भी मिलता है। अगर आप अपने और परिवार के लिए मेडिक्‍लेम लेते हैं तो 25,000 रुपए तक के प्रीमियम पर कटौती यानी डिडक्‍शन का फायदा मिलेगा। अगर आप अपने माता-पिता के मेडिक्‍लेम का प्रीमियम भी भरते हैं तो आपको 25,000 रुपए का एक्‍स्‍ट्रा बेनिफिट मिलेगा। मतलब कुल मिलाकर इस खर्च पर आप 50,000 रुपए तक बचा सकते हैं।
बच्‍चों की ट्यूशन फीस पर मिलता है डिडक्‍शन का लाभ
टैक्‍स बचाने के लिए जल्‍दबाजी में इंश्‍योरेंस पॉलिसी लेते हुए या फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट करवाते हुए लोग यह भूल जाते हें जिन प्राइवेट स्‍कूलों में वे अपने बच्‍चों की पढ़ाई करवा रहे हैं, उसकी ट्यूशन फीस के पेमेंट पर भी इनकम टैक्‍स की धारा 80सी के तहत डिडक्‍शन का फायदा मिलता है। सबसे पहले अपने बच्‍चों की सालाना फीस जोड़ कर देख लें कि यह डेढ़ लाख रुपए से कितना कम है। शेष राशि का निवेश आप बचत या खर्च के अन्‍य विकल्‍पों में कर सकते हैं।
गंभीर बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च पर भी मिलता है डिडक्‍शन का फायदा
आर्थिक रूप से आप पर निर्भर परिवार का कोई सदस्‍य अगर गंभीर बीमारी से पीडि़त है तो उसके इलाज पर होने वाले खर्च का दावा आप आयकर अधिनियम की धारा 80डीडीबी के तहत कर सकते हैं। कटौती का यह दावा पति या पत्‍नी, बच्‍चे, माता-पिता या भाई-बहनों के लिए किया जा सकता है। ध्‍यान रहे, इस धारा के तहत सिर्फ निवासी भारतीय ही टैक्‍स में कटौती का दावा कर सकते हैं। आप इलाज पर होने वाले वास्तविक खर्च या 40,000 रुपए, जो भी कम हो, का दावा कर सकते हैं। वरिष्‍ठ नागरिकों की गंभीर बीमारियों के इलाज पर खर्च की सीमा 60,000 रुपए और 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसकी सीमा 80,000 रुपए है।


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सैलरी इनकम पर टैक्स बचाने के लिए कटौती-

सैलरी इनकम पर टैक्स बचाने के लिए कटौती-

  1. वित्त वर्ष के भीतर धारा 80C के अंतर्गत करदाता को 1.50 लाख रुपए के निवेश पर कर छूट मिलती है।
  2. यह निवेश प्रॉविडंट फंड, पब्लिक प्रोवीडेंट फंड, खुद के लिए, अपनी पत्नी और बच्चों के लिए लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम के माध्यम से किया जा सकता है। इसके अलावा दो बच्चों की स्कूल की फीस के जरिए आयकर में छूट प्राप्त कर सकते हैं।
  3. आप नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और किसी बैंक में पांच साल के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट, म्‍यूचुअलफंड को खरीद कर भी इनकम टैक्स बचा सकते हैं।
  4. धारा 80CCC के तहत आप सालाना फंड में 1.5 लाख तक का निवेश कर सकते हैं।
  5. धारा 80CCD के तहत आप अपने एनपीएस अकाउंट में 1.5 लाख तक का योगदान दे सकते हैं।
  6. ध्यान रहे धारा 80C, 80CCC और 80 CCD के तहत होने वाली कुल कटौती की सीमा को 1.50 लाख से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता है।
  7. अगर आप खुद के या अपनी पत्नी और बच्चों के लिए सालाना 25,000 रुपए का मेडिकल इंश्योरेंस लेते हैं तो धारा 80Dके तहत आप इसके जरिए कर में छूट पा कर सकते हैं।
  8. आप अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेकर 25,000 रुपए के प्रीमियम भुगतान पर कर छूट पा सकते हैं। इसके लिए आपको माता और पिता दोनो के लिए 21,000 रुपए की राशि निवेश करनी होगी।
  9. अगर आप सीनियर सिटिजन है या आपके माता-पिता सीनियर सिटिजन हैं तो आप 20,000 के बजाए 25,000 की छूट का दावा कर सकते हैं।
  10. मेडिक्लेम की समग्र सीमा के भीतर आप स्वास्थ्य जांच के लिए 5,000 रुपए तक की राशि के लिए दावा कर सकते हैं, लेकिन यह भुगतान नकद होना चाहिए।
  11. अगर हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान नकदी की तुलना में अन्य माध्यमों के जरिए हुआ हो तो भी यह कर कटौती के योग्य होता है।
  12. राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश की गई राशि में से 50 फीसदी धारा 80 CCG के तहत क्लेम की जा सकती है। इसमें निवेश की अधिकतम लिमिट 50,000 रुपए है।
  13. धारा 80 DD के तहत अपने आश्रित सदस्य जैसे कि पत्नी, माता पिता, बच्चे या भाई बहन के लिए 75000 रुपए मेडिकल खर्चों के तौर पर ले सकतें हैं अगर उन्हें 40 फीसदी विकलांग्ता है। गंभीर विकलांगता में यह लिमिट 1,25,000 रुपए है।
  14. धारा 80DDB के तहत 60 वर्ष से कम की आयु का व्यक्ति किसी विशेष बीमारी के ट्रीटमेंट के लिए 40,000 रुपए तक क्लेम कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 60,000 रुपए और अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 80,000 रुपए है।
  15. धारा 80E के तहत स्वयं, पत्नी या बच्चे की पढ़ाई के लिए लिया गया लोन कटौती के लिए क्लेम कर सकते हैं।
  16. धारा 24B के तहत होम लोन की ईएमआई पर लगने वाले ब्याज को क्लेम किया जा सकता है। सेल्फ ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम लिमिट 2 लाख रुपए प्रति वर्ष है।
  17. धारा 80EE– होम लोन के लिए भुगतान किए गए ब्याज पर आईटी एक्ट के अंतर्गत सेक्शन 24 में किसी भी वित्तीय वर्ष में 2 लाख 50 हजार रुपए के टैक्स बेनिफिट के लिए क्लेम कर सकते हैं।
  18. धारा 80G– किसी भी अप्रूव्ड फंड, ट्रस्ट, पूजा के स्थान की मरम्मत आदि के लिए किए गए डोनेशन पर इस सेक्शन के तहत कटौती मिलती है।
  19. धारा 80GG– इस सेक्शन के तहत अपनी सैलरी पर टैक्स तभी बचा सकते हैं अगर आपको एचआरए नहीं मिलता।
  20. धारा 87A– यह उस भारतीय नागरिक को टैक्स रिबेट मिलती है जिसकी कुल आय 5 लाख से कम है।
  21. धारा 80 TTA– इसके तहत अपने सेविंग बैंक, पोस्ट ऑफिस आदि पर मिलने वाले ब्‍याज को भी कर कटौती के लिए क्‍लेम कर सकते हैं, बशर्ते इसकी सीमा 10,000 रुपए से ज्‍यादा न हो।
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टीडीएस क्या है – Meaning of TDS

टीडीएस क्या है Meaning of TDS




TDS की Full Form होती है – Tax Deducted at Source यानी स्रोत पर कर कटौती|
TDS आयकर अधिनियम, 1961 के तहत प्रत्यक्ष कर (Income Tax) जमा करने का एक मुख्य तरीका  है| TDS, आयकर यानि कि Income tax का ही एक हिस्सा हैं जिसे सरकार अग्रिम (Advance) रूप में collect करती हैं|
TDS मुख्यतः उनकी कटती है जो किसी संस्थान से एक निश्चित सीमा से अधिक payment ले रहे हो | या फिर ये तब कटी जाती है जब आप किसी सरकारी संस्थान से किसी प्रकार का लेन देन कर रहे हो |

सामान्यतया TDS, विभिन्न तरह के Payment पर काटा जाता है| TDS की Rate किये गए भुगतान (Payment) के Nature पर निर्भर करता है| अलग अलग तरह के payments के लिए Income Tax कानून में अलग अलग तरह की TDS Rates हैं| जिस तरह का payment होगा, उस हिसाब से Rates लगाई जाती है| फिर जिसे TDS काट कर Payment किया गया है, उसे Income Tax चुकाते समय इसकी छूट मिल जाएगी|
जैसे:- मान ले की A ने B को 3 लाख Payment किया, तो Payment के प्रकार से उसकी रेट तय होगी और उस पर उतना TDS कटेगा| तो मान ले की इस 3 लाख पर A ने 10% TDS काट कर B को 270000 काPayment किया| A यह 30000 सरकार को जमा करवा देगा और जब B अपना FinalIncome Tax चुकाएगा तो उसे 30,000 की उसमे छुट मिल जाएगी| TDS इस प्रकार से काम करता है|

टीडीएस का मतलब होता है टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स। यह इनकम टैक्स को आंकने का एक तरीका हैं।

अगर आप नौकरी पेशा या किसी व्यापार से जुड़े हैं तो आप टीडीएस के बारे में बखूबी जानते होंगे। स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस वह निश्चित प्रतिशत हिस्सा होता है, जो सैलरी, कमीशन, रेंट, इंट्रेस्ट, प्राइज मनी या डिविडेंड जैसी विभिन्न प्रकार की अदायगी पर काटा जाता है। तरह-तरह की आमदनी के लिए अलग-अलग टीडीएस दरें लागू होती हैं। मसलन, अगर फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिला ब्याज 10 हजार रुपए से अधिक है, तो उस पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाएगा। हम आपको अपनी इस खबर के माध्यम से यही बताने की कोशिश करेंगे कि किस मद में कितना टीडीएस काटा जाता है,
लॉटरीपजल्सकंपटीशन औऱ हॉर्स रेस में 30 फीसदी
लॉटरी में 10,000 रुपए तक और हॉर्स रेस में 5000 रुपए तक की राशि टीडीएस कटौती से मुक्त है। अगर कमाई इससे ज्यादा होती है तो उस पर 30 फीसदी की दर से टीडीएस कटौती होगी।
बैंक अकाउंट पर 10 फीसदी
टीडीएस की कटौती तभी की जाती है जब फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग बैंक अकाउंट से सालाना 10,000 रुपए तक का ब्याज मिलता है। यह दर 10 फीसदी होती है।
मकान किराए से मिलने वाली आय पर 10 फीसदी
अगर आपकी आपके मकान से होने वाली आय सालाना 1.8 लाख से कम है तो आपकी इस आय पर टीडीएस की कटौती नहीं होगी। इससे अधिक होने पर आपकी इस तरह की आय पर 10 फीसदी की टीडीएस कटौती होगी।
प्रापर्टी बेचने पर 1 फीसदी
अगर आप ग्रामीण क्षेत्र में 20 लाख तक की कोई प्रॉपर्टी बेचते हैं तो आपकी इस आमदनी पर टीडीएस की कटौती नहीं होगी। वहीं अगर आप शहर में 50 लाख तक की प्रॉपर्टी बेचते हैं तो भी आपकी इस आय पर टीडीएस कटौती नहीं होगी। आमदनी इससे ऊपर होने पर आपको 1 फीसदी की दर से टीडीएस कटवाना होगा।
सोने और चांदी की खरीद में 1 फीसदी
अगर आप 2 लाख से ऊपर का सोना या चांदी कैश देकर खरीदते हैं तो विक्रेता आपके इस भुगतान में टीडीएस की कटौती करेगा।
डिबेंचर से होने वाली कमाई पर 10 फीसदी
जुलाई 2012 से डिबेंचर में किए गए निवेश से मिलने वाले ब्याज पर 5,000 रुपए तक की ही छूट है, यानी इतनी राशि पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा। इससे ऊपर की कमाई पर 10 फीसदी की दर से टैक्स काटा जाएगा।
नेशनल सेविंग स्कीम में 20 फीसदी
अगर आपने नेशनल सेविंग स्कीम में निवेश कर रखा है, तो आपको मिलने वाले भुगतान में सिर्फ 2,500 तक की राशि की टीडीएस कटौती से छूट के दायरे में आएगी। इससे ऊपर की आय पर आपको 20 फीसदी की दर से टीडीएस कटवाना होगा।
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Monday, February 26, 2018

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IITM COMPUTER TRAINING CENTRE MATHURA


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DOAP COURSE IN MATHURA




Course:DIPLOMA IN OFFICE AUTOMATION & PUBLISHING (DOP0073)
Duration:1 Year
Content:Computer Concept & Fundamental, Operating System, DOS, Note Pad, Word Pad, MS Paint, MS Office (Word, Excel, Power Point), Introduction to Internet & Email, HTML, Web Page Designing, Typing Master, Computerized Accounting in Tally ERP.9, DTP (Page Maker, Corel Draw, Photoshop), Computer Network & Internet, Project / Assignment.

CALL@8899251616, 8273607812


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SOLID WORKS TRAINING IN MATHURA



Course:Certificate in AutoCAD+ Solid-Works (CAS0558)
Duration:3 Months
Content:AutoCAD :- 2D Drafting, 3D Modeling & visualization, Plotting Drawings, Lighting & Rendering Techniques, Productivity Tools. Solid-Works :- Solid Works Drawing, Advance Part Modeling, Assembly Modeling, Surface Modeling, Sheet Metal Design, Solid Works Simulation. Advanced Project.
CALL@8899251616, 8273607812



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HARDWARE NETWORKING COURSE



Course:Certificate Course in Hardware & Networking (CCH0553)
Duration:3 Months
Content:Introduction To Computers & Hardware Parts, CMOS/BIOS Utility, Hard Disk Formatting, LAN/WAN Concepts, Installation of OS, Installation of Application Software, Assembling, Troubleshooting, OS DVD,MIX Software CD etc.

CALL @ 8899251616, 8273607812


Course:1 YEAR DIPLOMA IN COMPUTER HARDWARE (DCH0432)
Duration:1 Year
Content:Computer Fundamentals, Windows 7, Construction & Functioning of Different PC Parts (Monitor, Mother Board, Hard Disk, CD-ROM, Video System, Sound System, Modems etc.), Configuring the CMOS Setup, Maintenance & Troubleshooting, Software Installation, Troubleshooting,Computer Virus, LAN, Networking
MCSE Sever 2012, Linux,  CCNA  etc.
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TALLY GST IN MATHURA

IITM COMPUTER EDUCATION

 NEW BUS STAND, MATHURA

CALL @ 8899251616, 8273607812



Course:Certificate Course in Tally ERP9 (CCT0552)
Duration:3 Months
Content:Tally Entry Level, Purchase Entries, Sales Entries, Receipt Entries, Payment Entries, Contra Entries, Memorandum Entries, Journal Entries, Tally Advance Level, Multiple Godowns, Stock Journal, Physical Stock Journal, Interest Calculation, Order Processing &Tracking, GST/Batch wise /cmp logo / pos invoice / chq. Print, Reporting.
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TALLY ERP WITH GST COURSE


IITM COMPUTER EDUCATION 
NEW BUS STAND, MATHURA

PH. 8899251616, 8273607812

Course:Certificate Course in Tally ERP9 (CCT0552)
Duration:3 Months
Content:Tally Entry Level, Purchase Entries, Sales Entries, Receipt Entries, Payment Entries, Contra Entries, Memorandum Entries, Journal Entries, Tally Advance Level, Multiple Godowns, Stock Journal, Physical Stock Journal, Interest Calculation, Order Processing &Tracking, GST/Batch wise /cmp logo / pos invoice / chq. Print, Reporting.
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Computer Basic course


Computer Concepts,
Fundamentals Of Computers,
Operating System (Ms Dos, Ms Windows Xp/7/8),
Notepad, Wordpad, Paint,
Microsoft Office (Word, Excel, Power Point, Access)
Introduction To Internet & Email.
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Basic course in mathura


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Operating System (Ms Dos, Ms Windows Xp/7/8),
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ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स - O level Computer Course in Hindi

ईर्ष्या और जलन दोनों में आखिर अंतर क्या है ?

ईर्ष्या और जलन दोनों में आखिर अंतर क्या है ? ज्यादातर लोगो को यह लगता होगा की ईर्ष्या और जलन (Jealousy) एक ही है। दरसल दोनों अलग है। ई...

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