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Showing posts from April, 2012

क्या झुठला दी जाएगी आइंस्टीन की थ्योरी

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वैज्ञानिकों ने ऐसा कण खोज निकाला है जो रोशनी की रफ्तार से भी तेज भाग सकता है. यानी यह आइंस्टीन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को गलत साबित करता है. इस थ्योरी के मुताबिक , कोई भी चीज रोशनी से तेज नहीं भाग सकती. लेकिन न्यूट्रिनो नाम के जिस कण को खोजा गया है , उसकी स्पीड लाइट से भी तेज पाई गई है. क्या है न्यूट्रिनो- यह एटम के भीतर छिपे कण हैं जिन्हें न्यूट्रिनो नाम से जाना जाता है. असल में न्यूट्रिनो इतने महीन कण हैं कि कुछ समय पहले ही यह पता चल पाया कि इनमें भार भी होता है. जब इनकी स्पीड चेक की गई तो पता लगा कि ये लाइट की स्पीड से भी तेजी से आगे बढ़ते हैं। अगर वैज्ञानिकों की यह खोज सही साबित होती है तो आइंस्टीन की थ्योरी खारिज हो जाएगी। न्यूट्रिनो का यह टेस्ट यूरोपियन न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर ( सर्न ) और इटली की एक लैबरटरी ने मिलकर किया था। इसमें पाया गया कि न्यूट्रिनो की रफ्तार 3 लाख और 6 किलोमीटर प्रति सेकंड है. यानी यह लाइट की स्पीड से छह किलोमीटर प्रति सेकंड ज्यादा है.

नहीं था नतीजे का अंदाजा – प्रयोग में शामिल रहे भौतिकी विशेषज्ञ एन्टोनियो इरेडितातो ने कहा कि इस नतीजे से हम बेहद हैरान हैं क्य…

बिन चश्मा थ्री डी मोबाइल

अवतार और एलिस इन वंडरलैंड जैसी थ्रीडी फिल्मों की पॉप्युलैरिटी ने दिखा दिया है कि आने वाला जमाना थ्रीडी तकनीक का ही है। लोगों की इस नब्ज को भांपकर जापान की इलेक्ट्रॉनिक कंपनी शार्प ने ऐसे थ्रीडी फोन बनाने का ऐलान किया है जिनका मजा बिना स्पेशल चश्मों के उठाया जा सकेगा। 

हाल ही में इस कंपनी ने तीन इंच का एलसीडी डिस्प्ले स्क्रीन पेश किया था जिसमें बिना चश्मे के थ्रीडी एनिमेशन दिखाई दिया। इसके अलावा एक ऐसा टच पैनल स्क्रीन भी लोगों की नजर किया गया जिसमें आप एक थ्रीडी फोटो को फ्लिक करके दूसरे थ्रीडी फोटो तक जा सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसी किताब के पन्ने पलटे जाते हैं। इसी तरह की थ्रीडी तकनीक वाला एक कैमकॉर्डर भी लोगों के सामने रखा गया जिसमें शूट किए गए विडियो थ्रीडी में दिख रहे थे। 

ये थ्रीडी इमेज स्क्रीन से 12 इंच की दूरी तक बिना चश्मे के देखे जा सकती हैं। इस तकनीक को इस तरह डिवेलप किया गया है कि स्क्रीन पर दिखने वाली इमेज दोनों आंखों को अलग-अलग किस्म की दिखाई देती है। इस वजह से इस तरह का भ्रम पैदा होता है कि हम कोई थ्रीडी फोटो देख रहे हैं। 

यह इलेक्ट्रॉनिक कंपनी 2002 से थ्रीडी प्रॉडक्ट पर …

विंडोज 8 ने बदली तकनीक

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विंडोज 8 ने बदली तकनीक
माइक्रोसॉफ्ट ने यूजर इंटरफेस का डिजाइन बदला तो है ही, उसने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उसमें पूरी बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी हो। इस पर विंडोज 7 के सभी एप्लिकेशन चलते हैं और विंडोज 7 से इसमें अपग्रेड करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। विंडोज 7 पर चलने वाले सभी हार्डवेयर इस पर भी चलेंगे। इसमें कम्पैटिबिलिटी को लेकर कोई दिक्कत नहीं आएगी और न ही इसमें अतिरिक्त ड्राइवर की जरूरत होगी. दो साल पहले लॉन्च किए गए विंडोज 7 ने खुद को माइक्रोसॉफ्ट का अब तक का सबसे टिकाऊ ऑपरेटिंग सिस्टम साबित किया है. अब माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज 8 लॉन्च किया है, जिसका मकसद न सिर्फ अपनी पुरानी कामयाबी को दोहराना बल्कि कंप्यूटर चलाने के तौर-तरीके में बदलाव लाना है. बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी
माइक्रोसॉफ्ट ने यूजर इंटरफेस का डिजाइन बदला तो है ही, उसने यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि उसमें पूरी बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी हो। इस पर विंडोज 7 के सभी एप्लिकेशन चलते हैं और विंडोज 7 से इसमें अपग्रेड करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। विंडोज 7 पर चलने वाले सभी हार्डवेयर इस पर भी चलेंगे। इसमें कम्पैटिबिलिटी को लेकर…

एलियंस की खोज के लिए वेबसाइट लॉंच

क्या इस ब्रह्माण्ड में मनुष्यों के अलावा एलियन या दूसरे प्राणी भी रहते हैं इस बात को लेकर कई वर्षों से विवाद बना हुआ है। कुछ लोगों का मानना है कि एलियन होते हैं तो कुछ लोग इसे कोरी कल्पना क़रार देतें हैं। यहां तक की वैज्ञानिकों की राय भी इस मामले में बटी हुई है। लेकिन अब एलियन की खोज के लिए एक और पहल की गई है। एलियन की खोज में आम आदमी को शामिल करने के लिए एक वेबसाइट को लॉंच किया गया है।

अमरीकी शहर लॉस एंजेल्स में टेड( टेक्नोलोजी, इंटरटेनमेंट और डिज़ाइन) कॉंफ़्रेंस के दौरान ये वेबसाइट लॉंच की गई है जिसका नाम है 'सेटीलाइव डॉट ओआरजी'। ये वेबसाइट सेटी(सर्च फॉर एक्सट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस) एलेन टेलिस्कोप के ज़रिए संचारित रेडियो तरंगों को सीधे प्रसारित करेगा। इसमें भाग लेने वालों को कहा जाएगा कि अगर उन्हें कोई भी असामान्य गतिविधि दिखे तो वे फ़ौरन इसकी जानकारी दें।

ऐसा माना जाता है कि इंसानों का दिमाग़ उन चीज़ो को भी देख सकता है जो कि शायद कोई स्वचालित मशीन नहीं देख सकता। इस वेबासाइट को लॉंच किए जाने का मुख्य उद्देश्य ये है कि धरती पर रहने वाले आम आदमी भी अगर चाहे तो ब्रह्माण्ड में…

नई पीढ़ी के सवालों के लिए तैयार हैं आप?

वह दस साल की बच्ची है। उसका नाम है ऐश्वर्या। हालांकि उसका ऐश्वर्या बच्चन से कोई लेना-देना नहीं है, जो एक जानी-मानी शख्सियत हैं। संभव है कि इस खूबसूरत अभिनेत्री ने 1990 के दशक में सौंदर्य स्पद्र्धा में सवालों के अच्छे ढंग से जवाब दिए हों और संभवत: जजों ने उनसे बेहतरीन सवाल भी पूछे हों। लेकिन इस दस वर्षीय ऐश्वर्या पाराशर ने जो सवाल पूछा है, उसने न सिर्फ जजों, आम भारतीयों, अग्रणी विशारदों बल्कि समूची सरकार को उलझन में डाल दिया है। उसका एक सवाल, जो उसके शहर लखनऊ के स्थानीय राइट टू इंफॉर्मेशन ऑफिसर के समक्ष पेश किया गया था, सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा। वहां से इसेगृह मंत्रालय भेजा गया और इसके बाद यह राष्टरीय अभिलेखागार (एनएआई) तक पहुंचा। देश के इतने बड़े-बड़े कार्यालयों में घूमने के बाद, पांचवीं कक्षा में पढऩे वाली इस बच्ची को जवाब में एनएआई के असिस्टेंट डायरेक्टर का पत्र मिला। इसमें कहा गया, 'आपने जो जानकारी मांगी है, उससे संबंधित कोई खास दस्तावेज हमारे पास नहीं हैं।' पत्र में उस बच्ची से यह भी कहा गया था कि यदि वह खुद एनएआई के ऑफिस में आकर इस संदर्भ में कोई खोजबीन करना चाहत…