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Thursday, August 26, 2010

दिमाग के दोनों हिस्से को कौन जोड़ता है

लंदन। वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझा लिया है कि क्यों मानव मस्तिष्क का बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को और दायां हिस्सा बाएं हिस्से को कंट्रोल करता है? वैज्ञानिकों को इस रहस्य के बारे में उस समय पता चला जब वे ‘मिरर मूवमैंट’ डिसऑर्डर पर अध्ययन कर रहे थे।

मिरर मूवमैंट डिसऑर्डर ने शोधकर्ताओं को उस समय आश्चर्यचकित कर दिया जब उन्होंने देखा कि दिमाग का एक हिस्सा शरीर के एक ही हिस्से से संपर्क साध रहा है। कैनेडा के मॉन्ट्रियाल वश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजिस्ट गाई रॉल्यू ने कहा, ‘हमें ऐसा लगता है कि दिमाग हमारे शरीर के दोनों हिस्सों को जोड़ता है लेकिन ऐसा नहीं है।

यह अपने विपरीत तरफ के हिस्से को ही कंट्रोल कर पाता है।’ एम एम (मिरर मूवमैंट) डिसऑर्डर के आनुवांशिक आधार को समझने के लिए रॉल्यू और उनके सहयोगियों ने एक कनाडाई परिवार की कई पीढ़ियों के उन सदस्यों के जीनों का अध्ययन किया जिनके मिरर मूवमैंट समान थे। शोध में यह बात सामने आई कि जिन्हें एम एम डिसऑर्डर थे उनके जीन कुछ अलग थे, जिसे डीसीसी कहते हैं।

शोधकर्ताओं ने जब इस डीसीसी जीन को एक ईरानी परिवार के सदस्यों से मिलाया तो उनके डीसीसी जीन कैनेडाई परिवार से अलग निकले, लेकिन वे भी एम एम डिसऑर्डर से पीड़ित थे। शोधकर्ताआंे ने डीसीसी जीन को उन लोगों के भी जीन से मिला कर देखा, जिन्हें मिरर मूवमैंट डिऑर्डर नहीं था, लेकिन नतीजा अलग निकला।

अंत में शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि शरीर के मध्य हिस्से में कोएक्स तंत्रिका कोशिकाओं के विकास के लिए डीसीसी प्रोटीन की आवश्यकता होती है, इसलिए बायां दिमाग शरीर के दाएं हिस्से को और दायां बाएं हिस्से को कंट्रोल करता है। इसके अलावा जिन लोगों में डीसीसी काम करता है उनमें कुछ तंत्रिका कोशिकाएं दिमाग द्वारा भेजे गए मैसेज को पूरे शरीर में भेजता है।
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सॉफ्टवेयर बताए चेहरे का राज

लंदन. इंटरनेट पर और सोशल नेटवर्किग साइट्स में दर्ज लाखों फोटो में से आप अपनों को तलाश कर सकेंगे। सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी फेसडॉटकॉम ने इसके लिए एक खास तरह का सॉफ्टवेयर विकसित किया है।

यह नेट पर पोस्ट की गई तस्वीर को एल्गोरिथ्म में बदल देता है। यदि आप अपने किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित की तलाश कर रहे हों तो आपको उसका फोटो फेसबुक या गूगल पर डालना होगा। एप्लीकेशन का 5000 से अधिक वेबडेवलपर्स इस्तेमाल कर रहे हैं।

वेबसाइट का दावा है कि 90 फीसदी सटीक जानकारी देने वाला यह सॉफ्टवेयर यह बता सकता है कि आपने जिसकी फोटो पोस्ट की है, वह कहां पर है।
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क्या एप्पल से बेहतर आईपैड बना रहा है गूगल

यदि आपका मानना है कि टैबलेट्स आईपैड की जंग में एप्पल का आईपैड सबसे आगे है तो आप एक बार फिर से इस पर विचार कीजिए, क्योंकि गूगल इससे भी बेहतर टैबलेट बना रहा है। यही नहीं, इसने हाल में टोरंटो स्थित स्टार्टअप बंपटॉप को भी खरीदा है, जो थ्री डी मल्टीटच टेकAोलॉजी का महारथी है।इस नई तकनीक के जरिये गूगल आईपैड के यूजर्स को प्रोग्राम्स और फाइल्स चुनने की भी सुविधा होगी।

इस नए अवतार से मल्टीटच के यूजर्स परंपरागत टू डी से थ्री डी की ओर रुख करने लगेंगे। पिछले महीने गूगल के टैबलेट से जुडी खबरें इंटरनेट पर आयी थीं। न्यूयार्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल टैबलेट पर किताबें, पत्रिकाएं और दूसरे कंटेंट मुहैया कराने को लेकर कुछ प्रकाशकों के संपर्क में हैं।

एक अन्य मीडिया ग्रुप ने गूगल की नई खरीदारी से जुडी रिपोर्ट में कहा कि इस पर गूगल को 40 मिलियन डॉलर खर्च करने होंगे और इस तकनीक को हासिल करने के बाद यह कंपनी उन्नत किस्म का टैबलेट बनाने में कामयाब हो सकेगी।एप्पल का आईपैड बाजार में आने के बाद कई कंपनियां इससे बेहतर टैबलेट बनाने में जुट गयीं।

जनवरी में एचपी ने अपना टैबलेट लांच किया, जो जल्द ही ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगी। फरवरी में अमेजन ने एक टच स्क्रीन कंपनी खरीदी तो अफवाहें उड़ीं कि यह कंपनी एप्पल को टक्कर देने के लिए आईपॉड तैयार कर रही है। नियोफोनी ने भी वीपैड नाम से एक टैबलेट कम्प्यूटर तैयार किया था जो यूरोप में प्रकाशकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। माइक्रोसॉफ्ट भी एक टैबलेट डिवाइस पर काम कर रहा था लेकिन इसने हाल में इस प्रोजेक्ट को रद करने की घोषणा की है।
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अब कंप्यूटर पढ़ लेगा आपका मन

लंदन. कल्पना कीजिए कि आपके कम्प्यूटर मानिटर पर वह वेबसाइट अपने आप खुल जाए जिसे आप खोलना चाहते हैं । जल्द ही आपकी कल्पनाओं को हकीकत के पर लगने वाले हैं,क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे कम्प्यूटर का विकास करने का दावा किया है जो मानव मस्तिष्क को पढ़ सकेगा।

इंटेल कारपोरेशन में कार्यरत एक समूह एक ऐसी नयी प्रौद्योगिकी पर काम कर रहा है जो आपकी दिमागी सोच को पढ़ सकेगा । यह दिमाग से नियंत्रित होने वाले उस मौजूदा कम्प्यूटर से विपरीत होगा जिसमें स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक हरकत की दरकार होती है ।

द टेलीग्राफ के अनुसार वास्तव में वैज्ञानिक,दिमाग में होने वाली हलचल से संबंधित गतिविधियों के नक्शे को लेकर शब्दों के ऐसे ताने बाने बुनने की कवायद में जुटे हैं जो आपकी उस दिमागी हलचल से मेल खाए जिसका प्रयोग कम्प्यूटर पर होता है ।

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कम्प्यूटर समान मस्तिष्क पैटर्न से संबंधित शब्दों के अनुसार काम कर सकेंगे ।

इंटेल की प्रयोगशालाओं से जुड़े एक वरिष्ट शोधकर्ता डीन पोमेरलियाउ ने बताया कि मौजूदा समय में अस्पतालों में प्रयोग होने वाले मैगेनेटिक रेजोनेंस स्कैनर जेसे उपकरण की जरूरत है दिमागी गतिविधियों से जुड़े पर्याप्त विवरण को ग्रहण कर सके ।
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Wednesday, August 25, 2010

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना


आज हर घर में अपनी जगह बना चुका कंप्यूटर शायद इतना उपयोगी और लोकप्रिय नहीं हो पाता यदि कंप्यूटर ग्राफिक्स की दुनिया में इतने सारे नए प्रयोग देखने को नहीं मिले होते। यह टॉपिक कंप्यूटर कोर्सेज का भी एक अहम हिस्सा होता है और करियर के लिहाज़ से भी यह हॉट च्वॉइस रहता है।

एक से बढ़ कर एक कंप्यूटर गेम्स के रोमांच का मज़ा लेने से लेकर कंप्यूटर पर एनिमेटेड मूवीज़ का लुत्फ उठाना इतना मज़ेदार और आसान नहीं होता यदि ग्राफिक्स में दिन प्रतिदिन नई हलचलें नहीं मचती। आजकल सभी सॉफ्टवेयर जीयूआई आधारित होते हैं जिस कारण इन्हें उपयोग करना काफी आसान हो जाता है। इंटरफेस के रूप में यहां मेन्यू, आइकॉन आदि का उपयोग किया जाता है, जो काफी सुविधाजनक और फास्ट होता है। वास्तव में यह सब ग्राफिक्स का ही तो खेल होता है।

कंप्यूटर के द्वारा बनाए जाने वाले ग्राफिक्स कंप्यूटर ग्राफिक्स कहलाते हैं। इसे इस प्रकार से भी कहा जा सकता है कि कंप्यूटर द्वारा इमेज डाटा को जब रिप्रजेंट और मैनिपुलेट किया जाए तो उसे ग्राफिक्स कहते हैं। एनिमेशन, मूवीज़, गेम्स इंडस्ट्रीज़ आदि में इसका खूब प्रभाव पड़ा है। कंप्यूटर द्वारा जब डाटा का पिक्टोरियल रिप्रेजंटेशन और मैनिपुलेशन किया जाता है तो उसे हम ग्राफिक्स कह सकते हैं। कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर साइंस का एक फील्ड है, जिसके अंतर्गत हम विजुअल कंटेंट को मेनिपुलेट और डिजिटली सिनथेसाइजिंग करने के विधि के बारे में पढ़ते हैं।

एनिमेशन भी कंप्यूटर ग्राफिक्स के अंतर्गत ही आता है। एनिमेशन वास्तव में कंप्यूटर की सहायता से मूविंग इमेज (चलती-फिरती पिक्चर) बनाने की कला है। आपको राज़ की बात बताते हैं कि जब भी आप ऐसे एनिमेटिड इमेज देखें तो यह मत सोचिए कि वास्तव में यह चलती फिरती इमेज है। दरअसल होता यह है कि जब स्क्रीन पर कोई इमेज दिखती है तो बहुत जल्द उसी तरह की दूसरी इमेज पहले वाले इमेज को रिप्लेस करती रहती है। यह प्रक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि हम समझ बैठते हैं कि इमेज मूवमेंट कर रही है, जबकि वास्तव में एक इमेज दूसरे इमेज को इसके थोड़े आगे-आगे रिप्लेस करती रहती है।

एप्लीकेशन एरिया
एजुकेशन, साइमुलेशन, ग्राफ रिप्रेजंटेशन, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, इंडस्ट्री, आर्ट, एंटरटेनमेंट आदि सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर ग्राफिक्स का बोलबाला है। कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन द्वारा इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर में ग्राफिक्स का खुब इस्तेमाल किया जाता है। फाइन आर्ट, कमर्शियल आर्ट एप्लीकेशंस में भी इसका उपयोग किया जाता है। टेलीविज़न शोज़, म्यूज़िक वीडियो, मोशन पिक्चर्स आदि में भी ग्राफिक्स का ही कमला रहता है।
ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर :
 ग्राफिक्स के लिए उपलब्ध सॉफ्टवेयर को आमतौर पर दो भागों में रखा जाता है-जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज और स्पेशल परपज एप्लीकेशंस पैकेज। जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज सॉफ्टवेयर में कई ग्राफिक्स फंक्शंस होते हैं, जो हाई-लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजों में उपयोग किए जाते हैं। इन फंक्शंस द्वारा पिक्चर कंपोनेंट्स डिज़ाइन किए जाते हैं। स्पेशल एप्लीकेशंस पैकेज आमतौर पर उनके लिए हैं, जो कंप्यूटर एक्सपर्ट तो नहीं होते, फिर भी डिस्प्ले जेनरेट कर सकते हैं। 3D Max. Aladdom 4 D,Cinema 4D, Maya, Modo आदि ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर्स हैं।
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एमएस ऑफिस 2010, ग्रुप में काम करने की सुविधा

हमारे कंप्यूटर में जितने भी सॉफ्टवेयर्स और एप्लीकेशंस होते हैं, उनमें एमएस ऑफिस का अहम स्थान होता है। यह एक ऐसा पैकेज है, जिसकी सहायता से रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले लगभग अधिकतर काम जैसे डॉक्युमेंट्स बनाना, प्रेजेंटेशन तैयार करना, हिसाब-किताब लिखने से लेकर डाटाबेस मेंटेन करने तक सभी काम किए जा सकते हैं। यदि हम कहें कि एक आम कंप्यूटर यूजर अपने कंप्यूटर पर सबसे अधिक एमएस ऑफिस का ही उपयोग करता है तो शायद यह कहना गलत नहीं होगा। तभी तो यह पैकेज अधिकांश कंप्यूटर का सिरमौर बना बैठा है। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा डेवलप एमएस ऑफिस के कई वजर्न आ चुके हैं जैसे ऑफिस 2005, ऑफिस 2007 आदि।
हर एक नया वजर्न नई रंगत में हमारे सामने नए फीचर्स का पिटारा लेकर आता है, जो हमारे काम को और भी आसान बना देता है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एमएस ऑफिस का नया वजर्न 2010 हमारे बीच उपलब्ध है। चलिए, आज आप से इसी ऑफिस पैकेज की जानकारी सांझा करते हैं और देखते हैं कि क्या-क्या खास है इसमें हमारे लिए।
एमएस ऑफिस 2010 माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विंडोज के लिए लेटेस्ट प्रोडक्टिविटी सूट है, जिसमें कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं। इसका यूजर इंटरफेस यूजर्स की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए काफी आकर्षक बनाया गया है। ऑफिस 2007 का रिबन इंटरफेस वर्ड, एक्सेल और पावर-प्वॉइंट में विजिबल होता था। ऑफिस 2010 में इसका दायरा बढ़ा कर इसे आउटलुक, विजिओ, वन नोट में भी शामिल किया गया है।
रिसर्च, डेवलपमेंट, सेल्स, ह्यूमन रिसोर्सेज जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रोफेशनलों के लिए इसे काफी उपयोगी बनाया गया है। ऑफिस 2010 प्रोफेशनल एडिशन के अंतर्गत एमएस वर्ड 2010, एक्सेल 2010, पावर प्वॉइंट 2010, एसेस 2010, आउटलुक 2010, पब्लिशर 2010 आदि को शामिल किया गया है।
रिबन इंटरफेस, बैकसाउंड रिमूवल टूल, लेटर स्टाइलिंग, स्मार्ट आर्ट टेम्पलेट, स्क्रीन कैप्चरिंग और क्लिपिंग टूल्स आदि कई नए फीचर्स आपको यहां मिलेंगे। ऑफिस 2010 में एक फीचर जोड़ा गया है, जिसे सोशल कनेक्टर नाम दिया गया है। इसकी सहायता से ई-मेल से संबंधित काम को आसान और ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इतना ही नहीं, इस फीचर की सहायता से फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भेजना और एप्वॉइंटमेंट्स को मैनेज करना और भी आसान हो गया है।
ऑफिस 2010 में आप अपने टेक्स्ट, फोटो, वीडियो को काफी आकर्षक बना सकते हैं। इसमें कई नये पिक्चर-ए़डिटिंग इफेक्ट्स जैसे वॉटरकलर, सैचुरेशन, ट्रिमिंग आदि का उपयोग कर अपने डिजाइन को एक नया प्रोफेशनल लुक दे सकते हैं।
यदि एक्सेल 2010 की बात करें तो इसमें डाटा एनालिसिस और विजुलाइजेशन फीचर है, जो आपको डाटा ट्रेंड्स को ट्रैकिंग करने में काफी सहायता करेगा। वहीं पावर-प्वॉइंट 2010 में आप अपने प्रेजेंटेशन स्लाइड्स में वीडियो को भी शामिल कर अपनी प्रेजेंटेशन को और भी प्रभावी बना सकते हैं।
ऑफिस 2010 आपको कई विभिन्न लोकेशंस और डिवाइसेज से अपने सिस्टम से जुड़ने की स्वतंत्रता देता है। कभी-कभी ऐसा होता है कि एक ही फाइल पर कई लोगों को काम करना पड़ता है। भले ही आप में से कई लोग, जो एक ही फाइल पर काम करना चाहते हैं, विभिन्न जगहों पर रहते हैं तो इस पैकेज में आप ऐसा कर सकते हैं। किसी काम को ग्रुप में करने पर यह सुविधा काफी उपयोगी है।
ई-मेल और इन बॉक्स से संबंधित काम को भी आउटलुक 2010 में काफी आसान बनाया गया है। यहां एक साथ आप कई कमांड को एग्जिक्यूट कर अपना समय बचा सकते हैं। साथ ही इनबॉक्स को भी काफी आसानी से बेहतर ढंग से ऑर्गेनाइज कर सकते हैं।
सिस्टम रिक्वॉयरमेंट
यदि आप अपने कंप्यूटर में भी ऑफिस 2010 इंस्टॉल करना चाहते हैं तो इसके लिए आप यह सुनिश्चित कर लें कि आपका सिस्टम इसके लिए तैयार है भी या नहीं। यहां कुछ रिक्वॉयरमेंट दिए जा रहे हैं, जो आपके कंप्यूटर के लिए जरूरी हैं-
प्रोसेसर :  500 MHZ
मेमरी (रैम) : 256 MB
हार्ड डिस्क : 3 GB
डिस्प्ले : 1024X576
सबसे अच्छी बात यह है कि यदि आपके सिस्टम में पहले से ऑफिस 2007 इंस्टॉल है और आप इसे ऑफिस 2010 से अपग्रेड करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने सिस्टम के हार्डवेयर में कोई परिवर्तन नहीं करना होगा। अगर आप एमएस ऑफिस 2010 से संबंधित अन्य तमाम जानकारियों से अवगत होना चाहते हैं तो आप माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट www.microsoft.com पर लॉगिन कर सकते हैं।
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बिंग: सर्च इंजन, आज का इंफॉर्मेशन बैंक

इंटरनेट आज की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। तमाम सूचनाओं का भंडार यहां उपलब्ध है, लेकिन ये सूचनाएं हम तक पहुंचती हैं सर्च इंजन के माध्यम से। वैसे तो इंटरनेट पर अनेक सर्च इंजन मौजूद हैं। गूगल इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, पर पिछले दिनों माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपना सर्च इंजन ‘बिंग’ लॉन्च किया है। यहां इसी की विशेषताओं को कंप्यूटर यूजर्स के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस हाइटेक युग में यदि हमें किसी भी विषय से संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो हमारे सामने इंटरनेट की तस्वीर उभरती है और इस काम के लिए इंटरनेट पर हमारा पड़ाव होता है सर्च इंजन। इंटरनेट यानी आधुनिक इंफॉर्मेशन बैंक, जो सूचनाओं का खजाना है, जहां सर्च इंजन की मदद से हम जरूरत की जानकारियां ढूंढ़ निकालते हैं। इंटरनेट पर अनेक सर्च इंजन मौजूद हैं, जिनमें गूगल प्रमुख है और इसकी बादशाहत आज भी कायम है।
लगभग एक साल पहले जानी-मानी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपना नया सर्च इंजन लॉन्च किया था, जिसे ‘बिंग’ नाम दिया गया। अब यह तो समय ही बताएगा कि गूगल की बादशाहत को बिंग किस हद तक प्रभावित करेगा, लेकिन इतना तो जरूर है कि कंप्यूटर्स यूजर को बिंग के रूप में एक नए सर्च इंजन को यूज करने का मौका मिल गया है।
बिंग में ऐसे कई फीचर्स हैं, जो इसे लोकप्रिय बनाने में मदद कर रहे हैं। जब आप अपने ब्राउजर में www.bing.com टाइप करेंगे तो एक आकर्षक वेबपेज खुल कर सामने आता है। आप जिस किसी लैंग्वेज में सर्च करना चाहते हैं, उसे सेलेक्ट कर सकते हैं। यहां हिंदी समेत तमाम अन्य भाषाओं की सूची उपलब्ध है।
इस सर्च इंजन पर यदि आप इमेज सर्च करना चाहें तो इमेज ऑप्शन को क्लिक करें, फिर सर्च बॉक्स में जिस टॉपिक से संबंधित इमेज सर्च करना चाह रहे हैं, उसे टाइप करें। यहां इमेज सर्च की एक प्रमुख खासियत यह है कि जब आप कोई इमेज सर्च करेंगे तो जितने भी रिजल्ट आएंगे, उन्हें देखने के लिए आपको बस स्क्रॉल [scroll] करने की जरूरत है और सारा रिजल्ट स्क्रीन पर नजर आता रहेगा। कहने का मतलब है कि यहां आपको बार-बार Next बटन पर क्लिक करने की कोई जरूरत नहीं रह जाती। इसी तरह वीडियो लिंक को क्लिक कर वीडियो सर्च की जा सकती है। यहां आप वीडियो की लैंथ, स्क्रीन टाइप, रिजोल्यूशन आदि भी सेट कर सकते हैं। यही नहीं, मजेदार बात तो यह है कि आप किसी ऑरिजनल वीडियो का शॉर्ट प्रीव्यू भी तुरंत देख सकते हैं, जो आपको उस वीडियो के बारे में निर्णय लेने में सहायता करेगा।
यदि आप किसी भी टॉपिक से संबंधित लेटेस्ट न्यूज पढ़ना चाहते हैं तो बस न्यूज लिंक को क्लिक करने भर की देर है।
आप कैलकुलेशन करना चाहते हैं? जी हां, बिंग आपको कैलकुलेशन की सुविधा भी देता है। जैसे आप यदि सर्च बॉक्स में 2x15xpi टाइप करेंगे तो यह सर्च इंजन इस एक्सप्रेशन का रिजल्ट तुरंत आपके स्क्रीन पर दिखा देगा। है न वाकई मजेदार फीचर। आप यहां कैलकुलेशन के लिए मैथ्स ऑपरेटर और फंक्शन का भी प्रयोग कर सकते हैं।
स्पोर्ट्स में रुचि रखने वालों के लिए भी यहां विशेष सुविधा है। यहां आप सीधे किसी दिन या लीग का स्कोर देख सकते हैं।
यदि आप सर्च बॉक्स में किसी मूवी का टाइटल एंटर करेंगे तो बिंग उन सभी थियेटर्स की लिस्ट प्रोवाइड कर देगा, जहां वह मूवी लगी होगी और वे आपके एरिया में हों। इसके लिए आप अपने शहर का नाम भी एंटर कर सकते हैं। बिंग ट्रांसलेटर की मदद से आप किसी टेक्स्ट या पूरे वेबपेज को विभिन्न भाषाओं में ट्रांसलेट कर सकते हैं।
यदि आप किसी क्षेत्र विशेष की होटल्स की जानकारी चाहते हैं तो यहां सर्च बॉक्स में होटल टाइप करें। साथ में उस जगह या शहर का नाम दें, आपको होटल्स की लिस्ट मैप्स के साथ देखने को मिल जाएगी। इसके अलावा भी इस सर्च इंजन में आप कई अन्य खासियत पाएंगे।
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डुएल कोर्स डबल सावधानी

इन दिनों डुएल कोर्स की महत्ता बढ रही है। यही कारण है कि इससे संबंधित कोर्स युवाओं में काफी हॉट हो रहे हैं। यदि आपकी इच्छा भी डुएल कोर्स में एडमिशन लेने की है, तो आपके लिए बहुत सारे कोर्स हैं, जिन्हें आप अपनी रुचि के अनुरूप चुन सकते हैं, लेकिन कोर्स का चयन करने से पहले इससे संबंधित सारी जानकारी एकत्रित कर लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
डुएल कोर्स

इसके तहत एक ही समयावधि में छात्र एक ही विश्वविद्यालय से दो कोर्स की डिग्री महज एक वर्ष या अधिक समय में प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के कोर्स में अमूमन एक परंपरागत कोर्स पर आधारित और दूसरा प्रोफेशनल या वोकेशनल डिग्री से जुडा कोर्स होता है। कुछ चुनिंदा और पॉपुलर कोर्स बीई प्लस एमबीए, बीटेक प्लस एमटेक, कम्प्यूटर साइंस प्लस एमटेक, बीबीए प्लस एलएलबी, बीकॉम प्लस एलएलबी, एमबीए प्लस सीएए आदि कोर्स हैं। यदि आप इस तरह के कोर्स करना चाहते हैं, तो इससे संबंधित कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें।
रुचि का रखें ध्यान
किसी भी कोर्स को पूरा करने से पहले अपनी क्षमता का मूल्यांकन खुद ही करें। ऐसा देखा गया है कि अभ्यर्थी कोर्स का चयन बिना अपनी क्षमता को पहचाने ही कर लेते हैं और बाद में उसे पूरा न कर पाने की वजह से आर्थिक और मानसिक हानि उठाते हैं। एक्सप‌र्ट्स के अनुसार, किसी भी कोर्स का चयन आप अपनी मानसिक और आर्थिक क्षमता के मुताबिक ही करें। इसके साथ ही यह कोशिश भी करें कि कोर्स आपकी रुचि और एकेडमिक कोर्सेज से मेल खाता हो।
न आएं झांसे में
इस तरह के कोर्स बहुत सारे फर्जी संस्थान भी चलाते हैं, इसलिए आप इनके झांसे में कभी भी न आएं। आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप सबसे पहले संस्थान की असलियत का पता कर लें कि यह मान्यताप्राप्त है या नहीं! यदि किसी विश्वविद्यालय या संस्थान से एफिलिएटेड हो, तो उस संस्थान की वेबसाइट से इसकी जांच कर सकते हैं। यदि उस संस्थान से सीनियर स्टूडेंट आपके आस-पास मिल जाए, तो वह आपको इसकी असलियत के बारे में बेहतर ढंग से बता सकता है।
इन डिमांड हो कोर्स
डुएल कोर्स का चयन करने से पहले यह सोचें कि जो कोर्स आपने चुना है, वह आपको आगे बढाने में कितना सहायक होगा! उसकी बाजार में क्या डिमांड है और भविष्य में आगे बढने का कितना स्कोप है! यदि इस तरह की सोच के साथ आप कोर्स का चयन करते हैं, तो आपको इसका दोहरा लाभ भी मिलेगा।
कोर्स कॉम्बिनेशन है अहम
इस कोर्स के चयन में कॉम्बिनेशन का अहम रोल होता है। इसके लिए सबसे बेहतर विकल्प यही है कि आप अपनी रुचि, क्षमता और बजट के अनुरूप कुछ विषयों में पढाई करने का निर्णय लें और उस विषय के साथ किस तरह के वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्स हो सकते हैं, उसकी एक लिस्ट भी बनाएं। उस लिस्ट में से जो कोर्स आपकी जरूरतों पर सटीक बैठता है, उसका चयन करें। दरअसल, ऐसा करने का फायदा यह होगा कि आप बेहतर कोर्स का चयन आसानी से कर सकेंगे।
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Tuesday, August 24, 2010

भारतीय महिला का कमाल, अनपढ़ भी चला सकेंगे कंप्यूटर

माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया की एक असोसिएट रिसर्चर ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 41 साल की इंद्राणी मेधी ने टेक्स्ट यूजर इंटरफेस डिवेलप किया है, जिससे अब अनपढ़ भी कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकेंगे। कंप्यूटर का इस्तेमाल करने के लिए दूसरों के सहयोग की बहुत कम या बिल्कुल ही नहीं जरूरत पड़ेगी।
                 इंद्राणी ने बताया कि फिलीपीन और साउथ अफ्रीका के कम इनकम और कम साक्षरता वाले समुदाय के 400 से ज्यादा विषयों से जुड़ी डिजाइन प्रक्रिया के जरिए मैंने पाया कि मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर पारंपरिक टेक्स्ट आधारित यूजर इंटरफेस (यूआई) के साथ काम करने में लोगों को काफी मुश्कल होती है। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आम अक्षमता के अलावा नेविगेशन की दिक्कत भी एक बड़ी चुनौती है।
                    इंद्राणी ने निम्न साक्षरता वाले यूजर्स के लिए टेक्स्ट रहित यूआई डिजाइन डिवेलप किया है। इसमें आवाज, विडियो और ग्राफिक्स का उपयोग होता है।
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इंटरनेट की चौपाल में करियर की खोज

ऑर्कुट और फेसबुक ने इंटरनेट पर दोस्तों की महफिल जुटाने का जो ट्रेंड शुरू किया था, वह अब और स्मार्ट हो गया है। सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में खुला है एक नया दरवाजा, जो यूजर्स को उनकी अपनी प्रफेशनल फील्ड के लोगों से जुड़ने का मौका दिलाता है। वेब वर्ल्ड में अब ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स आ रही हैं, जो पूरी तरह प्रफेशनल्स के लिए हैं, जहां लोग नौकरी में आगे बढ़ने और नए मौके खोजने के लिए एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। यहां आप आपस में अपने फैमिली फोटो एलबम नहीं बल्कि सीवी शेयर करते हैं। यहां टेस्टिमोनियल इस बारे में नहीं लिखे जाते कि आप कितने अच्छे इंसान हैं, बल्कि इस बारे में कि आप कितने बेहतरीन एंप्लॉयी हैं।

सबसे पहले आपको एक ऐसे नेटवर्क से रूबरू कराते हैं, जो सिर्फ नेटवर्किंग की दुनिया के लोगों के लिए बना है। नेटवर्किंग में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सिस्को ने मंगलवार को इसे ग्लोबली लॉन्च किया। इसका मकसद कंप्यूटरों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले प्रफेशनल्स को एक ऐसी चौपाल मुहैया कराना है, जहां वे अपने फील्ड से जुड़ी समस्याएं, उपलब्धियां और रोज के अनुभव शेयर कर सकें। यहां (cisco.com/go/learnnetspace) उन्हें ऐसा फोरम भी मिलता है, जिस पर वे प्रोग्रामिंग से जुड़े किसी भी पॉइंट पर दुनिया के दूसरे कोने पर बैठे एक्सपर्ट से सलाह ले सकते हैं, जिसे वे शायद जानते भी नहीं हों। सिस्को डाइरेक्टर (ग्लोबल मार्केटिंग डिवेलपमेंट) मिलिंद गुर्जर ने बताया कि इसमें एक्सपर्ट की सलाह और विडियो ऑन डिमांड जैसे फीचर भी दिए जाएंगे। हालांकि सिस्को इसे प्रफेशनल्स की ही कम्युनिटी साइट मान रही है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नेटवर्किंग की कंपनियां अच्छे प्रफेशनल्स की तलाश में इसे खंगालती नजर आएं। दुनिया भर में 2012 तक नेटवर्किंग के 12 लाख लोगों की कमी पड़ना तो पहले से तय है।

इसी तरह sermo.com ऐसी कम्युनिटी साइट है, जो सिर्फ डॉक्टरों के लिए है, करीब 65,000 फिजिशियन इसके मेंबर हैं। वायरलेस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का ऑन लाइन अड्डा inmobile.org पर जमता है। इन नेटवर्किंग साइट में प्रफेशनल अपने पेशे से जुड़ी रोजमर्रा की बातें आराम से शेयर कर सकते हैं। फेसबुक भी अब पूरी तरह प्रफेशनल कम्युनिटी साइट लाने जा रही है।

करियर फ्रेंडली नेटर्किंग साइट के तौर पर लिंक्डइन (linkedin) का भी जलवा तेजी से बढ़ रहा है। यह भी प्रफेशनल नेटवर्किंग की साइट है, जिससे दुनिया भर में 150 तरह की इंडस्ट्री के दो करोड़ से भी ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इस साइट की मार्केट वैल्यू एक अरब डॉलर आंकी गई है। लिंक्डइन की खूबी यह है कि इसमें आप अपना पूरी सीवी (बायोडेटा) पोस्ट सकते हैं, जिसमें मौजूदा नौकरी के अलावा पहले के वर्क एक्सपीरिएंस का भी डिटेल में ब्यौरा दिया जा सकता है। लिंक्डइन के सीईओ डैन नाय बताते हैं कि बढ़ती पॉपुलैरिटी के बावजूद वे इसमें ऑर्कुट की तरह फोटो एलबम या विडियो जैसे फीचर नहीं देंगे। इसमें लोग एक-दूसरे के करीब, एक ही शहर या स्कूल से होने के कारण नहीं, बल्कि कंपन और इंडस्ट्री में साझा इंटरेस्ट के बूते आते हैं। अपने फील्ड के लोगों तक पहुंचने का यह एकदम अनऑफिशियल तरीका है जो कई बार क्लिक कर जाता है।
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इंटरनेट की तस्वीर से किसी शख्स को पहचान लेगा सॉफ्टवेयर

लंदन।। जल्द ही एक ऐसा सॉफ्टवेयर आने वाला है, जो इंटरनेट पर लोगों की तस्वीर से उन्हें पहचान सकेगा। इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि


वह एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे इंटरनेट की हर तस्वीर को एक नाम मिल सकेगा।
face.com नाम की इस वेबसाइट का कहना है कि इस सॉफ्टवेयर से लोगों को सोशल नेटवर्किंग साइट और ऑनलाइन गैलरियों में व्यक्तियों की तस्वीरें पहचानने में मदद मिलेगी।
'द डेली मेल' की खबर में बताया गया कि इसके डिवेलपर्स का कहना है कि सॉफ्टवेयर हर चेहरे की अल्गोरिदम तैयार करेगा, जिसमें आंखों, नाक और मुंह की माप ली जाएगी।
कंपनी का दावा है कि सोशल नेटवर्किंग साइट से तस्वीरों को स्कैन करते वक्त यह सॉफ्टवेयर 90 फीसदी तक सही रहता है।
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एथिकल हैकिंग का बादशाह

9/11 की घटना के बाद अलकायदा की ओर से भेजे गए एक गुप्त कोड को तोडकर उसे समझने वाला केवल एक शख्स था। एथिकल हैकर अंकित फडिया
 केवल सोलह साल की उम्र में अंकित फडिया ने कोडेड संदेश को तोडकर दिखा दिया कि हिंदुस्तानी भी कहीं कम नहीं है। उसके बाद से हर बडी आतंकी घटनाएं होने पर साइबर स्थिति को समझने के लिए अंकित को याद किया जाता है। अंकित ने आतंकवाद और साइबर अपराध से जुडी कई समस्याओं को सुलझाया है।

 साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट अंकित खुद को एक एथिकल हैकर कहलाना पसंद करते हैं। अंकित इन दिनों कंप्यूटर सिक्योरिटी से जुडी एक कंपनी के निजी सलाहकार हैं। अंकित ने व्यापक रूप में साइबर अपराध और आतंकवादी गतिविधियों की पोल खोलने के जो कार्य किए हैं, वे खासे सराहनीय हंै। 24 वर्षीय अंकित की स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुई। बाद में इन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया।

 माता पिता से उपहार में प्राप्त कंप्यूटर पर अंकित ने स्कूल के दौरान ही हैकिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए थे। जल्द ही वे इसके विशेषज्ञ बन गए। महज तेरह साल की उम्र में अंकित ने एक मैगजीन की वेबसाइट को हैक कर लिया। शायद उन्हें इस काम के लिए जेल जाना पडता, लेकिन मैगजीन के संपादक को उन्होंने ई मेल करके बताया की उनकी वेबसाइट कितनी असुरक्षित है और इसकी सुरक्षा के लिए कैसे कदम उठाने चाहिए। यह उनके जीवन की पहली हैकिंग थी।

 अंकित ने पिछले तीन वर्षो में लगभग बीस हजार लोगों को एथिकल हैकिंग की ट्रेनिंग दी है। यही नहीं इन्होंने 'हैकिंग ट्रूथ' के नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की है, जिसे एफबीआई ने दुनिया की दूसरी सबसे बेहतरीन वेबसाइट माना है। हैकिंग पर अंकित ने अब तक तेरह किताबें लिखी है। चौदह वर्ष की आयु में लिखी 'द अनऑफिशियल गाइड टू एथिकल हैकिंग' की दुनिया में तीन लाख प्रतियां बिकी।

 इस बेस्ट सेलर बुक का ग्यारह भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। वे 25 से ज्यादा देशों में लगभग1000 सेमीनार में हिस्सा ले चुके हैं। लगभग तीस से भी ज्यादा अवार्ड इनके खाते में है। इन सब के साथ फडिया एक स्कूल भी चलाते हंै जो हैकिंग रोकने की ट्रेनिंग भी देता है। कह सकते हैं कि जब दुनिया इलेक्ट्रोनिक संग्राम में प्रवेश कर चुकी है तब अंकित फडिया जैसे टेक्नोसेवी युवा देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
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जानिए बेहतर करियर विकल्प

12वीं पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विषय का चुनाव जीवन का सबसे महत्तवपूर्ण फैसला है। हमें अपने करियर की दिशा तय करते हुए अपने उज्जवल भविष्य का आधार रखना होता है। जहां हजारों राहें बाहें फैलाकर हमारा स्वागत कर रही हों वहां हमें सबसे सही राह चुननी होती है।


वैसे तो यह फैसला कठिन है लेकिन अगर आपके पास सही जानकारी है और आप अपने मन की सुनते हुए अपने लिए नई दिशा चुनते हैं तो यह फैसला काफी आसान हो जाता है।
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सपने के बीज को मिले सही जमीन

हर माली जानता है कि बीज बोने से पहले जमीन को जितनी अच्छी तरह से तैयार किया जाएगा, बीज उतने ही अच्छे उगेंगे। जिस तरह जमीन पौधे के लिए होती है, उसी तरह आपके मस्तिष्क में सपने का बीज प्रत्यारोपित होता है। सपने के बीज को स्वीकार करने के लिए आपका मस्तिष्क जितनी अच्छी तरह से तैयार होगा, आपके सपने की जड़ें उतनी ही अच्छी तरह जमेंगी। सपने के लिए तैयार मस्तिष्क उसे स्वीकार कर साकार रूप देने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है
    आपको अपने मस्तिष्क की शक्ति पर भरोसा होना चाहिए। आपका मस्तिष्क जहां आप अपने सपने को बोते और पालते हैं, अनूठा है। पूरी सृष्टि में ऐसा कोई नहीं है जो आपकी तरह दिखता, बोलता, चलता और सोचता हो। आप इस बात पर खुश हो सकते हैं।
                  अनूठे होने का अर्थ यह है कि जिस सपने को आप हकीकत में बदलना चाहते हैं, उसके लिए आपके पास मस्तिष्क के रूप में बेहतरीन स्वप्न-मशीन है। कुछ लोग कहते हैं कि काश! मैं अपने बॉस, फलां अमीर या सफल आदमी अथवा सत्ता में उच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति जैसा होता। जो लोग ऐसा सोचते या कहते हैं, वे खुद को दिए गए सबसे महान उपहार को नजरअंदाज करते हैं। यह महान उपहार है आपका अनूठापन।
            यह हो सकता है कि आप उच्च पद पर बैठे किसी शख्स के साथ अपना पद बदलना चाहें, लेकिन निश्चित रूप से अपनी जिंदगी की अदला-बदली नहीं करना चाहेंगे। अपने जीवन को पसंद करना एक अच्छी बात है। बस अपनी मस्तिष्क रूपी स्वप्न मशीन के जरिए सपने को साकार करते हुए जीवन को उन्नति की राह पर ले जाएं।
                     यदि आपके मस्तिष्क पर हताशा, हार और निराशा की गंदगी जमा है, तो उसे पॉजिटिव मेंटल एटीट्यूड यानी सकारात्मक मानसिक नजरिए के द्रव से साफ करें। जिस तरह भोजन करने से पहले हम अपने हाथ धोते हैं, उसी तरह किसी सपने पर काम करने से पहले मस्तिष्क प्रक्षालन की प्रक्रिया जरूरी है। अपने सपने की जड़ों को मजबूत करने के लिए आपको उन नकारात्मक यादों को धोकर साफ कर देना चाहिए, जो आपको पीछे धकेलती हैं।
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शानदार कैरियर जबरदस्त अवसर

अगर आपमें टैलेंट है तो आप किसी भी फील्ड में कैरियर बना सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे हॉट सेक्टर्स हैं, जिनमें कैरियर के विकल्प भी शानदार हैं और प्रोफेशनल्स की मांग भी खूब रहती है।
                 सपनों की उड़ान की कोई सीमा नहीं है। शत-प्रतिशत यही बात कैरियर के संबंध में भी लागू होती है। कैरियर निर्माण की दृष्टि से आज कई ऐसी फील्ड्स हैं, जिनमें जॉब को वाकई हॉट कहा जा सकता है। हॉट जॉब का तात्पर्य उन क्षेत्रों से है, जिनमें प्रोफेशनल्स की आज अधिक मांग है। इसलिए इनकी पढ़ाई बेहतर कैरियर निर्माण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। वैसे तो तमाम क्षेत्र हैं, जिनमें भविष्य संवारा जा सकता है, पर पब्लिक रिलेशन, इंश्योरेंस, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, फाइनैंशियल सर्विसेज, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल्स, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, रीयल एस्टेट, एनिमेशन, ईवेंट मैनेजमेंट, फार्मास्यूटिकल आदि कुछ ऐसी फील्ड्स हैं, जिनसे संबंधित पढ़ाई करना बेहतर जॉब की गारंटी है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जिनमें जॉब की बेहतर संभावना तलाशी जा सकती है। इसमें मीडिया, फिल्म मेकिंग, गेमिंग, एनजीओ, कंटेंट राइटिंग आदि मुख्य हैं।
एक वक्त था, जब कैरियर के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल और टीचिंग से बात आगे बढ़ती ही नहीं थी। पर बदलती जीवनशैली, जरूरतों में होनेवाले बदलाव और नित्य होते वैज्ञानिक अनुसंधानों की वजह से आज के जमाने में कैरियर संबंधी नए-नए विकल्प निरंतर सामने आ रहे हैं। ऐसे जॉब वक्त की मांग होते हैं। इसलिए हॉट होते हैं। हॉट जॉब के मामले में ध्यान रखने वाली बात यह है कि संस्थानों के चयन में किसी तरह की चूक नहीं हो। कैरियर के जितने विकल्प हैं, उनमें से लगभग सभी के लिए देश में अच्छे संस्थान मौजूद हैं। इनमें से कुछ सरकारी हैं तो कुछ निजी।
      बेहतर कैरियर के लिए जरूरत है तो अच्छे संस्थानों के चयन की। किसी भी संस्थान में अध्ययन के स्तर और प्लेसमेंट की व्यवस्था से उसके अच्छे या सामान्य होने का आकलन किया जा सकता है। अच्छे कोचिंग संस्थानों की भी कोई कमी नहीं है। जरूरत होने पर इनकी मदद भी ली जा सकती है। अच्छे संस्थानों से पढ़ाई करने से हॉट जॉब का बेहतर रिजल्ट मिलता है। यदि पढ़ाई को लेकर कोई आर्थिक समस्या है तो एजुकेशन लोन के सहारे आगे बढ़ा जा सकता है। जिन जॉब्स की मार्केट में ज्यादा मांग है, उनके लिए तो लोन और आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा मेधावी छात्रों के लिए तरह-तरह की स्कॉलरशिप भी है। जरूरत है तो इनके बारे में सही जानकारी लेने की।
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बैंक में क्लर्क बनने का अवसर

बैंकिंग क्षेत्र में भविष्य देख रहे युवाओं के लिए सुरक्षित जॉब पाने का अच्छा मौका है। कॉरपोरेशन बैंक में क्लर्क पद के लिए काफी बढ़ी संख्या में रिक्तियां निकली हैं। ऐसे युवा, जिनकी उम्र १८ से २८ वर्ष के बीच है और जिन्होंने गे्रजुएशन में ४० प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। कंप्यूटर का ज्ञान होना भी जरूरी है।

चयन प्रक्रिया

परीक्षा में पहला चरण लिखित परीक्षा का होगा। प्रश्न-पत्र चार विषयों में बंटा होगा। सभी विषयों से ऑब्जेक्टिव प्रश्न होंगे, जिन्हें हल करने के लिए १ घंटा, ३५ मिनट का समय दिया जाएगा। इंटरव्यूट के लिए योग्य परीक्षार्थियों के कंप्यूटर ज्ञान का टेस्ट भी लिया जाएगा।

ऐसे करें तैयारी

वैसे तो सभी विषयों में पास होना अनिवार्य है। लेकिन मेरिट में आना काफी हद तक रीजनिंग और मैथ्स की तैयारी पर निर्भर करेगा, क्योंकि इस भाग से १६० नंबर के १०० प्रश्न होंगे। रीजनिंग में ब्लड रिलेशन्स, डायरेक्शन टेस्ट, नंबर व एल्फाबेट सीरीज, स्टेटमेंट टेस्ट, क्यूब ऐंड डाइस, पजल टेस्ट, विभिन्न आकृतियों की छाया आदि से संबंधित प्रश्नों की अच्छी तैयारी करें। बोडमास का नियम जरूर याद रखें। मैथ्स में समय-काम-दूरी, नंबर सिस्टम, मेंसुरेशन, नंबर सिस्टम, ब्याज, प्रतिशत, लाभ-हानि आदि टॉपिक्स पर अच्छी कमांड होनी चाहिए। अंगरेजी के लिए ग्रामर के नियम याद रखें।
कुल पद :----------१२१०

उत्तर प्रदेश -----------७०

चंडीगढ़ --------------१०

दिल्ली ---------------१००

हरियाणा -------------३०

हिमाचल प्रदेश -------२०

जम्मू-कश्मीर --------०६

पंजाब ----------------४०

उत्तराखंड -------------२०

अन्य राज्यों में -------९१४

अंतिम तिथि- ३१ जुलाई, २०१०
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बनिए टीचर बनाइए फ्यूचर

प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, बायोटेक्नोलॉजी, बीफार्मा आदि के छात्रों की दिलचस्पी भी यदि टीचिंग की ओर होने लगे तो निश्चय ही अब इस प्रोफेशन में कुछ खास बात नजर आने लगी है। पिछले दिनों बीटीसी कोर्स के लिए ऐसे कई स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है जो पहले कोई प्रोफेशनल कोर्स कर चुके हैं। करें भी क्यों न, जब एक टीचर की शुरुआती सैलरी इन प्रोफेशनल कोर्सेज की नौकरी से कहीं अधिक है। सुरक्षित जॉब, साल में अधिक छुट्टियां और बेहतरीन पैकेज जैसी बातें सबको

इस प्रोफेशन की ओर आकर्षित करने लगी हैं।
कार्य की प्रकृति
                       शुरुआती स्तर यानी नर्सरी लेवल, जूनियर स्कूल लेवल, सेकेंडरी स्कूल लेवल और कॉलेज व यूनिवर्सिटी लेवल पर पढ़ाई के लिए अलग-अलग तरह के शिक्षकों की जरूरत होती है। इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों के अधिकांश मामलों में भी अध्यापक ही किसी न किसी रूप में नियुक्त होते हैं।
पाठ्यक्रम और योग्यता

नर्सरी टीचिंग ः प्री-प्राइमरी टीचर नर्सरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। नर्सरी टीचिंग के लिए किसी पॉलिटेक्निक या वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके लिए १२वीं में कम-से-कम ५० प्रतिशत अंक होने चाहिए।
                                       प्राइमरी टीचिंग ः प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने के लिए एजुकेशन में डिप्लोमा या ग्रेजुएशन जरूरी है। होम साइंस स्नातकों की नियुक्ति भी प्राइमरी टीचर के रूप में होती है।
                बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) कोर्स है। यह कोर्स भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार चलाया जाता है। इसके लिए योग्यता किसी भी विषय से ग्रेजुएशन है। नामांकन के लिए प्रवेश-परीक्षा आयोजित की जाती है। उत्तीर्ण होने पर सरकारी और निजी दोनों ही तरह के संस्थानों में दाखिला मिलता है।
                       सेकेंडरी/सीनियर सेकेंडरी टीचर ः ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) के लिए ग्रेजुएशन के बाद बीएड और पोस्टग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) के लिए पोस्टग्रेजुएशन के बाद बीएड करना होता है। बीएड के बाद एमएड भी किया जा सकता है।
                             खास स्कूल ः ऐसे स्कूल शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांगों के लिए होते हैं। इनमें शिक्षक के रूप में नियुक्ति केलिए १२वीं उत्तीर्ण होने के साथ-साथ संबंधित विषय/क्षेत्र में डिप्लोमा/डिगरी जरूरी है।
          कॉलेज लेक्चचर ः इसके लिए मास्टर डिगरी में कम-से-कम ५५ प्रतिशत अंक होने चाहिए। इसके अलावा यूजीसी/सीएसआईआर द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) भी उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसके अलावा लेक्चररों की बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य स्तरीय जांच (एसएलईटी) परीक्षा भी होती है। इसके लिए योग्यता नेट की ही तरह होती है।
                           एनसीटीई ः जो शिक्षक अभी पढ़ा रहे हैं, पर प्रशिक्षित नहीं हैं, उनके लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) तथा कुछ अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से टीचिंग की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे टीचिंग की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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कंप्यूटर वायरस



 virus



एक खास तरह का प्रोग्राम होता है, जो कंप्यूटर के डाटा को नुकसान पहुंचा सकता है या उसे चुरा सकता है। यह आमतौर पर ईमेल, पेनड्राइव या सीडी से डाटा ट्रांसफर करते समय और इंटरनेट से डाउनलोड करते समय आता है।
वायरस से लड़ने के लिये एंटी वायरस बनाये जाते हैं। एंटी वायरस सॉफ्टवेयर किन्हीं खास तरह के कोड्स को ध्यान में रखकर बनाये जाते हैं। जब कोई फाइल इन कोड्स से मिलती-जुलती होती है, तो यह प्रोग्राम उसे ब्लॉक कर देता है और इसके साथ ही आपको आगाह कर देता है कि आपके कंप्यूटर में वायरस है और उसको हटाने की जरूरत है। हर हफ्ते सैकड़ों नये वायरस पैदा होते हैं और एंटी वायरस कंपनियां खुद को इसके लिये तैयार करती रहती हैं।
       उनकी कोशिश यही होती है कि इस जंग में कहीं वो पिछड़ न जायें। इसलिये यह बेहद जरूरी है कि आप अपने कंप्यूटर के एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करते रहें। कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर ‘ऑटोमैटिक अपडेट’ के साथ आते हैं, यानी वे खुद-ब-खुद अपने को अपडेट करते रहते हैं।
                          मैक्फे, एवीजी, अवास्ट, अवीरा आदि कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। इन्हें ऑनलाइन या सॉफ्टवेयर की दुकान से खरीद सकते हैं या फिर इनके फ्री वर्जन इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं। फ्री वर्जन कुछ सीमित समय के लिये मिलते हैं। साथ ही कई बार इनमें पूरा प्रोटेक्शन भी नहीं मिलता।
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