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Showing posts from September, 2010

कम्प्यूटर नेटवर्किग है बेहद डिमांडिंग

गोपाल  को एक बार कारोबार के सिलसिले में अपने शहर से दूर सिंगापुर जाना पडा। एक दिन वहां के मशहूर बाजार में घूमते हुए उन्हें एक सामान पसंद आ गया। उस कीमती वस्तु को खरीदने के लिए उन्होंने अपना पर्स खोला, तो उसमें उतने पैसे नहीं थे। एकाएक उन्हें अपने क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड याद आए। फिर चिंता किस बात की। उन्होंने एटीएम से पैसे निकाले और भुगतान कर दिया। दरअसल, यह कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कमाल है। क्रेडिट-डेबिट कार्ड के अलावा नेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग, रेल या एयर रिजर्वेशन आदि भी नेटवर्किग के ही उदाहरण हैं। एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर, एक ऑफिस या एक शहर से दूसरे शहर या फिर एक देश से किसी अन्य देश में डाटा का ट्रांसफर भी नेटवर्किग का ही कमाल होता है।
क्या है नेटवर्किग?
नेटवर्किंग शब्द नेट यानी जाल से बना है, जिसका अर्थ है दो या दो से अधिक चीजों को आपस में जोडना। कम्प्यूटर के संदर्भ में नेटवर्किग का मतलब है दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को एक कंपनी, एक शहर, एक देश के विभिन्न स्थानों को आपस में जोडना व उनके संस्थानों को एक्सेस करना तथा विश्व के किसी भी कोने में स्थित कंप्यूटरों …

आईटी की बहार हैं संभावनाएं अपार

ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत का इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर इस समय प्रति वर्ष करीब 25 प्रतिशत की दर से आगे बढ रहा है। स्टडी के अनुसार आईटी सेक्टर के विकास की यह रफ्तार अगले पांच साल तक इसी तरह बनी रहेगी। इस विकास का प्रमुख कारण देश की आर्थिक तरक्की है, जिसकी वजह से विश्वव्यापी मंदी (खासकर अमेरिका में) के बावजूद भारत आईटी और बीपीओ (बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिग) के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बना हुआ है। हालांकि, रुपये के मुकाबले डॉलर के लगातार गिरते मूल्य के कारण इंडियन बीपीओ कंपनियों के मुनाफे में काफी गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद उनके बिजनेस में लगातार इजाफा हो ही रहा है। इन सबके कारण आउटसोर्सिग से वर्ष 2010 तक देश को करीब 60 करोड डॉलर की आमदनी होने की उम्मीद है।
डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम आईटी सेक्टर में भारत के वर्चस्व को दुनिया में बनाए रखने के लिए सबसे बडा चैलेंज है-स्किल्ड मैनपॉवर की कमी को पूरा करना। देश के आईटी सेक्टर के सामने सबसे बडी समस्या पर्याप्त संख्या में एक्सपर्ट्स उपलब्ध न होना है। इस बारे में देश की सबसे बडी आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्…

नेटवर्किग-हार्डवेयर में हैं खूब अवसर

इन दिनों अधिकांश स्टूडेंट अपने मनपसंद कोर्सो में एडमिशन की जद्दो जहद में लगे होंगे। लेकिन ऐसे भी तमाम स्टूडेट हैं, जो किसी कारण बारहवीं के बाद आगे की रेगुलर पढाई करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे युवा कोई ऐसा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, जिसे पूरा करने के बाद उन्हें ठीक-ठाक नौकरी मिल जाए। आज के आईटी एज में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध हैं। ऐसे कोर्सो में प्रमुख है-कम्प्यूटर आधारित हार्डवेयर एवं नेटवर्किग का कोर्स। कम्प्यूटर आधारित काम-काज के बढने से हार्डवेयर इंजीनियरों की खूब मांग है।
क्या है हार्डवेयर-नेटवर्किग? कम्प्यूटर की दुनिया में मुख्य रूप से दो तरह का काम होता है-पहला सॉफ्टवेयर का, जिसकी मदद से कम्प्यूटर काम करता है और दूसरा, हार्डवेयर का, जो कम्प्यूटर की मशीनरी होता है। इसमें मुख्य रूप से सीपीयू यानी हार्ड डिस्क, मदर बोर्ड, मॉनीटर, माउस आदि होते हैं, जिनकी मदद से कम्प्यूटर को ऑपरेट किया जाता है। नेटवर्किग के तहत एक जगह के कम्प्यूटर को उसी जगह या किसी अन्य शहर या देश में स्थित कम्प्यूटरों से जोडा जाता है, ताकि उनके डाटा आपस में शेयर किए जा सकें। नेटवर्किग का काम मुख्यत: त…

ऐसे लोग हमेशा दुखी ही रहते हैं जो...

एक आदमी रोज- रोज मंदिर जाता और प्रार्थना करता है,  हे भगवान मैं जीवन से बहुत परेशान हूं मुझे दुखों से मुक्ति दे दो। मुझे मोक्ष चाहिये, मुझे मोक्ष दिला दो। एक दिन भगवान परेशान हो गए क्योंकि वह रोज सुबह-सुबह पहुंच जाता और गिड़गिड़ता कि मैं दुखी हूं।

एक दिन भगवान प्रकट हो गए और बोले तुझे मुक्ती चाहिए तो लो इसी वक्त लो, यह खड़ा है विमान बैठकर चलो। वह आदमी घबरा कर बोला अभी, एकदम कैसे हो सकता है? अभी मेरा लड़का छोटा है। जरा जवान हो जाए उसकी शादी हो जाए फिर चलूंगा। भगवान ने कहा फिर तू मुझे रोज-रोज परेशान क्यों करता है। सुबह से रोज चिल्लाना शुरू कर देता है।

अगर मोक्ष नहीं चाहिए तो क्यों मुझे व्यर्थ ही परेशान करता है। वह व्यक्ति बोला भगवान किसने कहा मुझे मोक्ष नहीं चाहिए लेकिन अभी नहीं आप मुझे आश्वासन दे दें। अब उस व्यक्ति का बेटा जवान हो गया और उसकी शादी हो गई। भगवान फिर प्रकट हुए और बोले चलो मेरे साथ मे तुम्हें मोक्ष के लिए लेने आया हूं। लड़के की तो अभी शादी हुई है।

कम से कम एक बच्चा हो जाए, पोते या पोती का सुख देख लूं, फिर मैं बिल्कुल तैयार हूं। भगवान फिर वापस चले गए। ऐसे क…

सफलता के लिए चाहिए सच्ची लगन

उन्नीसवीं सदी की घटना है। एक बार बंगाल में भीषण अकाल और महामारी का कहर टूट पड़ा। लोग दाने-दाने को तरसने लगे। चारों ओर हाहाकार मच गया।
ऐसी विकट स्थिति में एक दिन बाजार में एक असहाय बालक एक व्यक्ति से पैसे मांगने लगा-बाबूजी दो पैसे दे दो, बहुत भूखा हूं। उस व्यक्ति ने पूछा- यदि में तुम्हें चार पैसे दूं, तो क्या करोगे? बालक ने जवाब दिया-दो पैसे की खाने की सामग्री लूंगा और दो पैसे मां को दूंगा।
व्यक्ति ने फिर प्रश्न किया-अगर मैं तुम्हें दो आने दूं तो? अब बालक को लगा कि यह व्यक्ति उसका उपहास कर रहा है और वह चलने को हुआ। तब उस व्यक्ति ने बालक का हाथ पकड़ लिया और आत्मीयता से बोला- बताओ दो आने का क्या करोगे? बालके की आंखों में आंसू आ गए। वह बोला-एक आने का चावल लूंगा और शेष मां को दूंगा। मां की प्राणरक्षा हो जाएगी। तब उस व्यक्ति ने बालक को एक रुपया दिया। बालक प्रफुल्लित हो कर चला गया।
वही व्यक्ति कुछ वर्षों बाद एक दुकान के सामने से गुजर रहा था। दुकान पर बैठे युवक की दृष्टि जैसे ही उस व्यक्ति पर पड़ी, वह दौड़कर आया और उसके चरण छूकर विनम्रता के साथ उसे अपनी दुकान पर ले गया। युवक  न…

सफलता के लिए इन बातों का ध्यान रखें

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सफलता के लिए इन बातों का ध्यान रखें Source: पं. विजयशंकर मेहता कम्प्यूटर के दौर में हर चीज के शार्टकट ने हमारे दिमाग में घर कर लिया है। बिना शार्टकट अब शायद ही कोई काम होता हो। जीवन के प्रति इस रवैए ने हमारे समाज में भ्रष्टाचार के बीज बो दिए हैं। किसी काम में अगर भ्रष्टाचार शामिल हो जाए तो सफलता दूषित हो जाती है। और ऐसी सफलता आनंद नहीं, अशांति ही देती है।


यह तत्काल का समय है। सभी को सबकुछ जल्दी चाहिए। इस चक्कर में कुछ लोग शार्टकट अपना लेते हैं। सफलता के मामले में शार्टकट कभी-कभी भ्रष्टाचार और अपराध की सुरंग से भी गुजार देता है। हनुमानजी सफलता का पर्याय हैं। इनके यशगान हनुमानचालीसा में प्रथम पंक्तियों में गुरु की शरण की बात लिखी गई है। इस शरणागति का मतलब है मेरे पूर्ण पुरुषार्थ के बाद भी कोई शक्ति है जो मुझे असफलता से बचाएगी। इस शरणागति को मजबूत बनाने के लिए ही तुलसीदासजी ने हनुमानचालीसा के पहले दोहे में च्च्जो दायकु फलचारिज्ज् लिखा है।


यूं तो किसी भी ग्रंथ की फलश्रुति अंत में बताई जाती है पर यहाँ पहले ही लिख देने का कारण यही है कि सब लोग आज तुरंत फल चाहते हैं। ये चार फल ह…

कॉरपोरेट जीवन में प्रगति के गुर

कॉरपोरेट जीवन में प्रगति के गुर Source: Career Mantra 


जब कॅरियर की बात आती है तो हर कोई अपनी भूमिका और जवाबदेही के लिहाज से आगे बढ़ना चाहता है। शिखर पर पहुंचने की राह कठिन जरूर है, लेकिन सही तौर-तरीके और कार्य संस्कृति को अपनाकर तेजी से इस दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। यहां कुछ ऐसी बातें पेश हैं, जिनके जरिए आप अपने सहकर्मियों व वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

मल्टीटास्किंग : आज के जटिल माहौल में मल्टीटास्किंग की उपयोगिता को नकारना मुश्किल है। बस ध्यान देने वाली बात यह है कि हर काम को सही तरह से और प्राथमिकतानुसार अंजाम दिया जाए। आपका लक्ष्य कम से कम करके रुक जाना नहीं होना चाहिए। अतिरिक्त कार्यभार तो लें, लेकिन यह भी ख्याल रहे कि इससे आपकी मौजूदा जिम्मेदारियां प्रभावित न हों।

नकारात्मकता से दूर : क्रोध, शिकायतें, इल्जाम लगाना, बुरा-भला कहने की आदत आपकी निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हुए आपके काम पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। अपने सहकर्मियों का दोष निकालने से कोई फायदा नहीं होता। चुप रहें और अपने काम से काम रखें।

नेटवर्क बनाएं: नेटवर्क बनाना आज का मंत्र है। ख…

हैकिंग.. अच्छी भी

और भी हैं राहें
हैकिंग का नाम सुनते ही जहन में कंप्यूटर हैक करने वालों की नकारात्मक छवि सामने आती है। लेकिन एथिकल हैकिंग के रूप में इसका सकारात्मक आयाम भी है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि एथिकल (नैतिक) हैकर का काम काफी अर्थप्रद और चुनौतीपूर्ण है। अगर आप भी इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, तो किसी प्रतिष्ठित संस्थान से ही इसका कोर्स करें। इंटरनेशनल डाटा कॉर्प (आईडीसी) द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि इस क्षेत्र में फिलहाल विश्वव्यापी स्तर पर तकरीबन ६क्,000 दक्ष पेशेवरों की दरकार है।

क्या है यह
सुरक्षा तो यूं भी महत्वपूर्ण पहलू है लेकिन जब दुनियाभर में मौजूद नेटवर्क की सुरक्षा की बात आती है, तो इस क्षेत्र में काम करने के बहुत से विकल्प बनते हैं। हैकिंग से साबका पड़ने वाले कई युवा, भले ही उनका वास्ता नकारात्मक ढंग से पड़ा हो, अब इस कॅरियर की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इस क्षेत्र में काम देते वक्त कंपनियां आपकी योग्यता को बखूबी परखती हैं। बस यह ध्यान रखना है कि आपके कांट्रैक्ट की शर्ते ठीक हों।

सुरक्षा की आवश्यकता
आज के समय में सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा हो गई है। यह…

नोकिया फोन पर उपलब्ध है इग्नू का इंग्लिश कोर्स

नोकिया फोन पर उपलब्ध है इग्नू का इंग्लिश कोर्स नई दिल्ली, एजेंसी
दूरस्थ शिक्षा में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की अपनी पहल के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने मंगलवार को नोकिया फोन के 'ओवी लाइफ टूल्स' के जरिए इंग्लिश का एक सर्टिफिकेट कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
इग्नू के उपाध्यक्ष वी.एन. राजशेखरन पिल्लई ने संवाददाताओं से कहा, ''शुरुआत में हम महाराष्ट्र के छह जिलों में यह कार्यक्रम शुरू करेंगे। छह महीने बाद लोगों की इसके लिए प्रतिक्रिया जानने के बाद हम राष्ट्रीय स्तर पर यह शुरुआत करेंगे।''
इग्नू ने इस कार्यक्रम को उपलब्ध कराने के लिए नोकिया के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है।
पिल्लई ने कहा, ''हम इस कार्यक्रम के लिए नोकिया के साथ एक विशेष समझौता कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए किया गया यह अपनी तरह का पहला सहयोगात्मक समझौता है।'' उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा की उन्नति और प्रचार-प्रसार के लिए अन्य कंपनियों के साथ भी ऐसे समझौते किए जाएंगे।
इंग्लिश में छह महीने की अवधि का यह सर्टिफिकेट कार्यक…

डिस्टेंस-एजुकेशन दूर करें दूरी

इन दिनों तेजी से बदलते समय का प्रभाव हर चीज पर पड रहा है। और इससे शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं है। यही वजह है कि शिक्षा के स्वरूप, उद्देश्य और यहां तक कि शिक्षा के माध्यमों में भी काफी बदलाव देखा जा सकता है। परिणामस्वरूप इन दिनों सरकार न केवल शिक्षण-संस्थानों की संख्या में बढोत्तरी करने जा रही है, बल्कि शिक्षा रोजगारपरक भी हो, वह इस दिशा में भी पुरजोर कोशिश कर रही है। और सरकार की इस कोशिश में रेगुलर स्टडी सिस्टम ही नहीं, बल्कि ओपेन यूनिवर्सिटीज व डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स भी अपना-अपना अहम रोल अदा कर रहे हैं। डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर्स की पहुंच और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स के प्रति पांच स्टूडेंट्स में से एक स्टूडेंट डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स से जुडे होते हैं। डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल के मुताबिक, आगामी पांच सालों में देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले के प्रतिशत को 10 से 15 प्रतिशतकरने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में डिस्टेंस लर्निग मोड का योगदान उल्लेखनीय होगा। 
लोकप्रिय क्यों ?

यदि यह कहें कि शिक्षा सबके लिए …

प्रोबेशनरी क्लेरिकल परीक्षा

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बैंकिंग सेक्टर हमेशा से लोगों का पसंदीदा करियर डेस्टिनेशन रहा है। कम्प्यूटर आने के बाद बैंकिंग सेक्टर में काम करने का अंदाज भी काफी बदला है। यही कारण है कि युवा इस सेक्टर की ओर काफी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं। यदि आप भी बैंक में नौकरी करना चाहते हैं, तो यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में प्रोबेशनरी क्लर्क पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। कुल पदों की संख्या 700 है। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 सितंबर तथा परीक्षा की तिथि 28 नवंबर, 2010 है।
शैक्षिक योग्यता
यूनाइटेड बैंक में प्रोबेशनरी क्लर्क पदों के लिए अभ्यर्थियों को किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड या संस्थान से बारहवीं में कम से कम 60 प्रतिशत अंक या किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री अनिवार्य है। इसके साथ ही मान्यताप्राप्त संस्थान से कम से कम तीन महीने का कम्प्यूटर कोर्स अवश्य किया हुआ हो।
उम्र सीमा
सामान्य अभ्यर्थियों के लिए उम्र 18 से 28 वर्ष निर्धारित है, तो वहीं एससी, एसटी, ओबीसी तथा विकलांग उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र सीमा में छूट का प्रावधान है।
परीक्षा का स्वरूप
लिखित परीक्षा का पहला भाग वस्तुनिष्ठ प्रश्…

पॉवर ड्रेसिंग

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पावर ड्रेसिंग का मतलब ऐसा ड्रेस अप है, जिससे आपकी छवि उस सफल कामकाजी व्यक्ति की बन सके जो आप हैं या आप वास्तव में होना चाहते हैं। आपमें जो सामर्थ्य है, जो शक्ति है, वह सली के से पहनी गई पोशाक में कहीं बेहतर ढंग से नजर आती है। उदाहरण के लिए, यदि आप मीटिंग के दौरान शालीन सूट में हैं तो आप तन कर खड़े होंगे, सामने वाले की आंखों से आंखें मिला कर बातें कर सकेंगे और हाथ मिलाने का आपका अंदाज भी दमदार होगा। चाहे नए जॉब की बात हो या पदोन्नति का मामला हो, उन लोगों के पहनावे का आकलन सूक्ष्मता से करें जो उस जॉब या उस पद पर पहले से हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड या कारोबारी जगत में आपके ड्रेस सेंस से बॉस को यह स्पष्ट होता है कि आप किसी जिम्मेदारी को संभालने के प्रति कितने तत्पर हैं। पहनावे से संबंधित निम्न बातों पर ध्यान देकर आप एक पावरफुल प्रोफेशनल के रूप में अपनी छवि बना सकते हैं।

-आप जो हैं, उसके अनुरूप पोशाकें न धारण करें, बल्कि आप जिस स्थिति में खुद को देखना चाहते हैं, उसके अनुसार खुद को तैयार करें। उन लोगों के ड्रेस सेंस को देखें जो अपने कैरियर के टॉप पर हैं और उनसे आइडिया लें। इसका तात्प…