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Sunday, December 26, 2010




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Sunday, September 26, 2010

कम्प्यूटर नेटवर्किग है बेहद डिमांडिंग

गोपाल  को एक बार कारोबार के सिलसिले में अपने शहर से दूर सिंगापुर जाना पडा। एक दिन वहां के मशहूर बाजार में घूमते हुए उन्हें एक सामान पसंद आ गया। उस कीमती वस्तु को खरीदने के लिए उन्होंने अपना पर्स खोला, तो उसमें उतने पैसे नहीं थे। एकाएक उन्हें अपने क्रेडिट तथा डेबिट कार्ड याद आए। फिर चिंता किस बात की। उन्होंने एटीएम से पैसे निकाले और भुगतान कर दिया। दरअसल, यह कम्प्यूटर नेटवर्किंग का कमाल है। क्रेडिट-डेबिट कार्ड के अलावा नेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग, रेल या एयर रिजर्वेशन आदि भी नेटवर्किग के ही उदाहरण हैं। एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर, एक ऑफिस या एक शहर से दूसरे शहर या फिर एक देश से किसी अन्य देश में डाटा का ट्रांसफर भी नेटवर्किग का ही कमाल होता है।
क्या है नेटवर्किग?
नेटवर्किंग शब्द नेट यानी जाल से बना है, जिसका अर्थ है दो या दो से अधिक चीजों को आपस में जोडना। कम्प्यूटर के संदर्भ में नेटवर्किग का मतलब है दो या दो से अधिक कम्प्यूटरों को एक कंपनी, एक शहर, एक देश के विभिन्न स्थानों को आपस में जोडना व उनके संस्थानों को एक्सेस करना तथा विश्व के किसी भी कोने में स्थित कंप्यूटरों को आपस में जोडना। इंटरनेट मोबाइल कम्युनिकेशन, सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्किंग का ही नतीजा है। कम्प्यूटर नेटवर्किंग को निम्न भागों में बांटा जा सकता है :
लोकल एरिया नेटवर्किंग (लैन) : इस तरह की नेटवर्किंग को लैन के नाम से जाना जाता है। इस तरह की नेटवर्किंग की मदद से किसी एक इमारत में रखे कम्प्यूटरों को आपस में जोडा जाता है। इसके तहत जोडे जाने वाले कम्प्यूटरों के बीच की दूरी 100 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसका कारण यह है कि इस तरह की नेटवर्किंग में कंप्यूटरों को केबल द्वारा एक-दूसरे से जोडा जाता है। ज्यादा दूरी होने पर डाटा के लॉस हो जाने की आशंका रहती है।
मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्किंग (मैन) : इसमें वायरलेस तथा वायर दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह की नेटवर्किग में एक शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित विभिन्न इमारतों या कंपनियों में रखे कम्प्यूटरों को आपस में जोडा जाता है। इसमें सामान्यत: ऑप्टिकल केबल, फाइबर केबल, राउटर, स्विच, रिपीटर इत्यादि एडवांस इस्ट्रूमेंट का उपयोग किया जाता है।
वाइड एरिया नेटवर्क (वैन) : वाइड एरिया नेटवर्क के तहत अलग-अलग शहरों या देशों में कार्यरत कम्प्यूटरों को जोडा जाता है। इसमें भौगोलिक दूरी कोई मायने नहीं रखती, क्योंकि यह पूर्णतया वायरलेस टेक्नोलॉजी पर आधारित होता है। इसमें कम्प्यूटरों को सैटेलाइट, राउटर, आईएसडीएन स्विच, वैन लाइनस, (ISDN, X-25, ATM, Frame Relay etc.) द्वारा आपस में जोडा जाता है।
स्टोरेज एरिया नेटवर्क (सैन) : इस तरह की नेटवर्किंग का उपयोग प्राय: बडी कंपनियों तथा इंटरनेट सर्विसेस प्रदान करने वाली कंपनियों द्वारा किया जाता है। इसके तहत एक सर्वर तथा स्टोरेज डिवाइसों को अनेक सर्वरों और स्टोरेज डिवाइसों के साथ सीधे जोडा जाता है।
नेटवर्किंग से लाभ
आईटी रिवॉल्यूशन के इस दौर में नेटवर्किग बेहद जरूरी है। बीपीओ कंपनियों का सारा काम-काज नेटवर्किग पर निर्भर होता है। कम्प्यूटर नेटवर्किंग के लाभों को मुख्यत: दो भागों में बांटा जा सकता है :
1. रिसोर्स शेयरिंग : इसकी सहायता से उपकरणों तथा सर्विसेस के उपयोग को कम करके किसी एक या दो कम्प्यूटर के साथ जोड दिया जाता है। इससे हर कम्प्यूटर के लिए अलग-अलग उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती है और कंपनियों की खर्चो में काफी बचत होती है। 2. इन्फॉर्मेशन शेयरिंग : इसकी मदद से किसी एक कम्प्यूटर और उसके डाटा को दुनिया के दूसरे कोने में रखे कम्प्यूटर में सहजता से आदान-प्रदान किया जा सकता है। इतना ही नहीं, इसकी मदद से हम वॉयस (बोलती हुई) फोटो, लाइव टेलिकॉस्ट आदि भी शेयर कर सकते हैं।
कौन-सा करें कोर्स
नेटवर्किंग के कोर्स मुख्यत: दो तरह के होते हैं-नेशनल और इंटरनेशनल। इंटरनेशनल कोर्स के तहत वे कोर्स आते हैं, जिनकी परीक्षा तथा सर्टिफिकेट इंटरनेशनल संस्थानों द्वारा लिए जाते हैं। इनकी विश्व में हर जगह मांग होती है। इंटरनेशनल कोर्सो में प्रमुख हैं : एमसीएसई यानी माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम इंजीनियर, एमसीएसए यानी माइक्रोसॉफ्ट सर्टिफाइड सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर, सीसीएनए यानी सिस्को सर्टिफाइड नेटवर्क असोसिएट, आरएचसीई यानी, रेडहैड सर्टिफाइड इंजीनियर काम्पटिया ए+, काम्पटिया एन+, काम्पटिया सिक्योरिटी +, काम्पटिया सर्वर+ आदि। इसके अलावा, नेशनल कोर्सो में प्रमुख के नाम इस प्रकार हैं :
1. डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी
2. डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी ऐंड डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेशन
3. एडवांस डिप्लोमा इन नेटवर्क टेक्नोलॉजी ऐंड सिक्योरिटी एक्सपर्ट
4. मास्टर इन नेटवर्क इंजीनियरिंग
प्रवेश के लिए योग्यता
कम्प्यूटर नेटवर्किग से संबंधित अधिकांश कोर्सो में प्रवेश के लिए बारहवीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। हालांकि, इन कोर्सो को ग्रेजुएट या ऊंची शिक्षा प्राप्त स्टूडेंट भी कर सकते हैं। यदि अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त योग्यता होगी।
संभावनाएं व सैलॅरी पैकेज
आज भारत सहित पूरे विश्व में जिस तरह से कम्प्यूटरों का प्रयोग तेजी से बढ रहा है तथा पूरे विश्व का जिस तरह से आधुनिकीकरण हो रहा है, उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि नेटवर्किंग इंजीनियरिंग में अपार संभावनाएं हैं। ऐसी स्थिति में आने वाले दशक में अकेले भारत में ही लाखों स्किल्ड लोगों की जरूरत होगी। एक स्किल्ड नेटवर्किंग इंजीनियर किसी भी छोटी या बडी कंपनी में निम्न पदों पर कार्य कर सकता है : नेटवर्क इंजीनियर, नेटवर्क सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर, डेस्कटॉप सपोर्ट इंजीनियर, टीम लीडर टेक्निकल हेड, टेक्निकल सपोर्ट इंजीनियर, सिस्टम एनालाइजर आदि। इन पदों पर 20 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक आसानी से कमा सकते हैं। योग्यता और अनुभव के आधार पर कोई नेटवर्किंग इंजीनियर प्रोग्रेस करते हुए सीनियर सिस्टम मैनेजर या इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मैनेजर भी बन सकता है।
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आईटी की बहार हैं संभावनाएं अपार

ताजा अध्ययन के मुताबिक भारत का इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर इस समय प्रति वर्ष करीब 25 प्रतिशत की दर से आगे बढ रहा है। स्टडी के अनुसार आईटी सेक्टर के विकास की यह रफ्तार अगले पांच साल तक इसी तरह बनी रहेगी। इस विकास का प्रमुख कारण देश की आर्थिक तरक्की है, जिसकी वजह से विश्वव्यापी मंदी (खासकर अमेरिका में) के बावजूद भारत आईटी और बीपीओ (बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिग) के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बना हुआ है। हालांकि, रुपये के मुकाबले डॉलर के लगातार गिरते मूल्य के कारण इंडियन बीपीओ कंपनियों के मुनाफे में काफी गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसके बावजूद उनके बिजनेस में लगातार इजाफा हो ही रहा है। इन सबके कारण आउटसोर्सिग से वर्ष 2010 तक देश को करीब 60 करोड डॉलर की आमदनी होने की उम्मीद है।
डिमांड ज्यादा, सप्लाई कम
आईटी सेक्टर में भारत के वर्चस्व को दुनिया में बनाए रखने के लिए सबसे बडा चैलेंज है-स्किल्ड मैनपॉवर की कमी को पूरा करना। देश के आईटी सेक्टर के सामने सबसे बडी समस्या पर्याप्त संख्या में एक्सपर्ट्स उपलब्ध न होना है। इस बारे में देश की सबसे बडी आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) के सीईओ एस रामादुरई इस बात को स्वीकार करते हैं कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की डिमांड बहुत ज्यादा है, जबकि सप्लाई बहुत कम। जानी-मानी सर्वे कंपनी मैकिन्जे के प्रमुख नौशिर काका आंकडों के आधार पर बताते हैं कि वर्तमान गति से चल रहे कारोबार को देखते हुए भारत को वर्ष 2010 तक 2.3 मिलियन (करीब 23 लाख) आईटी व बीपीओ एक्सपर्ट्स की जरूरत होगी, लेकिन देश में जिस रफ्तार से क्वॉलिफाइड लोग तैयार हो रहे हैं, उसमें 5 लाख की कमी बनी रहेगी। इस स्थिति को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि यदि युवा अपनी रुचि के अनुसार सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर-नेटवर्किग से जुडा कोई भी कोर्स करते हैं, तो उनके लिए आकर्षक रोजगार का द्वार हमेशा खुला है और वह भी आकर्षक सैलॅरी पैकेज पर।
तरह-तरह के हैं काम
आईटी वर्ल्ड में तरह-तरह के काम हैं। खास बात यह है कि इन सभी कामों में खूब पैसा भी मिल रहा है। यही कारण है कि युवाओं के बीच इनसे संबंधित कोर्सो का जबर्दस्त क्रेज है और जिन संस्थानों में ऐसे कोर्स संचालित हैं, वहां स्टूडेंट्स की भीड लगी है। आइए जानते हैं किन-किन क्षेत्रों में स्किल्ड मैनपॉवर की जरूरत है :
सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट : आईटी सेक्टर में सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट के कार्य से सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और प्रोग्रामर्स जुडे होते हैं। इनका मुख्य कार्य विभिन्न सॉफ्टवेयर लैंग्वेज में सॉफ्टवेयर डेवॅलप करना होता है। देखा जाए, तो सॉफ्टवेयर दो तरह के होते हैं-ऐप्लिकेशन सॉफ्टवेयर और सिस्टम सॉफ्टवेयर। इन सॉफ्टवेयर की सहायता से कई तरह के प्रोग्रामिंग लैंग्वेज तैयार किए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल कंपनियां करती हैं। सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट में काम करने के लिए नॉलेज को हमेशा अपडेट करते रहने के साथ ही प्रमुख प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज, जैसे- सी, सी++, जावा, विजुअल बेसिक आदि में विशेषज्ञता हासिल करनी होगी।
सिस्टम एनैलिस्ट : सिस्टम एनैलिस्ट कम्प्यूटर डेवलॅप करने का प्लॉन बनाते हैं। यदि सिस्टम एनैलिस्ट के रूप में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको सभी तरह के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की जानकारी रखनी होगी। सिस्टम एनैलिस्ट ग्राहकों की बिजनेस आवश्यकता को समझते हुए भी सिस्टम तैयार करने में दक्ष होते हैं।
डाटा बेस : डाटा बेस के तहत डाटा को इस प्रकार से स्टोर किया जाता है कि जरूरत पडने पर इन्हें आसानी से इस्तेमाल और अपटेड किया जा सके। किसी भी कंपनी के लिए उनका डाटा काफी मायने रखता है। ऐसे में डाटाबेस प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढने लगी है, क्योंकि आज तकरीबन हर छोटी-बडी कंपनी डाटा मेंटेन करने और उन्हें अपटेड रखने की कोशिश करती रहती है।
सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर : सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर का मुख्य होता है। कार्य कनेक्टिविटी और इंटरनेट की सुविधा प्रदान करना। आईटी सेक्टर में नेटवर्किग काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि नेटवर्किग के माध्यम से ही कम्प्यूटर एक दूसरे से जुडे होते हैं। देखा जाए, तो आज हर छोटे-बडे संस्थान में कम्प्यूटर नेटवर्किग के लिए सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत होती है। हालांकि, इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को सिस्टम सिक्योरिटी के साथ-साथ नेटवर्किग सिक्योरिटी का भी ध्यान रखना पडता है। इसके अलावा, आप इस सेक्टर में कैड स्पेशलिस्ट, सिस्टम आर्किटेक्ट, विजुअल डिजाइनर, एचटीएमएल प्रोग्रामर, डोमेन स्पेशलिस्ट, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट, इंटिग्रेशन स्पेशलिस्ट, कम्युनिकेशन इंजीनियर, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर, सेमीकंडक्टर स्पेशलिस्ट आदि के रूप में काम कर सकते हैं।
हार्डवेयर : सॉफ्टवेयर की तरह हार्डवेयर भी आईटी सेक्टर का महत्वपूर्ण अंग है। हार्डवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वालों पर कम्प्यूटर असेंबल करने से लेकर इसके खराब पा‌र्ट्स की मरम्मत तक की पूरी जिम्मेदारी होती है। दरअसल, आज हर जगह कम्प्यूटर के बढते इस्तेमाल के कारण ऐसे हार्डवेयर प्रोफेशनल्स की मांग काफी बढ गई है, जो कि कम्प्यूटर को चुस्त-दुरुस्त रखने में माहिर हों। हार्डवेयर के क्षेत्र से जुडने के बाद मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च ऐंड डेवलॅपमेंट आदि क्षेत्र में भी कार्य करने के भरपूर मौके मिलते हैं।
कोर्स हैं कई
कम्प्यूटर के क्षेत्र में दो तरह के काम होते हैं-पहला, सॉफ्टवेयर से संबंधित और दूसरा, हार्डवेयर से संबंधित। सॉफ्टवेयर के तहत जहां प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है, वहीं हार्डवेयर के तहत कम्प्यूटर को असेंबल करने तथा किसी पार्ट के खराब होने पर उसे ठीक करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इनसे संबंधित कई तरह के कोर्स सरकारी और निजी संस्थाओं द्वारा चलाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं :
ग्रेजुएट लेवॅल कोर्स : इसके लेवॅल पर प्रमुख कोर्स हैं-बीएससी नॉलेज को हमेशा अपडेट करते रहने के साथ ही प्रमुख प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज, जैसे- सी, सी++, जावा, विजुअल बेसिक आदि में विशेषज्ञता हासिल करनी होगी।
सिस्टम एनैलिस्ट : सिस्टम एनैलिस्ट कम्प्यूटर डेवलॅप करने का प्लॉन बनाते हैं। यदि सिस्टम एनैलिस्ट के रूप में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको सभी तरह के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की जानकारी रखनी होगी। सिस्टम एनैलिस्ट ग्राहकों की बिजनेस आवश्यकता को समझते हुए भी सिस्टम तैयार करने में दक्ष होते हैं।
सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर : आईटी सेक्टर में नेटवर्किग काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि नेटवर्किग के माध्यम से ही कम्प्यूटर एक दूसरे से जुडे होते हैं। देखा जाए, तो आज हर छोटे-बडे संस्थान में कम्प्यूटर नेटवर्किग के लिए सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत होती है। हालांकि, इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को सिस्टम सिक्योरिटी के साथ-साथ नेटवर्किग सिक्योरिटी का भी ध्यान रखना पडता है। इसके अलावा, आप इस सेक्टर में कैड स्पेशलिस्ट, सिस्टम आर्किटेक्ट, विजुअल डिजाइनर, एचटीएमएल प्रोग्रामर, डोमेन स्पेशलिस्ट, इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट, इंटिग्रेशन स्पेशलिस्ट, कम्युनिकेशन इंजीनियर, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर, सेमीकंडक्टर स्पेशलिस्ट आदि के रूप में काम कर सकते हैं।
हार्डवेयर सॉफ्टवेयर की तरह हार्डवेयर भी आईटी सेक्टर का महत्वपूर्ण अंग है। हार्डवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने वालों पर कम्प्यूटर असेंबल करने से लेकर इसके खराब पार्ट्स की मरम्मत तक की पूरी जिम्मेदारी होती है। आज हर जगह कम्प्यूटर के बढते इस्तेमाल के कारण ऐसे हार्डवेयर प्रोफेशनल्स की मांग काफी बढ गई है, जो कि कम्प्यूटर को चुस्त-दुरुस्त रखने में माहिर हों। हार्डवेयर के क्षेत्र से जुडने के बाद मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च ऐंड डेवलॅपमेंट आदि क्षेत्र में भी कार्य करने के भरपूर मौके मिलते हैं।
कोर्स हैं कई
कम्प्यूटर के क्षेत्र में दो तरह के काम होते हैं-पहला, सॉफ्टवेयर से संबंधित और दूसरा, हार्डवेयर से संबंधित। सॉफ्टवेयर के तहत जहां प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है, वहीं हार्डवेयर के तहत कम्प्यूटर को असेंबल करने तथा किसी पार्ट के खराब होने पर उसे ठीक करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इनसे संबंधित कई तरह के कोर्स सरकारी और निजी संस्थाओं द्वारा चलाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं :
ग्रेजुएट लेवॅल कोर्स : इसके लेवॅल पर प्रमुख कोर्स हैं-बीएससी इन कम्प्यूटर साइंस और बैचलर ऑफ कम्प्यूटर ऐप्लिकेशन यानी बीसीए। यह तीन साल का फुलटाइम कोर्स है। इसके अलावा आजकल सबसे ज्यादा क्रेज बीटेक (इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी या कम्यूटर साइंस) का है। यह कोर्स देश के सभी आईआईटी और इंजीनियरिंग कॉलेजों में है। आईआईटी में एडमिशन के लिए आईआईटी-जेईई उत्तीर्ण करनी होती है, जबकि अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए एआईईईई क्वालिफाई करना होता है। इन एंट्रेंस में शामिल होने के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स के साथ बारहवीं उत्तीर्ण होना चाहिए। इसके तहत कम्प्यूटर के बेसिक्स के साथ विभिन्न सॉफ्टवेयर लैंग्वेजेज की जानकारी और सॉफ्टवेयर डेवलॅप करना सिखाया जाता है। पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स : मास्टर ऑफ कम्प्यूटर ऐप्लिकेशन यानी एमसीए तीन वर्ष का फुलटाइम पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स है। यह कोर्स करके स्टूडेंट्स सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सकते हैं। इसके तहत कम्प्यूटर संबंधी अवधारणाओं और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की ठोस जानकारी दी जाती है। एमसीए प्रोग्राम में सी, सी++, जावा लैंग्वेज, टेक्निकल टॉपिक्स, जैसे-कम्प्यूटर डिजाइन, थ्योरी ऑफ कम्प्यूटिंग, डिस्क्रिट मैथमेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्राफिक्स, एनिमेशन आदि भी पढाया जाता है। बीसीए या एमसीए वहीं से करना चाहिए, जहां इन कोर्सो को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त हो।
अन्य सॉफ्टवेयर कोर्स : उपर्युक्त कोर्सो के अलावा, मास्टर ऑफ कम्प्यूटर साइंस (एमसीएस), मास्टर ऑफ साइंस (कम्प्यूटर साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग आदि) तथा कम्प्यूटर साइंस या इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में एमफिल और पीएचडी भी किया जा सकता है।
हार्डवेयर-नेटवर्किग कोर्स : हर छोटे-बडे ऑफिस में कम्प्यूटर की अनिवार्यता को देखते हुए हार्डवेयर-नेटवर्किग एक्सपर्ट की डिमांड पूरी दुनिया में तेजी से बढ रही है। हार्डवेयर-नेटवर्किग कोर्स सामान्यतया निजी क्षेत्र के संस्थानों द्वारा चलाया जा रहा है। इस तरह के कोर्सो में कम्प्यूटर रिपेयर करने, असेंबल करने तथा खराब पुर्जो को बदलने की ट्रेनिंग दी जाती है। ऐसे कोर्स की अवधि सोलह से अठारह माह की होती है। इससे संबंधित कोर्स में प्रवेश लेने से पहले इस बात का खास खयाल रखें कि उस संस्थान में चिप लेवॅल की ट्रेनिंग दी जाती है या नहीं! यह एडवांस टेक्निक है। पहले कार्ड लेवॅल की ट्रेनिंग दी जाती थी, जो अब आउटडेटेड हो गई है। कार्ड लेवॅल में कम्प्यूटर के किसी पार्ट में खराबी आने पर पूरे खराब पार्ट को ही बदल दिया जाता था। पर अब चिप लेवॅल का प्रचलन है। इसमें कम्प्यूटर के जिस चिप में खराबी आती है, केवल उसकी मरम्मत करना सिखाया जाता है। इस बारे में दिल्ली स्थित ए-सेट के डायरेक्टर उदय कुमार वैश्य कहते हैं कि हार्डवेयर-नेटवर्किग के सीधे तौर पर जॉब ओरिएंटेड कोर्स होने के कारण स्टूडेंट्स को इससे संबंधित किसी भी संस्थान में प्रवेश के लिए खास सावधानी बरतनी चाहिए। प्रवेश वहीं लें, जहां चिप लेवॅल का एडवांस कोर्स कराया जाता हो और सैन जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जाता हो। इसके अलावा पूरे कोर्स की एकमुश्त फीस न लेकर मासिक आधार पर ली जाती हो, ताकि पढाई से संतुष्ट न होने पर आप वह संस्थान छोडकर कहीं और एडमिशन ले सकें।
डोएक कोर्स : भारत सरकार के इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री के अंतर्गत कार्यरत स्वायत्त संस्था डोएक (डीओईएसीसी) द्वारा संचालित विभिन्न लेवॅल के कोर्स करके भी आईटी की दुनिया में स्थान बना सकते हैं। बीसीए या एमसीए जैसे कोर्सो में प्रवेश न पा सकने वाले स्टूडेंट इन कोर्सो में प्रवेश ले सकते हैं। देश भर में डोएक से संबद्ध करीब एक हजार से अधिक संस्थानों द्वारा कोर्स संचालित किए जाते हैं। ये कोर्स चार स्तरों पर संचालित होते हैं-ओ लेवॅल, ए लेवॅल, बी लेवॅल तथा सी लेवॅल। इनमें ओ लेवॅल को पॉलिटेक्निक या डिप्लोमा के समकक्ष माना जाता है। ए लेवॅल एडवांस डिप्लोमा या पीजी डिप्लोमा तथा बी लेवॅल को एमसीए या एमएससी के समकक्ष माना जाता है। सी लेवॅल सबसे उच्च श्रेणी का कोर्स है, जिसे एमटेक के बराबर मान्यता प्राप्त है। डोएक सोसायटी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पीएन गुप्ता का कहना है कि डोएक की डिग्रियों को भारत सरकार ने सभी तरह की नौकरियों के लिए मान्यता प्रदान की है।
वर्ष 2010 तक भारत में करीब 23 लाख आईटी एक्सपर्ट्स की जरूरत होगी।
वैश्रि्वक मंदी के बावजूद भारतीय आईटी इंडस्ट्री की सालाना ग्रोथ रेट 25 प्रतिशत है।
आईटी इंडस्ट्री को आउटसोर्सिग से वर्ष 2010 तक 60 करोड डॉलर की आमदनी होगी।
आईआईटी या इंजीनियरिंग कॉलेजों से बीटेक करके आईटी वर्ल्ड में पहचान बना सकते हैं।
हार्डवेयर-नेटवर्किग का कोर्स करके भी बडी व मल्टीनेशनल कंपनियों में जॉब पा सकते हैं।
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नेटवर्किग-हार्डवेयर में हैं खूब अवसर

इन दिनों अधिकांश स्टूडेंट अपने मनपसंद कोर्सो में एडमिशन की जद्दो जहद में लगे होंगे। लेकिन ऐसे भी तमाम स्टूडेट हैं, जो किसी कारण बारहवीं के बाद आगे की रेगुलर पढाई करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे युवा कोई ऐसा प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, जिसे पूरा करने के बाद उन्हें ठीक-ठाक नौकरी मिल जाए। आज के आईटी एज में ऐसे कई कोर्स उपलब्ध हैं। ऐसे कोर्सो में प्रमुख है-कम्प्यूटर आधारित हार्डवेयर एवं नेटवर्किग का कोर्स। कम्प्यूटर आधारित काम-काज के बढने से हार्डवेयर इंजीनियरों की खूब मांग है।
क्या है हार्डवेयर-नेटवर्किग?
कम्प्यूटर की दुनिया में मुख्य रूप से दो तरह का काम होता है-पहला सॉफ्टवेयर का, जिसकी मदद से कम्प्यूटर काम करता है और दूसरा, हार्डवेयर का, जो कम्प्यूटर की मशीनरी होता है। इसमें मुख्य रूप से सीपीयू यानी हार्ड डिस्क, मदर बोर्ड, मॉनीटर, माउस आदि होते हैं, जिनकी मदद से कम्प्यूटर को ऑपरेट किया जाता है। नेटवर्किग के तहत एक जगह के कम्प्यूटर को उसी जगह या किसी अन्य शहर या देश में स्थित कम्प्यूटरों से जोडा जाता है, ताकि उनके डाटा आपस में शेयर किए जा सकें। नेटवर्किग का काम मुख्यत: तीन तरह से किया जाता है-लैन यानी लोकल एरिया नेटवर्क, सैन यानी मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क और वैन यानी वाइड एरिया नेटवर्क के माध्यम से। पूरी दुनिया में सॉफ्टवेयर डेवलॅपमेंट के लिए भारत का नाम है। ऐसी तमाम कंपनियां हैं, जिन्होंने ग्लोबल लेवॅल पर पहचान बनाई है। इनमें टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, सत्यम, एचसीएल आदि प्रमुख हैं।
संस्थान कैसा हो?
कहीं भी एडमिशन लेते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि वहां लेटेस्ट तकनीक से ट्रेनिंग दी जा रही है या नहीं। इसके अलावा यह भी देखें कि वहां लैन, वैन के साथ-साथ MCSE  CCNA जैसी अत्याधुनिक ट्रेनिंग की सुविधा है या नहीं, मार्केट में अब MCSE CCNA  की  जानकारों की ही डिमांड है। हार्डवेयर की ट्रेनिंग दो तरह की होती है-कार्ड लेवॅल की और चिप लेवॅल की। कार्ड लेवॅल में जहां कम्प्यूटर के खराब पार्ट को ही बदल दिया जाता है, वहीं अपडेटेड चिप लेवॅल में उस पार्ट की खराबी दूर की जाती है। ऐसे में चिप लेवॅल का कोर्स करना ही बेहतर होगा। ऐसा कोर्स करीब डेढ वर्ष की अवधि का है।
जरूरी योग्यता
हार्डवेयर-नेटवर्किग के कोर्स में एडमिशन के लिए कम से कम बारहवीं उत्तीर्ण होना चाहिए। साइंस बैकग्राउंड और कम्प्यूटर की बेसिक नॉलेज रखने वाले छात्रों को थोडा सुविधा होती है, हालांकि आ‌र्ट्स स्ट्रीम के छात्र भी यह कोर्स आसानी से कर सकते हैं।
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Wednesday, September 22, 2010

ऐसे लोग हमेशा दुखी ही रहते हैं जो...

एक आदमी रोज- रोज मंदिर जाता और प्रार्थना करता है,  हे भगवान मैं जीवन से बहुत परेशान हूं मुझे दुखों से मुक्ति दे दो। मुझे मोक्ष चाहिये, मुझे मोक्ष दिला दो। एक दिन भगवान परेशान हो गए क्योंकि वह रोज सुबह-सुबह पहुंच जाता और गिड़गिड़ता कि मैं दुखी हूं।

एक दिन भगवान प्रकट हो गए और बोले तुझे मुक्ती चाहिए तो लो इसी वक्त लो, यह खड़ा है विमान बैठकर चलो। वह आदमी घबरा कर बोला अभी, एकदम कैसे हो सकता है? अभी मेरा लड़का छोटा है। जरा जवान हो जाए उसकी शादी हो जाए फिर चलूंगा। भगवान ने कहा फिर तू मुझे रोज-रोज परेशान क्यों करता है। सुबह से रोज चिल्लाना शुरू कर देता है।

अगर मोक्ष नहीं चाहिए तो क्यों मुझे व्यर्थ ही परेशान करता है। वह व्यक्ति बोला भगवान किसने कहा मुझे मोक्ष नहीं चाहिए लेकिन अभी नहीं आप मुझे आश्वासन दे दें। अब उस व्यक्ति का बेटा जवान हो गया और उसकी शादी हो गई। भगवान फिर प्रकट हुए और बोले चलो मेरे साथ मे तुम्हें मोक्ष के लिए लेने आया हूं। लड़के की तो अभी शादी हुई है।

कम से कम एक बच्चा हो जाए, पोते या पोती का सुख देख लूं, फिर मैं बिल्कुल तैयार हूं। भगवान फिर वापस चले गए। ऐसे करते-करते वह व्यक्ति बूढ़ा हो गया उसके हाथ पैर थक गए। अभी तक जब भी भगवान आते वह उन्हें हर बार बहाना बना कर लौटा देता। अब वह व्यक्ति बूढ़ा हो गया तो भगवान को लगा कि अब तो मुझे इसकी मनोकामना पूरी कर ही देनी चाहिये। भगवान फिर प्रकट हो गए तो अब वह आदमी झुंझला गया और बोला आप तो मेरे पीछे ही पड़ गए आपको और कोई नहीं मिलता क्या?

आप कृपया यहां से चले जाइए। भगवान बोले फिर तू मुझसे इतने सालों से क्यों रोज मुक्ति मांगता है। दरअसल वो तो मेरी पुरानी आदत है। वो तो मैं आदतन बोलता हूं। कल मैं फिर आऊंगा और वही प्रार्थना दोहराऊंगा प्रकट मत हो जाना। अक्सर लोगों के साथ आज यही समस्या है वे समझते हैं, धर्म की यही तस्वीर है। मंदिर जाते हुए उम्र कट जाती है लेकिन परमात्मा के अनुरूप नहीं हो पाता क्योंकि वह भगवान को भी अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं।

अपनी शर्तों पर पूजते हैं। उनकी पूजा का लक्ष्य भगवान को पाना नहीं बल्कि सांसारिक पदार्थों और दुखों से बचना भर है। इसलिए ऐसे लोग मांगने पर ही अपना सारा जीवन बीता देते हैं जो होता है उसका आनंद नहीं उठाते हैं। इसलिए ऐसे लोगों की जिन्दगी का अभाव कभी खत्म ही नहीं हो पाता है। वे हमेशा दुखी ही रहते है, खुद भगवान प्रकट हो जाएं तब भी।
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सफलता के लिए चाहिए सच्ची लगन

उन्नीसवीं सदी की घटना है। एक बार बंगाल में भीषण अकाल और महामारी का कहर टूट पड़ा। लोग दाने-दाने को तरसने लगे। चारों ओर हाहाकार मच गया।
ऐसी विकट स्थिति में एक दिन बाजार में एक असहाय बालक एक व्यक्ति से पैसे मांगने लगा-बाबूजी दो पैसे दे दो, बहुत भूखा हूं। उस व्यक्ति ने पूछा- यदि में तुम्हें चार पैसे दूं, तो क्या करोगे? बालक ने जवाब दिया-दो पैसे की खाने की सामग्री लूंगा और दो पैसे मां को दूंगा।
व्यक्ति ने फिर प्रश्न किया-अगर मैं तुम्हें दो आने दूं तो? अब बालक को लगा कि यह व्यक्ति उसका उपहास कर रहा है और वह चलने को हुआ। तब उस व्यक्ति ने बालक का हाथ पकड़ लिया और आत्मीयता से बोला- बताओ दो आने का क्या करोगे? बालके की आंखों में आंसू आ गए। वह बोला-एक आने का चावल लूंगा और शेष मां को दूंगा। मां की प्राणरक्षा हो जाएगी। तब उस व्यक्ति ने बालक को एक रुपया दिया। बालक प्रफुल्लित हो कर चला गया।
वही व्यक्ति कुछ वर्षों बाद एक दुकान के सामने से गुजर रहा था। दुकान पर बैठे युवक की दृष्टि जैसे ही उस व्यक्ति पर पड़ी, वह दौड़कर आया और उसके चरण छूकर विनम्रता के साथ उसे अपनी दुकान पर ले गया। युवक  ने अपना परिचय देते हुए कहा-श्रीमान। मैं वही बालक हूं, जिसे आपने अकाल की विभीषिका में दो पैसे मांगने पर एक रुपया दिया था। उसी एक रुपए से मैं यह दुकान खड़ी कर पाया हूं। व्यक्ति ने युवक को सीने से लगाते हुए कहा-बेटे। यह सफलता तुम्हें मेरे एक रुपए के कारण नहीं बल्कि तुम्हारी लगन व परिश्रम के मिली है। वह युवक विद्वत्ता की प्रतिमूर्ति ईश्वरचंद्र विद्यासागर थे, जिनके जीवन की यह घटना संदेश देती है कि लगन और मेहनत के बल पर कठिनतम लक्ष्यों की प्राप्ति भी की जा सकती है और सफलता की नई ईबारत लिखी जा सकती है।
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सफलता के लिए इन बातों का ध्यान रखें

सफलता के लिए इन बातों का ध्यान रखें

Source: पं. विजयशंकर मेहता 
कम्प्यूटर के दौर में हर चीज के शार्टकट ने हमारे दिमाग में घर कर लिया है। बिना शार्टकट अब शायद ही कोई काम होता हो। जीवन के प्रति इस रवैए ने हमारे समाज में भ्रष्टाचार के बीज बो दिए हैं। किसी काम में अगर भ्रष्टाचार शामिल हो जाए तो सफलता दूषित हो जाती है। और ऐसी सफलता आनंद नहीं, अशांति ही देती है।


यह तत्काल का समय है। सभी को सबकुछ जल्दी चाहिए। इस चक्कर में कुछ लोग शार्टकट अपना लेते हैं। सफलता के मामले में शार्टकट कभी-कभी भ्रष्टाचार और अपराध की सुरंग से भी गुजार देता है। हनुमानजी सफलता का पर्याय हैं। इनके यशगान हनुमानचालीसा में प्रथम पंक्तियों में गुरु की शरण की बात लिखी गई है। इस शरणागति का मतलब है मेरे पूर्ण पुरुषार्थ के बाद भी कोई शक्ति है जो मुझे असफलता से बचाएगी। इस शरणागति को मजबूत बनाने के लिए ही तुलसीदासजी ने हनुमानचालीसा के पहले दोहे में च्च्जो दायकु फलचारिज्ज् लिखा है।


यूं तो किसी भी ग्रंथ की फलश्रुति अंत में बताई जाती है पर यहाँ पहले ही लिख देने का कारण यही है कि सब लोग आज तुरंत फल चाहते हैं। ये चार फल हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।आज के समय में शीघ्र फल की आकांक्षा हो यह तो ठीक है लेकिन शीघ्र फल दे ऐसा परिश्रम भी किया जाए। यदि हमारे ऊपर कोई दायित्व हो तो शतप्रतिशत परिणाम के लिए प्रयास किए जाएं। यदि विवेक से काम लिया जाए तो शीघ्रता का अर्थ है आलस्य रहित सक्रियता। अकारण विलंब करना हमारी आदत न बन जाए, इसलिए हनुमानजी से हम सीख लें तत्काल का अर्थ है समयबद्ध आचरण। ज्ञान का खतरा अहंकार में है और भक्ति का आलस्य में। इसलिए हनुमानचालीसा की पहली पंक्ति से सीखा जाए फल की आकांक्षा, आसक्ति भले ही न रखी जाए किन्तु परिणाम के प्रति तत्परता, सजगता जरूर रखी जाए। जब हम फल की उपलब्धि को समझ लेंगे तो प्रयासों के महत्त्व को भी जानकर ठीक से कार्य कर सकेंगे।
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कॉरपोरेट जीवन में प्रगति के गुर

कॉरपोरेट जीवन में प्रगति के गुर

Source: Career Mantra 


जब कॅरियर की बात आती है तो हर कोई अपनी भूमिका और जवाबदेही के लिहाज से आगे बढ़ना चाहता है। शिखर पर पहुंचने की राह कठिन जरूर है, लेकिन सही तौर-तरीके और कार्य संस्कृति को अपनाकर तेजी से इस दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं। यहां कुछ ऐसी बातें पेश हैं, जिनके जरिए आप अपने सहकर्मियों व वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

मल्टीटास्किंग : आज के जटिल माहौल में मल्टीटास्किंग की उपयोगिता को नकारना मुश्किल है। बस ध्यान देने वाली बात यह है कि हर काम को सही तरह से और प्राथमिकतानुसार अंजाम दिया जाए। आपका लक्ष्य कम से कम करके रुक जाना नहीं होना चाहिए। अतिरिक्त कार्यभार तो लें, लेकिन यह भी ख्याल रहे कि इससे आपकी मौजूदा जिम्मेदारियां प्रभावित न हों।

नकारात्मकता से दूर : क्रोध, शिकायतें, इल्जाम लगाना, बुरा-भला कहने की आदत आपकी निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हुए आपके काम पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। अपने सहकर्मियों का दोष निकालने से कोई फायदा नहीं होता। चुप रहें और अपने काम से काम रखें।

नेटवर्क बनाएं: नेटवर्क बनाना आज का मंत्र है। खुद को नेटवर्क में जरूर रखें। इसके लिए ऑफिस की मीटिंग, सहकर्मियों से बातचीत, दूसरी क्रियाओं और टीम लीडर्स के साथ सतत संपर्क बनाए रखें। अपने सहकर्मियों की लिस्ट को सिर्फ उसी फ्लोर तक सीमित न रखें, जहां आप बैठते हों। इस दायरे को आगे बढ़ाएं। यह काम वर्कशॉप और कांफ्रेंस के जरिए संभव है।

योग्यताएं बढ़ाएं : अपने मौजूदा काम के अलावा दूसरी योग्यताओं को हासिल करने की कोशिश करें, जिससे आगे जिम्मेदारियों का निर्वाह करने में मदद मिलेगी। ऐसी योग्यताओं को जानें और अध्ययन करें, जिन्हें हासिल करना कॅरियर के लिहाज से उचित है। इसके लिए लघु या अल्पकालिक कोर्स कर सकते हैं।

नियोजन : किसी भी काम को सफल व प्रभावी बनाने की मूल कड़ी है योजना बनाना। कोई नया काम, प्रोजेक्ट या पद मिलने पर एक निर्धारित समय के लिए एजेंडा तैयार कर लें। लाभ बढ़ाने, घाटा कम करने और प्रतियोगिता में बने रहने के नए-नए तरीके सोचें। इससे प्रमोशन के समय आप औरों से अलग खड़े नजर आएंगे।
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हैकिंग.. अच्छी भी

और भी हैं राहें
हैकिंग का नाम सुनते ही जहन में कंप्यूटर हैक करने वालों की नकारात्मक छवि सामने आती है। लेकिन एथिकल हैकिंग के रूप में इसका सकारात्मक आयाम भी है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि एथिकल (नैतिक) हैकर का काम काफी अर्थप्रद और चुनौतीपूर्ण है। अगर आप भी इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं, तो किसी प्रतिष्ठित संस्थान से ही इसका कोर्स करें। इंटरनेशनल डाटा कॉर्प (आईडीसी) द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि इस क्षेत्र में फिलहाल विश्वव्यापी स्तर पर तकरीबन ६क्,000 दक्ष पेशेवरों की दरकार है।

क्या है यह
सुरक्षा तो यूं भी महत्वपूर्ण पहलू है लेकिन जब दुनियाभर में मौजूद नेटवर्क की सुरक्षा की बात आती है, तो इस क्षेत्र में काम करने के बहुत से विकल्प बनते हैं। हैकिंग से साबका पड़ने वाले कई युवा, भले ही उनका वास्ता नकारात्मक ढंग से पड़ा हो, अब इस कॅरियर की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इस क्षेत्र में काम देते वक्त कंपनियां आपकी योग्यता को बखूबी परखती हैं। बस यह ध्यान रखना है कि आपके कांट्रैक्ट की शर्ते ठीक हों।

सुरक्षा की आवश्यकता
आज के समय में सुरक्षा बहुत बड़ा मुद्दा हो गई है। यह बात साइबर स्पेस पर भी लागू होती है। नेटीजंस (नेट की दुनिया में रहने वाले) के तौर पर हमारा वास्ता साइबर स्पेस से जुड़े कई तरह के विकल्पों से पड़ता है। इसमें ई-कॉमर्स, कोलेबरेटिव कंप्यूटिंग, ई-मेल इत्यादि शामिल हैं।

कहां है जरूरत
एथिकल हैकर्स की जरूरत सरकारी संस्थानों, निजी व सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और सामान्य नागरिकों को भी होती है। उपरोक्त सभी लोगों को खतरा होता है कि कोई हैकर उनका वेब सर्वर क्रेक कर लेगा, उनके लोगो को पोर्नोग्राफी से बदल देगा, व्यक्तिगत ई-मेल पढ़ेगा, ऑनलाइन शॉपिंग साइट से क्रेडिट कार्ड का नंबर चुरा लेगा या फिर किसी सॉफ्टवेयर के जरिए कंपनी की गोपनीय बातें इंटरनेट पर जारी कर देगा। इससे बचने के लिए वे एथिकल हैकर्स की मदद लेते हैं।

खतरा
हैकिंग अगर नकारात्मक रूप से प्रयोग की जाए तो चंद मिनटों में एक बार के अनुचित हस्तक्षेप से ये किसी कंपनी को लाखों डॉलर का नुकसान पहुंचा सकती है। नेट पर आश्रित कई लोगों को हैकर्स से बड़ा खतरा है। पिछले कुछ वर्षो में हैकिंग या इससे जुड़ी समस्याओं में जबरदस्त बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। ऐसा होने पर ई-मेल एकाउंट हैक होने, आवश्यक डाटा चोरी होने, एड्रेस बुक कॉपी होने, वायरस, पासवर्ड अटैक, स्पूफ्ड मैसेज और अभद्र ई-मेल मिलने की स्थिति बन सकती है। एथिकल हैकर्स इंटरनेट से जुड़ी इन समस्याओं के लिए कड़ा सुरक्षाचक्र तैयार करते हैं।

महत्ता
एथिकल हैकर्स को व्हाइट हैट भी कहते हैं। ये एक तरह से अनुमति प्राप्त कर कंप्यूटर सिस्टम को मजबूत किए जाने के लिए एंटी हैकिंग तकनीक या इसका तोड़ विकसित करते हैं। ये कंप्यूटर क्रिमिनल्स के कदमों को पहले भांपकर उनके अटैक करने से पहले ही सुरक्षाकवच तैयार कर लेते हैं। मशहूर कंप्यूटर सिक्युरिटी विशेषज्ञ अंकित फाड़िया अपनी किताब में लिखते हैं, ‘कंप्यूटर हैकर्स मोटे तौर पर सेंधमार को पकड़ने के लिए उसी के अनुसार सोचने की प्रणाली पर कार्य करते हैं। इसी तरह हैकर्स से एक कदम आगे बढ़ते हुए सिस्टम की सुरक्षा की जा सकती है।’

योग्यता
एथिकल हैकर बनने के लिए कंप्यूटर-सैवी और नए-नए गैजेट्स का शौकीन होना महत्वपूर्ण है। आपको कंप्यूटर, इंटरनेट की दुनिया और नेटवर्किग व प्रोग्रामिंग की मूलभूत जानकारी होनी चाहिए। एथिकल हैकिंग व साइबर क्राइम की दुनिया से भी खुद को अपडेट रखना इसके लिए जरूरी है।

पारिश्रमिक
भारत में एथिकल हैकर्स का पारिश्रमिक 3-4.5 लाख रुपए प्रतिवर्ष का हो सकता है। जबकि विदेशी कंपनियों के लिए कार्य कर रहे लोगों की वार्षिक आय का आंकड़ा 27-32 लाख रुपए तक हो सकता है।
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नोकिया फोन पर उपलब्ध है इग्नू का इंग्लिश कोर्स

नोकिया फोन पर उपलब्ध है इग्नू का इंग्लिश कोर्स
नई दिल्ली, एजेंसी

दूरस्थ शिक्षा में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की अपनी पहल के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने मंगलवार को नोकिया फोन के 'ओवी लाइफ टूल्स' के जरिए इंग्लिश का एक सर्टिफिकेट कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
इग्नू के उपाध्यक्ष वी.एन. राजशेखरन पिल्लई ने संवाददाताओं से कहा, ''शुरुआत में हम महाराष्ट्र के छह जिलों में यह कार्यक्रम शुरू करेंगे। छह महीने बाद लोगों की इसके लिए प्रतिक्रिया जानने के बाद हम राष्ट्रीय स्तर पर यह शुरुआत करेंगे।''
इग्नू ने इस कार्यक्रम को उपलब्ध कराने के लिए नोकिया के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है।
पिल्लई ने कहा, ''हम इस कार्यक्रम के लिए नोकिया के साथ एक विशेष समझौता कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए किया गया यह अपनी तरह का पहला सहयोगात्मक समझौता है।'' उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा की उन्नति और प्रचार-प्रसार के लिए अन्य कंपनियों के साथ भी ऐसे समझौते किए जाएंगे।
इंग्लिश में छह महीने की अवधि का यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम अगले साल जनवरी में शुरू होगा। इसके तीन अलग स्तर होंगे। इनमें रोजमर्रा के जीवन में अंग्रेजी, शिक्षा में अंग्रेजी और कार्यस्थल पर अंग्रेजी शामिल है। इस कोर्स में 1,900 रुपये का खर्च आएगा।
नोकिया इंडिया के प्रबंध निदेशक डी. शिवकुमार का कहना है कि उनकी कंपनी ने देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार की एक नई पहल की है।
नोकिया ने जून 2009 में 'ओवी लाइफ टूल्स' सेवा जारी की थी। इसके तहत कृषि, शिक्षा और मनोरंजन सेवाएं दी जाती हैं। इस पर अंग्रेजी के अलावा हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, पंजाबी, मराठी, बांग्ला, गुजराती और उड़िया भाषा में सेवाएं उपलब्ध रहती हैं।
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Wednesday, September 1, 2010

डिस्टेंस-एजुकेशन दूर करें दूरी

इन दिनों तेजी से बदलते समय का प्रभाव हर चीज पर पड रहा है। और इससे शिक्षा का क्षेत्र भी अछूता नहीं है। यही वजह है कि शिक्षा के स्वरूप, उद्देश्य और यहां तक कि शिक्षा के माध्यमों में भी काफी बदलाव देखा जा सकता है। परिणामस्वरूप इन दिनों सरकार न केवल शिक्षण-संस्थानों की संख्या में बढोत्तरी करने जा रही है, बल्कि शिक्षा रोजगारपरक भी हो, वह इस दिशा में भी पुरजोर कोशिश कर रही है। और सरकार की इस कोशिश में रेगुलर स्टडी सिस्टम ही नहीं, बल्कि ओपेन यूनिवर्सिटीज व डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स भी अपना-अपना अहम रोल अदा कर रहे हैं। डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर्स की पहुंच और लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स के प्रति पांच स्टूडेंट्स में से एक स्टूडेंट डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स से जुडे होते हैं। डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल के मुताबिक, आगामी पांच सालों में देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले के प्रतिशत को 10 से 15 प्रतिशतकरने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में डिस्टेंस लर्निग मोड का योगदान उल्लेखनीय होगा। 


लोकप्रिय क्यों ?

यदि यह कहें कि शिक्षा सबके लिए और सबको मिले समयानुकूल शिक्षा-सरीखे उद्देश्य को आज डिस्टेंस लर्निग सेंटर्स भली-भांति पूरा कर रहे हैं, तो शायद गलत नहीं होगा। दरअसल, न केवल इन एजुकेशन सेंटर्स की फीस सस्ती होती है, बल्कि इनके छोटे-छोटे शहरों में मौजूद होने के कारण इनकी पहुंच का दायरा भी काफी बृहत होता है। और सबसे बडी बात, जिसकी वजह से डिस्टेंस एजुकेशन की लोकप्रियता में दिन-ब-दिन इजाफा होता जा रहा है, वह है इसमें तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया जाना। दरअसल, आज डिस्टेंस एजुकेशन कॉरेस्पॉन्डेंस मैटीरियल्स तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्टूडेंट्स अब टेलिकॉन्फ्रेंसिंग और मोबाइल के माध्यम से ंडिस्टेंस एजुकेशन का लाभ भी काफी करीब से उठा रहे हैं।

प्रमुख कोर्सेज

आज देश भर में लगभग 14 ओपेन यूनिवर्सिटी मौजूद हैं। इसके अलावा, 54 से अधिक डिस्टेंस लर्निग  सेंटर्स भी हैं। इन संस्थानों से आप न केवल डिग्री कोर्स (ग्रेजुएट, पीजी, एमफिल, पीएचडी), बल्कि विभिन्न विषयों में प्रोफेशनल कोर्सेज (सर्टिफिकेट या डिप्लोमा) भी कर सकते हैं। कुछ महत्वपूर्ण कोर्सेज, जो आज छात्रों के बीच काफी पॉपुलर हैं, वे हैं..
पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज
मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
  मास्टर ऑफ एजुकेशन 
मास्टर ऑफ लाइब्रेरी ऐंड इन्फॉर्मेशन साइंस 4मास्टर ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट आदि।
बैचलर कोर्सेज
बैचलर ऑफ लॉ
बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन 
बैचलर ऑफ साइंस इन नर्सिग
बैचलर ऑफ सोशल वर्क आदि।
सर्टिफिकेट कोर्सेज
सर्टिफिकेट इन कम्प्यूटर ऐप्लिकेशन 
सर्टिफिकेट इन कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग
सर्टिफिकेट इन फूड न्यूट्रिशन
सर्टिफिकेट इन डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स
सर्टिफिकेट इन कम्युनिकेटिव इंग्लिश आदि।
पीजी डिप्लोमा कोर्सेज
पीजी डिप्लोमा इन एग्रिकल्चरल मार्केटिंग
पीजी डिप्लोमा इन बैंकिंग ऐंड फाइनैंस 
पीजी डिप्लोमा इन मार्केटिंग मैनेजमेंट
पीजी डिप्लोमा इन एन्टरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग
पीजी डिप्लोमा इन एक्सपोर्ट मैनेजमेंट
पीजी डिप्लोमा इन कॉर्पोरेट लॉ आदि।
डिप्लोमा कोर्सेज
डिप्लोमा इन अप्लॉयड इलेक्ट्रॉनिक्स
डिप्लोमा इन फैशन डिजाइन ऐंड बूटिक मैनेजमेंट
डिप्लोमा इन डेयरी मार्केटिंग
डिप्लोमा इन इन्फॉर्मेशन साइंस
डिप्लोमा इन टूरिज्म इंडस्ट्री आदि।

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प्रोबेशनरी क्लेरिकल परीक्षा

बैंकिंग सेक्टर हमेशा से लोगों का पसंदीदा करियर डेस्टिनेशन रहा है। कम्प्यूटर आने के बाद बैंकिंग सेक्टर में काम करने का अंदाज भी काफी बदला है। यही कारण है कि युवा इस सेक्टर की ओर काफी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं। यदि आप भी बैंक में नौकरी करना चाहते हैं, तो यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में प्रोबेशनरी क्लर्क पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। कुल पदों की संख्या 700 है। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 सितंबर तथा परीक्षा की तिथि 28 नवंबर, 2010 है।
शैक्षिक योग्यता
यूनाइटेड बैंक में प्रोबेशनरी क्लर्क पदों के लिए अभ्यर्थियों को किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड या संस्थान से बारहवीं में कम से कम 60 प्रतिशत अंक या किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री अनिवार्य है। इसके साथ ही मान्यताप्राप्त संस्थान से कम से कम तीन महीने का कम्प्यूटर कोर्स अवश्य किया हुआ हो।
उम्र सीमा
सामान्य अभ्यर्थियों के लिए उम्र 18 से 28 वर्ष निर्धारित है, तो वहीं एससी, एसटी, ओबीसी तथा विकलांग उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र सीमा में छूट का प्रावधान है।
परीक्षा का स्वरूप
लिखित परीक्षा का पहला भाग वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित होगा, जिसमें रीजनिंग, क्लेरिकल एप्टीटयूड, क्वांटेटिव एप्टीटयूड और जेनरल इंग्लिश से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। गलत उत्तर देने पर निगेटिव मार्किग का भी प्रावधान है। दूसरे भाग में विवरणात्मक प्रश्न शामिल होंगे। लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसमें सफल होने के बाद अभ्यर्थी का अंतिम रूप से चयन किया जाएगा।
कैसे करें तैयारी
इस परीक्षा में यदि प्रश्नों को तेजी और शुद्धता से हल करने की आदत नहीं है, तो अधिकांश प्रश्नों का जवाब दे पाना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए अधिक से अधिक संख्या में प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करें और शुद्धता का भी पूरा ध्यान रखें। चूंकि प्रश्न वस्तुनिष्ठ प्रकार के होते हैं, इसलिए उन्हें शॉर्टकट फार्मूले से हल करने का प्रयास करें।
सभी खंडों पर ध्यान दें
बैंकिंग सर्विसेज क्रॉनिकल के प्रभात नंदन कहते हैं कि जेनरल इंग्लिश में विशेष रूप से ग्रामर, कॉम्प्रिहेंशन, वोकैबलरी आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं। इस खंड में कॉम्प्रिहेंशन से लगभग 10-15 प्रश्न पूछे जाते हैं। लगभग 10-10 प्रश्न कॉमन एरर और अन्य से पूछे जाते हैं। समान संख्या में समानार्थक, विपरीतार्थक तथा सेंटेंस अरेंजमेंट से प्रश्न होंगे। इसके अलावा इडियम/फ्रेजेज, सेंटेंस को इंप्रूव करने तथा कभी-कभार स्पेलिंग एरर से भी प्रश्न पूछे जाते हैं। इस खंड के प्रश्नों को हल करने के लिए फंडामेंटल ग्रामर की जानकारी बहुत जरूरी है। नियमित अभ्यास के लिए अंग्रेजी की पुस्तकों व पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन करना लाभकारी साबित हो सकता है। इसके अलावा रेन ऐंड मार्टिन की ग्रामर की पुस्तक भी समान रूप से उपयोगी हो सकती है। यह खंड परीक्षा की दृष्टि से सबसे कम समय लेने वाला होता है। इस खंड से समय बचाकर कठिन खंडों रीजनिंग व क्वांटेटिव एप्टीट्यूड में लगाना लाभकारी हो सकता है। क्वांटेटिव एप्टीट्यूड में अधिकांश प्रश्न अंकगणितीय सूत्रों से हल होने वाले होते हैं। इसमें संख्यात्मक गणनाओं, जैसे संख्यात्मक तर्क संगतता एवं आलेखों से निष्कर्ष निकालने से संबंधित प्रश्न होते हैं।
प्रत्येक प्रश्न को सावधानीपूर्वक पढकर उसका सही उत्तर देना चाहिए। इसके अलावा दशमलव, भिन्न, संख्या पद्धति, चक्रवृद्धि व साधारण ब्याज, प्रतिशत, लाभ और हानि, समय और दूरी से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। इस खंड की तैयारी के दौरान विशेष सूत्रों को याद करने तथा प्रश्नों को शॉर्टकट तरीके से हल करने में समय देना चाहिए। जहां सूत्रों की जानकारी से प्रश्नों का सर्वशुद्ध हल किया जा सकता है, वहीं शॉर्टकट तरीके से प्रश्नों को हल कर कम समय में अधिक से अधिक प्रश्नों को हल किया जा सकता है। बैंक परीक्षाओं के तर्कशक्ति परीक्षण वाले प्रश्नों का स्टैंडर्ड थोडा कठिन होता है। इसमें दो प्रकार के प्रश्न होते हैं- वर्बल और नॉन वर्बल। वर्बल से लगभग 25-35 प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि नॉन वर्बल से 15-25 प्रश्न पूछे जाते हैं। दोनों प्रकार के प्रश्नों में श्रृंखला, वर्गीकरण, सादृश्यता आदि से प्रश्न होते हैं। इसके अलावा शाब्दिक खंड से रक्त संबंधित प्रश्न, कथन व निष्कर्ष से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। इसके लिए बाजार में उपलब्ध किसी स्तरीय पुस्तक से अध्ययन करना लाभकारी हो सकता है। इस खंड के प्रश्नों की तैयारी के लिए नियमित प्रैक्टिस बहुत जरूरी है।
बनाएं अलग स्ट्रेटेजी
आप अपनी तैयारी को सामूहिक प्रैक्टिस के जरिए सरल बना सकते हैं। यदि आप दो-चार के ग्रुप में तैयारी कर रहे हैं, तो कम समय में कठिन और आसान प्रकार के खंडों की तैयारी की जा सकती है। सामूहिक अध्ययन से एक-दूसरे की खामियों का पता चलता है, जिससे परीक्षा हॉल में होने वाली गलतियों से बच सकते हैं। ग्रुप बनाते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि आपके सहयोगी अलग-अलग विषयों में दिलचस्पी रखने वाले या विशेषज्ञता हासिल करने वाले हों।
टाइम मैनेजमेंट
इसका महत्व न सिर्फ तैयारी में है, बल्कि परीक्षा हॉल में भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अभ्यास के दौरान अलग-अलग तरह के प्रश्नों के लिए एक समय सीमा निर्धारित करनी चाहिए। इससे परीक्षा में प्रश्न छूटने की आशंका कम होगी।
सुविधा के लिए तैयारी को कई चरणों में बांट लेना चाहिए। किस वक्त किस विषय को प्राथमिकता देनी चाहिए, यह खुद निर्धारित करें।
आधारभूत जानकारी के अलावा अधिकाधिक प्रश्नों को हल करने की प्रैक्टिस भी करनी चाहिए। इसके लिए निर्धारित समय सीमा में पूर्व परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करना अच्छा रहता है। इससे टाइमिंग भी सही होगी और परीक्षा के पैटर्न की भी जानकारी मिलेगी। इस दौरान हर प्रश्न की सही तकनीक और शॉर्टकट विधि ईजाद करनी चाहिए। 60 प्रतिशत प्रश्नों के पैटर्न पिछली परीक्षाओं से मिलते-जुलते होते हैं। अत: इससे परीक्षा में पूछे जाने वाले अधिकांश प्रश्नों के पैटर्न से वाकिफ हुआ जा सकता है। यदि आप लिखित परीक्षा में सफल होते हैं, तो आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। यदि बेहतर करने में सफल होते हैं, तो आपका प्रोबेशनरी क्लर्क के लिए चयन हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.unitedbankof india.com है।
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पॉवर ड्रेसिंग

पावर ड्रेसिंग का मतलब ऐसा ड्रेस अप है, जिससे आपकी छवि उस सफल कामकाजी व्यक्ति की बन सके जो आप हैं या आप वास्तव में होना चाहते हैं। आपमें जो सामर्थ्य है, जो शक्ति है, वह सली के से पहनी गई पोशाक में कहीं बेहतर ढंग से नजर आती है। उदाहरण के लिए, यदि आप मीटिंग के दौरान शालीन सूट में हैं तो आप तन कर खड़े होंगे, सामने वाले की आंखों से आंखें मिला कर बातें कर सकेंगे और हाथ मिलाने का आपका अंदाज भी दमदार होगा। चाहे नए जॉब की बात हो या पदोन्नति का मामला हो, उन लोगों के पहनावे का आकलन सूक्ष्मता से करें जो उस जॉब या उस पद पर पहले से हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड या कारोबारी जगत में आपके ड्रेस सेंस से बॉस को यह स्पष्ट होता है कि आप किसी जिम्मेदारी को संभालने के प्रति कितने तत्पर हैं। पहनावे से संबंधित निम्न बातों पर ध्यान देकर आप एक पावरफुल प्रोफेशनल के रूप में अपनी छवि बना सकते हैं।

-आप जो हैं, उसके अनुरूप पोशाकें न धारण करें, बल्कि आप जिस स्थिति में खुद को देखना चाहते हैं, उसके अनुसार खुद को तैयार करें। उन लोगों के ड्रेस सेंस को देखें जो अपने कैरियर के टॉप पर हैं और उनसे आइडिया लें। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि आप किसी की नकल करें, बल्कि पहनावे के उनके अंदाज से प्रेरित हों और उसको अपने ऑफिस ड्रेस का अंग बनाते हुए अपना व्यक्तिगत स्टाइल विकसित करें।
-जॉब ढूंढ़ते वक्त या साक्षात्कार के लिए जाते वक्त जो निर्धारित ड्रेस कोड है, वहीं पहनें, यानी बिजनेस फॉरमल। हां, यदि आप किसी क्रिएटिव जॉब केलिए जा रहे हैं तो कैजुअल आजमा सकते हैं। तब आपसे ऐसे पहनावे की अपेक्षा भी की जाती है। बिजनेस फॉरमल गहरे रंग का, जैसे ब्लैक, ग्रे, नेवी, ब्राउन आदि होना चाहिए।
-ड्रेस के साथ जरूरी एक्सेसरीज ही होनी चाहिए। घड़ी, पेन, ज्वेलरी, बैग आदि सभी चीजों में शालीनता झलकनी चाहिए। ज्यादा रंगीन और चमकदार एक्सेसरीज न हों। अपने फुटवियर पर खास ध्यान दें, जिसका आपके पहनावे से मेल खाना जरूरी है।
-बाल सामान्य और सलीके से संवरे होने चाहिए। नाखूनों की सफाई पर खास तौर पर ध्यान दें। आजकल बालों को रंगीन करने का चलन है, पर इंटरव्यू के दौरान इससे परहेज रखें।
-इंटरव्यू के लिए जाते वक्त कुछ भी ऐसा न पहनें, जिसमें आप असहज महसूस करें। जॉब की जरूरत का ध्यान रखते हुए वैसा पहनें जो आप पर सूट करता हो। कुल मिलाकर पावर ड्रेसिंग का तात्पर्य यह है कि इंटरव्यू के दौरान आप आत्मविश्वास से भरे नजर आएं। तभी सफलता आपके करीब आएगी।
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Thursday, August 26, 2010

दिमाग के दोनों हिस्से को कौन जोड़ता है

लंदन। वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझा लिया है कि क्यों मानव मस्तिष्क का बायां हिस्सा शरीर के दाएं हिस्से को और दायां हिस्सा बाएं हिस्से को कंट्रोल करता है? वैज्ञानिकों को इस रहस्य के बारे में उस समय पता चला जब वे ‘मिरर मूवमैंट’ डिसऑर्डर पर अध्ययन कर रहे थे।

मिरर मूवमैंट डिसऑर्डर ने शोधकर्ताओं को उस समय आश्चर्यचकित कर दिया जब उन्होंने देखा कि दिमाग का एक हिस्सा शरीर के एक ही हिस्से से संपर्क साध रहा है। कैनेडा के मॉन्ट्रियाल वश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजिस्ट गाई रॉल्यू ने कहा, ‘हमें ऐसा लगता है कि दिमाग हमारे शरीर के दोनों हिस्सों को जोड़ता है लेकिन ऐसा नहीं है।

यह अपने विपरीत तरफ के हिस्से को ही कंट्रोल कर पाता है।’ एम एम (मिरर मूवमैंट) डिसऑर्डर के आनुवांशिक आधार को समझने के लिए रॉल्यू और उनके सहयोगियों ने एक कनाडाई परिवार की कई पीढ़ियों के उन सदस्यों के जीनों का अध्ययन किया जिनके मिरर मूवमैंट समान थे। शोध में यह बात सामने आई कि जिन्हें एम एम डिसऑर्डर थे उनके जीन कुछ अलग थे, जिसे डीसीसी कहते हैं।

शोधकर्ताओं ने जब इस डीसीसी जीन को एक ईरानी परिवार के सदस्यों से मिलाया तो उनके डीसीसी जीन कैनेडाई परिवार से अलग निकले, लेकिन वे भी एम एम डिसऑर्डर से पीड़ित थे। शोधकर्ताआंे ने डीसीसी जीन को उन लोगों के भी जीन से मिला कर देखा, जिन्हें मिरर मूवमैंट डिऑर्डर नहीं था, लेकिन नतीजा अलग निकला।

अंत में शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि शरीर के मध्य हिस्से में कोएक्स तंत्रिका कोशिकाओं के विकास के लिए डीसीसी प्रोटीन की आवश्यकता होती है, इसलिए बायां दिमाग शरीर के दाएं हिस्से को और दायां बाएं हिस्से को कंट्रोल करता है। इसके अलावा जिन लोगों में डीसीसी काम करता है उनमें कुछ तंत्रिका कोशिकाएं दिमाग द्वारा भेजे गए मैसेज को पूरे शरीर में भेजता है।
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सॉफ्टवेयर बताए चेहरे का राज

लंदन. इंटरनेट पर और सोशल नेटवर्किग साइट्स में दर्ज लाखों फोटो में से आप अपनों को तलाश कर सकेंगे। सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी फेसडॉटकॉम ने इसके लिए एक खास तरह का सॉफ्टवेयर विकसित किया है।

यह नेट पर पोस्ट की गई तस्वीर को एल्गोरिथ्म में बदल देता है। यदि आप अपने किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित की तलाश कर रहे हों तो आपको उसका फोटो फेसबुक या गूगल पर डालना होगा। एप्लीकेशन का 5000 से अधिक वेबडेवलपर्स इस्तेमाल कर रहे हैं।

वेबसाइट का दावा है कि 90 फीसदी सटीक जानकारी देने वाला यह सॉफ्टवेयर यह बता सकता है कि आपने जिसकी फोटो पोस्ट की है, वह कहां पर है।
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क्या एप्पल से बेहतर आईपैड बना रहा है गूगल

यदि आपका मानना है कि टैबलेट्स आईपैड की जंग में एप्पल का आईपैड सबसे आगे है तो आप एक बार फिर से इस पर विचार कीजिए, क्योंकि गूगल इससे भी बेहतर टैबलेट बना रहा है। यही नहीं, इसने हाल में टोरंटो स्थित स्टार्टअप बंपटॉप को भी खरीदा है, जो थ्री डी मल्टीटच टेकAोलॉजी का महारथी है।इस नई तकनीक के जरिये गूगल आईपैड के यूजर्स को प्रोग्राम्स और फाइल्स चुनने की भी सुविधा होगी।

इस नए अवतार से मल्टीटच के यूजर्स परंपरागत टू डी से थ्री डी की ओर रुख करने लगेंगे। पिछले महीने गूगल के टैबलेट से जुडी खबरें इंटरनेट पर आयी थीं। न्यूयार्क टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक गूगल टैबलेट पर किताबें, पत्रिकाएं और दूसरे कंटेंट मुहैया कराने को लेकर कुछ प्रकाशकों के संपर्क में हैं।

एक अन्य मीडिया ग्रुप ने गूगल की नई खरीदारी से जुडी रिपोर्ट में कहा कि इस पर गूगल को 40 मिलियन डॉलर खर्च करने होंगे और इस तकनीक को हासिल करने के बाद यह कंपनी उन्नत किस्म का टैबलेट बनाने में कामयाब हो सकेगी।एप्पल का आईपैड बाजार में आने के बाद कई कंपनियां इससे बेहतर टैबलेट बनाने में जुट गयीं।

जनवरी में एचपी ने अपना टैबलेट लांच किया, जो जल्द ही ग्राहकों के लिए उपलब्ध होगी। फरवरी में अमेजन ने एक टच स्क्रीन कंपनी खरीदी तो अफवाहें उड़ीं कि यह कंपनी एप्पल को टक्कर देने के लिए आईपॉड तैयार कर रही है। नियोफोनी ने भी वीपैड नाम से एक टैबलेट कम्प्यूटर तैयार किया था जो यूरोप में प्रकाशकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो रहा है। माइक्रोसॉफ्ट भी एक टैबलेट डिवाइस पर काम कर रहा था लेकिन इसने हाल में इस प्रोजेक्ट को रद करने की घोषणा की है।
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अब कंप्यूटर पढ़ लेगा आपका मन

लंदन. कल्पना कीजिए कि आपके कम्प्यूटर मानिटर पर वह वेबसाइट अपने आप खुल जाए जिसे आप खोलना चाहते हैं । जल्द ही आपकी कल्पनाओं को हकीकत के पर लगने वाले हैं,क्योंकि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे कम्प्यूटर का विकास करने का दावा किया है जो मानव मस्तिष्क को पढ़ सकेगा।

इंटेल कारपोरेशन में कार्यरत एक समूह एक ऐसी नयी प्रौद्योगिकी पर काम कर रहा है जो आपकी दिमागी सोच को पढ़ सकेगा । यह दिमाग से नियंत्रित होने वाले उस मौजूदा कम्प्यूटर से विपरीत होगा जिसमें स्क्रीन पर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक हरकत की दरकार होती है ।

द टेलीग्राफ के अनुसार वास्तव में वैज्ञानिक,दिमाग में होने वाली हलचल से संबंधित गतिविधियों के नक्शे को लेकर शब्दों के ऐसे ताने बाने बुनने की कवायद में जुटे हैं जो आपकी उस दिमागी हलचल से मेल खाए जिसका प्रयोग कम्प्यूटर पर होता है ।

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि कम्प्यूटर समान मस्तिष्क पैटर्न से संबंधित शब्दों के अनुसार काम कर सकेंगे ।

इंटेल की प्रयोगशालाओं से जुड़े एक वरिष्ट शोधकर्ता डीन पोमेरलियाउ ने बताया कि मौजूदा समय में अस्पतालों में प्रयोग होने वाले मैगेनेटिक रेजोनेंस स्कैनर जेसे उपकरण की जरूरत है दिमागी गतिविधियों से जुड़े पर्याप्त विवरण को ग्रहण कर सके ।
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Wednesday, August 25, 2010

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना

कंप्यूटर ग्राफिक्स का है ज़माना


आज हर घर में अपनी जगह बना चुका कंप्यूटर शायद इतना उपयोगी और लोकप्रिय नहीं हो पाता यदि कंप्यूटर ग्राफिक्स की दुनिया में इतने सारे नए प्रयोग देखने को नहीं मिले होते। यह टॉपिक कंप्यूटर कोर्सेज का भी एक अहम हिस्सा होता है और करियर के लिहाज़ से भी यह हॉट च्वॉइस रहता है।

एक से बढ़ कर एक कंप्यूटर गेम्स के रोमांच का मज़ा लेने से लेकर कंप्यूटर पर एनिमेटेड मूवीज़ का लुत्फ उठाना इतना मज़ेदार और आसान नहीं होता यदि ग्राफिक्स में दिन प्रतिदिन नई हलचलें नहीं मचती। आजकल सभी सॉफ्टवेयर जीयूआई आधारित होते हैं जिस कारण इन्हें उपयोग करना काफी आसान हो जाता है। इंटरफेस के रूप में यहां मेन्यू, आइकॉन आदि का उपयोग किया जाता है, जो काफी सुविधाजनक और फास्ट होता है। वास्तव में यह सब ग्राफिक्स का ही तो खेल होता है।

कंप्यूटर के द्वारा बनाए जाने वाले ग्राफिक्स कंप्यूटर ग्राफिक्स कहलाते हैं। इसे इस प्रकार से भी कहा जा सकता है कि कंप्यूटर द्वारा इमेज डाटा को जब रिप्रजेंट और मैनिपुलेट किया जाए तो उसे ग्राफिक्स कहते हैं। एनिमेशन, मूवीज़, गेम्स इंडस्ट्रीज़ आदि में इसका खूब प्रभाव पड़ा है। कंप्यूटर द्वारा जब डाटा का पिक्टोरियल रिप्रेजंटेशन और मैनिपुलेशन किया जाता है तो उसे हम ग्राफिक्स कह सकते हैं। कंप्यूटर ग्राफिक्स कंप्यूटर साइंस का एक फील्ड है, जिसके अंतर्गत हम विजुअल कंटेंट को मेनिपुलेट और डिजिटली सिनथेसाइजिंग करने के विधि के बारे में पढ़ते हैं।

एनिमेशन भी कंप्यूटर ग्राफिक्स के अंतर्गत ही आता है। एनिमेशन वास्तव में कंप्यूटर की सहायता से मूविंग इमेज (चलती-फिरती पिक्चर) बनाने की कला है। आपको राज़ की बात बताते हैं कि जब भी आप ऐसे एनिमेटिड इमेज देखें तो यह मत सोचिए कि वास्तव में यह चलती फिरती इमेज है। दरअसल होता यह है कि जब स्क्रीन पर कोई इमेज दिखती है तो बहुत जल्द उसी तरह की दूसरी इमेज पहले वाले इमेज को रिप्लेस करती रहती है। यह प्रक्रिया इतनी तेज़ी से होती है कि हम समझ बैठते हैं कि इमेज मूवमेंट कर रही है, जबकि वास्तव में एक इमेज दूसरे इमेज को इसके थोड़े आगे-आगे रिप्लेस करती रहती है।

एप्लीकेशन एरिया
एजुकेशन, साइमुलेशन, ग्राफ रिप्रेजंटेशन, इंजीनियरिंग, मेडिसिन, इंडस्ट्री, आर्ट, एंटरटेनमेंट आदि सभी क्षेत्रों में कंप्यूटर ग्राफिक्स का बोलबाला है। कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन द्वारा इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर में ग्राफिक्स का खुब इस्तेमाल किया जाता है। फाइन आर्ट, कमर्शियल आर्ट एप्लीकेशंस में भी इसका उपयोग किया जाता है। टेलीविज़न शोज़, म्यूज़िक वीडियो, मोशन पिक्चर्स आदि में भी ग्राफिक्स का ही कमला रहता है।
ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर :
 ग्राफिक्स के लिए उपलब्ध सॉफ्टवेयर को आमतौर पर दो भागों में रखा जाता है-जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज और स्पेशल परपज एप्लीकेशंस पैकेज। जनरल प्रोग्रामिंग पैकेज सॉफ्टवेयर में कई ग्राफिक्स फंक्शंस होते हैं, जो हाई-लेवल प्रोग्रामिंग लैंग्वेजों में उपयोग किए जाते हैं। इन फंक्शंस द्वारा पिक्चर कंपोनेंट्स डिज़ाइन किए जाते हैं। स्पेशल एप्लीकेशंस पैकेज आमतौर पर उनके लिए हैं, जो कंप्यूटर एक्सपर्ट तो नहीं होते, फिर भी डिस्प्ले जेनरेट कर सकते हैं। 3D Max. Aladdom 4 D,Cinema 4D, Maya, Modo आदि ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर्स हैं।
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एमएस ऑफिस 2010, ग्रुप में काम करने की सुविधा

हमारे कंप्यूटर में जितने भी सॉफ्टवेयर्स और एप्लीकेशंस होते हैं, उनमें एमएस ऑफिस का अहम स्थान होता है। यह एक ऐसा पैकेज है, जिसकी सहायता से रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले लगभग अधिकतर काम जैसे डॉक्युमेंट्स बनाना, प्रेजेंटेशन तैयार करना, हिसाब-किताब लिखने से लेकर डाटाबेस मेंटेन करने तक सभी काम किए जा सकते हैं। यदि हम कहें कि एक आम कंप्यूटर यूजर अपने कंप्यूटर पर सबसे अधिक एमएस ऑफिस का ही उपयोग करता है तो शायद यह कहना गलत नहीं होगा। तभी तो यह पैकेज अधिकांश कंप्यूटर का सिरमौर बना बैठा है। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा डेवलप एमएस ऑफिस के कई वजर्न आ चुके हैं जैसे ऑफिस 2005, ऑफिस 2007 आदि।
हर एक नया वजर्न नई रंगत में हमारे सामने नए फीचर्स का पिटारा लेकर आता है, जो हमारे काम को और भी आसान बना देता है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एमएस ऑफिस का नया वजर्न 2010 हमारे बीच उपलब्ध है। चलिए, आज आप से इसी ऑफिस पैकेज की जानकारी सांझा करते हैं और देखते हैं कि क्या-क्या खास है इसमें हमारे लिए।
एमएस ऑफिस 2010 माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विंडोज के लिए लेटेस्ट प्रोडक्टिविटी सूट है, जिसमें कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं। इसका यूजर इंटरफेस यूजर्स की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए काफी आकर्षक बनाया गया है। ऑफिस 2007 का रिबन इंटरफेस वर्ड, एक्सेल और पावर-प्वॉइंट में विजिबल होता था। ऑफिस 2010 में इसका दायरा बढ़ा कर इसे आउटलुक, विजिओ, वन नोट में भी शामिल किया गया है।
रिसर्च, डेवलपमेंट, सेल्स, ह्यूमन रिसोर्सेज जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रोफेशनलों के लिए इसे काफी उपयोगी बनाया गया है। ऑफिस 2010 प्रोफेशनल एडिशन के अंतर्गत एमएस वर्ड 2010, एक्सेल 2010, पावर प्वॉइंट 2010, एसेस 2010, आउटलुक 2010, पब्लिशर 2010 आदि को शामिल किया गया है।
रिबन इंटरफेस, बैकसाउंड रिमूवल टूल, लेटर स्टाइलिंग, स्मार्ट आर्ट टेम्पलेट, स्क्रीन कैप्चरिंग और क्लिपिंग टूल्स आदि कई नए फीचर्स आपको यहां मिलेंगे। ऑफिस 2010 में एक फीचर जोड़ा गया है, जिसे सोशल कनेक्टर नाम दिया गया है। इसकी सहायता से ई-मेल से संबंधित काम को आसान और ज्यादा प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इतना ही नहीं, इस फीचर की सहायता से फ्रेंड्स रिक्वेस्ट भेजना और एप्वॉइंटमेंट्स को मैनेज करना और भी आसान हो गया है।
ऑफिस 2010 में आप अपने टेक्स्ट, फोटो, वीडियो को काफी आकर्षक बना सकते हैं। इसमें कई नये पिक्चर-ए़डिटिंग इफेक्ट्स जैसे वॉटरकलर, सैचुरेशन, ट्रिमिंग आदि का उपयोग कर अपने डिजाइन को एक नया प्रोफेशनल लुक दे सकते हैं।
यदि एक्सेल 2010 की बात करें तो इसमें डाटा एनालिसिस और विजुलाइजेशन फीचर है, जो आपको डाटा ट्रेंड्स को ट्रैकिंग करने में काफी सहायता करेगा। वहीं पावर-प्वॉइंट 2010 में आप अपने प्रेजेंटेशन स्लाइड्स में वीडियो को भी शामिल कर अपनी प्रेजेंटेशन को और भी प्रभावी बना सकते हैं।
ऑफिस 2010 आपको कई विभिन्न लोकेशंस और डिवाइसेज से अपने सिस्टम से जुड़ने की स्वतंत्रता देता है। कभी-कभी ऐसा होता है कि एक ही फाइल पर कई लोगों को काम करना पड़ता है। भले ही आप में से कई लोग, जो एक ही फाइल पर काम करना चाहते हैं, विभिन्न जगहों पर रहते हैं तो इस पैकेज में आप ऐसा कर सकते हैं। किसी काम को ग्रुप में करने पर यह सुविधा काफी उपयोगी है।
ई-मेल और इन बॉक्स से संबंधित काम को भी आउटलुक 2010 में काफी आसान बनाया गया है। यहां एक साथ आप कई कमांड को एग्जिक्यूट कर अपना समय बचा सकते हैं। साथ ही इनबॉक्स को भी काफी आसानी से बेहतर ढंग से ऑर्गेनाइज कर सकते हैं।
सिस्टम रिक्वॉयरमेंट
यदि आप अपने कंप्यूटर में भी ऑफिस 2010 इंस्टॉल करना चाहते हैं तो इसके लिए आप यह सुनिश्चित कर लें कि आपका सिस्टम इसके लिए तैयार है भी या नहीं। यहां कुछ रिक्वॉयरमेंट दिए जा रहे हैं, जो आपके कंप्यूटर के लिए जरूरी हैं-
प्रोसेसर :  500 MHZ
मेमरी (रैम) : 256 MB
हार्ड डिस्क : 3 GB
डिस्प्ले : 1024X576
सबसे अच्छी बात यह है कि यदि आपके सिस्टम में पहले से ऑफिस 2007 इंस्टॉल है और आप इसे ऑफिस 2010 से अपग्रेड करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने सिस्टम के हार्डवेयर में कोई परिवर्तन नहीं करना होगा। अगर आप एमएस ऑफिस 2010 से संबंधित अन्य तमाम जानकारियों से अवगत होना चाहते हैं तो आप माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट www.microsoft.com पर लॉगिन कर सकते हैं।
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बिंग: सर्च इंजन, आज का इंफॉर्मेशन बैंक

इंटरनेट आज की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। तमाम सूचनाओं का भंडार यहां उपलब्ध है, लेकिन ये सूचनाएं हम तक पहुंचती हैं सर्च इंजन के माध्यम से। वैसे तो इंटरनेट पर अनेक सर्च इंजन मौजूद हैं। गूगल इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, पर पिछले दिनों माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपना सर्च इंजन ‘बिंग’ लॉन्च किया है। यहां इसी की विशेषताओं को कंप्यूटर यूजर्स के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस हाइटेक युग में यदि हमें किसी भी विषय से संबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो हमारे सामने इंटरनेट की तस्वीर उभरती है और इस काम के लिए इंटरनेट पर हमारा पड़ाव होता है सर्च इंजन। इंटरनेट यानी आधुनिक इंफॉर्मेशन बैंक, जो सूचनाओं का खजाना है, जहां सर्च इंजन की मदद से हम जरूरत की जानकारियां ढूंढ़ निकालते हैं। इंटरनेट पर अनेक सर्च इंजन मौजूद हैं, जिनमें गूगल प्रमुख है और इसकी बादशाहत आज भी कायम है।
लगभग एक साल पहले जानी-मानी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपना नया सर्च इंजन लॉन्च किया था, जिसे ‘बिंग’ नाम दिया गया। अब यह तो समय ही बताएगा कि गूगल की बादशाहत को बिंग किस हद तक प्रभावित करेगा, लेकिन इतना तो जरूर है कि कंप्यूटर्स यूजर को बिंग के रूप में एक नए सर्च इंजन को यूज करने का मौका मिल गया है।
बिंग में ऐसे कई फीचर्स हैं, जो इसे लोकप्रिय बनाने में मदद कर रहे हैं। जब आप अपने ब्राउजर में www.bing.com टाइप करेंगे तो एक आकर्षक वेबपेज खुल कर सामने आता है। आप जिस किसी लैंग्वेज में सर्च करना चाहते हैं, उसे सेलेक्ट कर सकते हैं। यहां हिंदी समेत तमाम अन्य भाषाओं की सूची उपलब्ध है।
इस सर्च इंजन पर यदि आप इमेज सर्च करना चाहें तो इमेज ऑप्शन को क्लिक करें, फिर सर्च बॉक्स में जिस टॉपिक से संबंधित इमेज सर्च करना चाह रहे हैं, उसे टाइप करें। यहां इमेज सर्च की एक प्रमुख खासियत यह है कि जब आप कोई इमेज सर्च करेंगे तो जितने भी रिजल्ट आएंगे, उन्हें देखने के लिए आपको बस स्क्रॉल [scroll] करने की जरूरत है और सारा रिजल्ट स्क्रीन पर नजर आता रहेगा। कहने का मतलब है कि यहां आपको बार-बार Next बटन पर क्लिक करने की कोई जरूरत नहीं रह जाती। इसी तरह वीडियो लिंक को क्लिक कर वीडियो सर्च की जा सकती है। यहां आप वीडियो की लैंथ, स्क्रीन टाइप, रिजोल्यूशन आदि भी सेट कर सकते हैं। यही नहीं, मजेदार बात तो यह है कि आप किसी ऑरिजनल वीडियो का शॉर्ट प्रीव्यू भी तुरंत देख सकते हैं, जो आपको उस वीडियो के बारे में निर्णय लेने में सहायता करेगा।
यदि आप किसी भी टॉपिक से संबंधित लेटेस्ट न्यूज पढ़ना चाहते हैं तो बस न्यूज लिंक को क्लिक करने भर की देर है।
आप कैलकुलेशन करना चाहते हैं? जी हां, बिंग आपको कैलकुलेशन की सुविधा भी देता है। जैसे आप यदि सर्च बॉक्स में 2x15xpi टाइप करेंगे तो यह सर्च इंजन इस एक्सप्रेशन का रिजल्ट तुरंत आपके स्क्रीन पर दिखा देगा। है न वाकई मजेदार फीचर। आप यहां कैलकुलेशन के लिए मैथ्स ऑपरेटर और फंक्शन का भी प्रयोग कर सकते हैं।
स्पोर्ट्स में रुचि रखने वालों के लिए भी यहां विशेष सुविधा है। यहां आप सीधे किसी दिन या लीग का स्कोर देख सकते हैं।
यदि आप सर्च बॉक्स में किसी मूवी का टाइटल एंटर करेंगे तो बिंग उन सभी थियेटर्स की लिस्ट प्रोवाइड कर देगा, जहां वह मूवी लगी होगी और वे आपके एरिया में हों। इसके लिए आप अपने शहर का नाम भी एंटर कर सकते हैं। बिंग ट्रांसलेटर की मदद से आप किसी टेक्स्ट या पूरे वेबपेज को विभिन्न भाषाओं में ट्रांसलेट कर सकते हैं।
यदि आप किसी क्षेत्र विशेष की होटल्स की जानकारी चाहते हैं तो यहां सर्च बॉक्स में होटल टाइप करें। साथ में उस जगह या शहर का नाम दें, आपको होटल्स की लिस्ट मैप्स के साथ देखने को मिल जाएगी। इसके अलावा भी इस सर्च इंजन में आप कई अन्य खासियत पाएंगे।
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डुएल कोर्स डबल सावधानी

इन दिनों डुएल कोर्स की महत्ता बढ रही है। यही कारण है कि इससे संबंधित कोर्स युवाओं में काफी हॉट हो रहे हैं। यदि आपकी इच्छा भी डुएल कोर्स में एडमिशन लेने की है, तो आपके लिए बहुत सारे कोर्स हैं, जिन्हें आप अपनी रुचि के अनुरूप चुन सकते हैं, लेकिन कोर्स का चयन करने से पहले इससे संबंधित सारी जानकारी एकत्रित कर लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
डुएल कोर्स

इसके तहत एक ही समयावधि में छात्र एक ही विश्वविद्यालय से दो कोर्स की डिग्री महज एक वर्ष या अधिक समय में प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के कोर्स में अमूमन एक परंपरागत कोर्स पर आधारित और दूसरा प्रोफेशनल या वोकेशनल डिग्री से जुडा कोर्स होता है। कुछ चुनिंदा और पॉपुलर कोर्स बीई प्लस एमबीए, बीटेक प्लस एमटेक, कम्प्यूटर साइंस प्लस एमटेक, बीबीए प्लस एलएलबी, बीकॉम प्लस एलएलबी, एमबीए प्लस सीएए आदि कोर्स हैं। यदि आप इस तरह के कोर्स करना चाहते हैं, तो इससे संबंधित कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें।
रुचि का रखें ध्यान
किसी भी कोर्स को पूरा करने से पहले अपनी क्षमता का मूल्यांकन खुद ही करें। ऐसा देखा गया है कि अभ्यर्थी कोर्स का चयन बिना अपनी क्षमता को पहचाने ही कर लेते हैं और बाद में उसे पूरा न कर पाने की वजह से आर्थिक और मानसिक हानि उठाते हैं। एक्सप‌र्ट्स के अनुसार, किसी भी कोर्स का चयन आप अपनी मानसिक और आर्थिक क्षमता के मुताबिक ही करें। इसके साथ ही यह कोशिश भी करें कि कोर्स आपकी रुचि और एकेडमिक कोर्सेज से मेल खाता हो।
न आएं झांसे में
इस तरह के कोर्स बहुत सारे फर्जी संस्थान भी चलाते हैं, इसलिए आप इनके झांसे में कभी भी न आएं। आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप सबसे पहले संस्थान की असलियत का पता कर लें कि यह मान्यताप्राप्त है या नहीं! यदि किसी विश्वविद्यालय या संस्थान से एफिलिएटेड हो, तो उस संस्थान की वेबसाइट से इसकी जांच कर सकते हैं। यदि उस संस्थान से सीनियर स्टूडेंट आपके आस-पास मिल जाए, तो वह आपको इसकी असलियत के बारे में बेहतर ढंग से बता सकता है।
इन डिमांड हो कोर्स
डुएल कोर्स का चयन करने से पहले यह सोचें कि जो कोर्स आपने चुना है, वह आपको आगे बढाने में कितना सहायक होगा! उसकी बाजार में क्या डिमांड है और भविष्य में आगे बढने का कितना स्कोप है! यदि इस तरह की सोच के साथ आप कोर्स का चयन करते हैं, तो आपको इसका दोहरा लाभ भी मिलेगा।
कोर्स कॉम्बिनेशन है अहम
इस कोर्स के चयन में कॉम्बिनेशन का अहम रोल होता है। इसके लिए सबसे बेहतर विकल्प यही है कि आप अपनी रुचि, क्षमता और बजट के अनुरूप कुछ विषयों में पढाई करने का निर्णय लें और उस विषय के साथ किस तरह के वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्स हो सकते हैं, उसकी एक लिस्ट भी बनाएं। उस लिस्ट में से जो कोर्स आपकी जरूरतों पर सटीक बैठता है, उसका चयन करें। दरअसल, ऐसा करने का फायदा यह होगा कि आप बेहतर कोर्स का चयन आसानी से कर सकेंगे।
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Tuesday, August 24, 2010

भारतीय महिला का कमाल, अनपढ़ भी चला सकेंगे कंप्यूटर

माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च इंडिया की एक असोसिएट रिसर्चर ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 41 साल की इंद्राणी मेधी ने टेक्स्ट यूजर इंटरफेस डिवेलप किया है, जिससे अब अनपढ़ भी कंप्यूटर का इस्तेमाल कर सकेंगे। कंप्यूटर का इस्तेमाल करने के लिए दूसरों के सहयोग की बहुत कम या बिल्कुल ही नहीं जरूरत पड़ेगी।
                 इंद्राणी ने बताया कि फिलीपीन और साउथ अफ्रीका के कम इनकम और कम साक्षरता वाले समुदाय के 400 से ज्यादा विषयों से जुड़ी डिजाइन प्रक्रिया के जरिए मैंने पाया कि मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर पारंपरिक टेक्स्ट आधारित यूजर इंटरफेस (यूआई) के साथ काम करने में लोगों को काफी मुश्कल होती है। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आम अक्षमता के अलावा नेविगेशन की दिक्कत भी एक बड़ी चुनौती है।
                    इंद्राणी ने निम्न साक्षरता वाले यूजर्स के लिए टेक्स्ट रहित यूआई डिजाइन डिवेलप किया है। इसमें आवाज, विडियो और ग्राफिक्स का उपयोग होता है।
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इंटरनेट की चौपाल में करियर की खोज

ऑर्कुट और फेसबुक ने इंटरनेट पर दोस्तों की महफिल जुटाने का जो ट्रेंड शुरू किया था, वह अब और स्मार्ट हो गया है। सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में खुला है एक नया दरवाजा, जो यूजर्स को उनकी अपनी प्रफेशनल फील्ड के लोगों से जुड़ने का मौका दिलाता है। वेब वर्ल्ड में अब ऐसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स आ रही हैं, जो पूरी तरह प्रफेशनल्स के लिए हैं, जहां लोग नौकरी में आगे बढ़ने और नए मौके खोजने के लिए एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। यहां आप आपस में अपने फैमिली फोटो एलबम नहीं बल्कि सीवी शेयर करते हैं। यहां टेस्टिमोनियल इस बारे में नहीं लिखे जाते कि आप कितने अच्छे इंसान हैं, बल्कि इस बारे में कि आप कितने बेहतरीन एंप्लॉयी हैं।

सबसे पहले आपको एक ऐसे नेटवर्क से रूबरू कराते हैं, जो सिर्फ नेटवर्किंग की दुनिया के लोगों के लिए बना है। नेटवर्किंग में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सिस्को ने मंगलवार को इसे ग्लोबली लॉन्च किया। इसका मकसद कंप्यूटरों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले प्रफेशनल्स को एक ऐसी चौपाल मुहैया कराना है, जहां वे अपने फील्ड से जुड़ी समस्याएं, उपलब्धियां और रोज के अनुभव शेयर कर सकें। यहां (cisco.com/go/learnnetspace) उन्हें ऐसा फोरम भी मिलता है, जिस पर वे प्रोग्रामिंग से जुड़े किसी भी पॉइंट पर दुनिया के दूसरे कोने पर बैठे एक्सपर्ट से सलाह ले सकते हैं, जिसे वे शायद जानते भी नहीं हों। सिस्को डाइरेक्टर (ग्लोबल मार्केटिंग डिवेलपमेंट) मिलिंद गुर्जर ने बताया कि इसमें एक्सपर्ट की सलाह और विडियो ऑन डिमांड जैसे फीचर भी दिए जाएंगे। हालांकि सिस्को इसे प्रफेशनल्स की ही कम्युनिटी साइट मान रही है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नेटवर्किंग की कंपनियां अच्छे प्रफेशनल्स की तलाश में इसे खंगालती नजर आएं। दुनिया भर में 2012 तक नेटवर्किंग के 12 लाख लोगों की कमी पड़ना तो पहले से तय है।

इसी तरह sermo.com ऐसी कम्युनिटी साइट है, जो सिर्फ डॉक्टरों के लिए है, करीब 65,000 फिजिशियन इसके मेंबर हैं। वायरलेस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का ऑन लाइन अड्डा inmobile.org पर जमता है। इन नेटवर्किंग साइट में प्रफेशनल अपने पेशे से जुड़ी रोजमर्रा की बातें आराम से शेयर कर सकते हैं। फेसबुक भी अब पूरी तरह प्रफेशनल कम्युनिटी साइट लाने जा रही है।

करियर फ्रेंडली नेटर्किंग साइट के तौर पर लिंक्डइन (linkedin) का भी जलवा तेजी से बढ़ रहा है। यह भी प्रफेशनल नेटवर्किंग की साइट है, जिससे दुनिया भर में 150 तरह की इंडस्ट्री के दो करोड़ से भी ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इस साइट की मार्केट वैल्यू एक अरब डॉलर आंकी गई है। लिंक्डइन की खूबी यह है कि इसमें आप अपना पूरी सीवी (बायोडेटा) पोस्ट सकते हैं, जिसमें मौजूदा नौकरी के अलावा पहले के वर्क एक्सपीरिएंस का भी डिटेल में ब्यौरा दिया जा सकता है। लिंक्डइन के सीईओ डैन नाय बताते हैं कि बढ़ती पॉपुलैरिटी के बावजूद वे इसमें ऑर्कुट की तरह फोटो एलबम या विडियो जैसे फीचर नहीं देंगे। इसमें लोग एक-दूसरे के करीब, एक ही शहर या स्कूल से होने के कारण नहीं, बल्कि कंपन और इंडस्ट्री में साझा इंटरेस्ट के बूते आते हैं। अपने फील्ड के लोगों तक पहुंचने का यह एकदम अनऑफिशियल तरीका है जो कई बार क्लिक कर जाता है।
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इंटरनेट की तस्वीर से किसी शख्स को पहचान लेगा सॉफ्टवेयर

लंदन।। जल्द ही एक ऐसा सॉफ्टवेयर आने वाला है, जो इंटरनेट पर लोगों की तस्वीर से उन्हें पहचान सकेगा। इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि


वह एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे इंटरनेट की हर तस्वीर को एक नाम मिल सकेगा।
face.com नाम की इस वेबसाइट का कहना है कि इस सॉफ्टवेयर से लोगों को सोशल नेटवर्किंग साइट और ऑनलाइन गैलरियों में व्यक्तियों की तस्वीरें पहचानने में मदद मिलेगी।
'द डेली मेल' की खबर में बताया गया कि इसके डिवेलपर्स का कहना है कि सॉफ्टवेयर हर चेहरे की अल्गोरिदम तैयार करेगा, जिसमें आंखों, नाक और मुंह की माप ली जाएगी।
कंपनी का दावा है कि सोशल नेटवर्किंग साइट से तस्वीरों को स्कैन करते वक्त यह सॉफ्टवेयर 90 फीसदी तक सही रहता है।
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एथिकल हैकिंग का बादशाह

9/11 की घटना के बाद अलकायदा की ओर से भेजे गए एक गुप्त कोड को तोडकर उसे समझने वाला केवल एक शख्स था। एथिकल हैकर अंकित फडिया
 केवल सोलह साल की उम्र में अंकित फडिया ने कोडेड संदेश को तोडकर दिखा दिया कि हिंदुस्तानी भी कहीं कम नहीं है। उसके बाद से हर बडी आतंकी घटनाएं होने पर साइबर स्थिति को समझने के लिए अंकित को याद किया जाता है। अंकित ने आतंकवाद और साइबर अपराध से जुडी कई समस्याओं को सुलझाया है।

 साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट अंकित खुद को एक एथिकल हैकर कहलाना पसंद करते हैं। अंकित इन दिनों कंप्यूटर सिक्योरिटी से जुडी एक कंपनी के निजी सलाहकार हैं। अंकित ने व्यापक रूप में साइबर अपराध और आतंकवादी गतिविधियों की पोल खोलने के जो कार्य किए हैं, वे खासे सराहनीय हंै। 24 वर्षीय अंकित की स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुई। बाद में इन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया।

 माता पिता से उपहार में प्राप्त कंप्यूटर पर अंकित ने स्कूल के दौरान ही हैकिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए थे। जल्द ही वे इसके विशेषज्ञ बन गए। महज तेरह साल की उम्र में अंकित ने एक मैगजीन की वेबसाइट को हैक कर लिया। शायद उन्हें इस काम के लिए जेल जाना पडता, लेकिन मैगजीन के संपादक को उन्होंने ई मेल करके बताया की उनकी वेबसाइट कितनी असुरक्षित है और इसकी सुरक्षा के लिए कैसे कदम उठाने चाहिए। यह उनके जीवन की पहली हैकिंग थी।

 अंकित ने पिछले तीन वर्षो में लगभग बीस हजार लोगों को एथिकल हैकिंग की ट्रेनिंग दी है। यही नहीं इन्होंने 'हैकिंग ट्रूथ' के नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की है, जिसे एफबीआई ने दुनिया की दूसरी सबसे बेहतरीन वेबसाइट माना है। हैकिंग पर अंकित ने अब तक तेरह किताबें लिखी है। चौदह वर्ष की आयु में लिखी 'द अनऑफिशियल गाइड टू एथिकल हैकिंग' की दुनिया में तीन लाख प्रतियां बिकी।

 इस बेस्ट सेलर बुक का ग्यारह भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। वे 25 से ज्यादा देशों में लगभग1000 सेमीनार में हिस्सा ले चुके हैं। लगभग तीस से भी ज्यादा अवार्ड इनके खाते में है। इन सब के साथ फडिया एक स्कूल भी चलाते हंै जो हैकिंग रोकने की ट्रेनिंग भी देता है। कह सकते हैं कि जब दुनिया इलेक्ट्रोनिक संग्राम में प्रवेश कर चुकी है तब अंकित फडिया जैसे टेक्नोसेवी युवा देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
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जानिए बेहतर करियर विकल्प

12वीं पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए विषय का चुनाव जीवन का सबसे महत्तवपूर्ण फैसला है। हमें अपने करियर की दिशा तय करते हुए अपने उज्जवल भविष्य का आधार रखना होता है। जहां हजारों राहें बाहें फैलाकर हमारा स्वागत कर रही हों वहां हमें सबसे सही राह चुननी होती है।


वैसे तो यह फैसला कठिन है लेकिन अगर आपके पास सही जानकारी है और आप अपने मन की सुनते हुए अपने लिए नई दिशा चुनते हैं तो यह फैसला काफी आसान हो जाता है।
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सपने के बीज को मिले सही जमीन

हर माली जानता है कि बीज बोने से पहले जमीन को जितनी अच्छी तरह से तैयार किया जाएगा, बीज उतने ही अच्छे उगेंगे। जिस तरह जमीन पौधे के लिए होती है, उसी तरह आपके मस्तिष्क में सपने का बीज प्रत्यारोपित होता है। सपने के बीज को स्वीकार करने के लिए आपका मस्तिष्क जितनी अच्छी तरह से तैयार होगा, आपके सपने की जड़ें उतनी ही अच्छी तरह जमेंगी। सपने के लिए तैयार मस्तिष्क उसे स्वीकार कर साकार रूप देने के लिए सतत प्रयत्नशील रहता है
    आपको अपने मस्तिष्क की शक्ति पर भरोसा होना चाहिए। आपका मस्तिष्क जहां आप अपने सपने को बोते और पालते हैं, अनूठा है। पूरी सृष्टि में ऐसा कोई नहीं है जो आपकी तरह दिखता, बोलता, चलता और सोचता हो। आप इस बात पर खुश हो सकते हैं।
                  अनूठे होने का अर्थ यह है कि जिस सपने को आप हकीकत में बदलना चाहते हैं, उसके लिए आपके पास मस्तिष्क के रूप में बेहतरीन स्वप्न-मशीन है। कुछ लोग कहते हैं कि काश! मैं अपने बॉस, फलां अमीर या सफल आदमी अथवा सत्ता में उच्च पद पर बैठे किसी व्यक्ति जैसा होता। जो लोग ऐसा सोचते या कहते हैं, वे खुद को दिए गए सबसे महान उपहार को नजरअंदाज करते हैं। यह महान उपहार है आपका अनूठापन।
            यह हो सकता है कि आप उच्च पद पर बैठे किसी शख्स के साथ अपना पद बदलना चाहें, लेकिन निश्चित रूप से अपनी जिंदगी की अदला-बदली नहीं करना चाहेंगे। अपने जीवन को पसंद करना एक अच्छी बात है। बस अपनी मस्तिष्क रूपी स्वप्न मशीन के जरिए सपने को साकार करते हुए जीवन को उन्नति की राह पर ले जाएं।
                     यदि आपके मस्तिष्क पर हताशा, हार और निराशा की गंदगी जमा है, तो उसे पॉजिटिव मेंटल एटीट्यूड यानी सकारात्मक मानसिक नजरिए के द्रव से साफ करें। जिस तरह भोजन करने से पहले हम अपने हाथ धोते हैं, उसी तरह किसी सपने पर काम करने से पहले मस्तिष्क प्रक्षालन की प्रक्रिया जरूरी है। अपने सपने की जड़ों को मजबूत करने के लिए आपको उन नकारात्मक यादों को धोकर साफ कर देना चाहिए, जो आपको पीछे धकेलती हैं।
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शानदार कैरियर जबरदस्त अवसर

अगर आपमें टैलेंट है तो आप किसी भी फील्ड में कैरियर बना सकते हैं। लेकिन कुछ ऐसे हॉट सेक्टर्स हैं, जिनमें कैरियर के विकल्प भी शानदार हैं और प्रोफेशनल्स की मांग भी खूब रहती है।
                 सपनों की उड़ान की कोई सीमा नहीं है। शत-प्रतिशत यही बात कैरियर के संबंध में भी लागू होती है। कैरियर निर्माण की दृष्टि से आज कई ऐसी फील्ड्स हैं, जिनमें जॉब को वाकई हॉट कहा जा सकता है। हॉट जॉब का तात्पर्य उन क्षेत्रों से है, जिनमें प्रोफेशनल्स की आज अधिक मांग है। इसलिए इनकी पढ़ाई बेहतर कैरियर निर्माण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। वैसे तो तमाम क्षेत्र हैं, जिनमें भविष्य संवारा जा सकता है, पर पब्लिक रिलेशन, इंश्योरेंस, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, फाइनैंशियल सर्विसेज, लॉजिस्टिक्स, ऑटोमोबाइल्स, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बैंकिंग, रीयल एस्टेट, एनिमेशन, ईवेंट मैनेजमेंट, फार्मास्यूटिकल आदि कुछ ऐसी फील्ड्स हैं, जिनसे संबंधित पढ़ाई करना बेहतर जॉब की गारंटी है। इसके अलावा कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जिनमें जॉब की बेहतर संभावना तलाशी जा सकती है। इसमें मीडिया, फिल्म मेकिंग, गेमिंग, एनजीओ, कंटेंट राइटिंग आदि मुख्य हैं।
एक वक्त था, जब कैरियर के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल और टीचिंग से बात आगे बढ़ती ही नहीं थी। पर बदलती जीवनशैली, जरूरतों में होनेवाले बदलाव और नित्य होते वैज्ञानिक अनुसंधानों की वजह से आज के जमाने में कैरियर संबंधी नए-नए विकल्प निरंतर सामने आ रहे हैं। ऐसे जॉब वक्त की मांग होते हैं। इसलिए हॉट होते हैं। हॉट जॉब के मामले में ध्यान रखने वाली बात यह है कि संस्थानों के चयन में किसी तरह की चूक नहीं हो। कैरियर के जितने विकल्प हैं, उनमें से लगभग सभी के लिए देश में अच्छे संस्थान मौजूद हैं। इनमें से कुछ सरकारी हैं तो कुछ निजी।
      बेहतर कैरियर के लिए जरूरत है तो अच्छे संस्थानों के चयन की। किसी भी संस्थान में अध्ययन के स्तर और प्लेसमेंट की व्यवस्था से उसके अच्छे या सामान्य होने का आकलन किया जा सकता है। अच्छे कोचिंग संस्थानों की भी कोई कमी नहीं है। जरूरत होने पर इनकी मदद भी ली जा सकती है। अच्छे संस्थानों से पढ़ाई करने से हॉट जॉब का बेहतर रिजल्ट मिलता है। यदि पढ़ाई को लेकर कोई आर्थिक समस्या है तो एजुकेशन लोन के सहारे आगे बढ़ा जा सकता है। जिन जॉब्स की मार्केट में ज्यादा मांग है, उनके लिए तो लोन और आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा मेधावी छात्रों के लिए तरह-तरह की स्कॉलरशिप भी है। जरूरत है तो इनके बारे में सही जानकारी लेने की।
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बैंक में क्लर्क बनने का अवसर

बैंकिंग क्षेत्र में भविष्य देख रहे युवाओं के लिए सुरक्षित जॉब पाने का अच्छा मौका है। कॉरपोरेशन बैंक में क्लर्क पद के लिए काफी बढ़ी संख्या में रिक्तियां निकली हैं। ऐसे युवा, जिनकी उम्र १८ से २८ वर्ष के बीच है और जिन्होंने गे्रजुएशन में ४० प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। कंप्यूटर का ज्ञान होना भी जरूरी है।

चयन प्रक्रिया

परीक्षा में पहला चरण लिखित परीक्षा का होगा। प्रश्न-पत्र चार विषयों में बंटा होगा। सभी विषयों से ऑब्जेक्टिव प्रश्न होंगे, जिन्हें हल करने के लिए १ घंटा, ३५ मिनट का समय दिया जाएगा। इंटरव्यूट के लिए योग्य परीक्षार्थियों के कंप्यूटर ज्ञान का टेस्ट भी लिया जाएगा।

ऐसे करें तैयारी

वैसे तो सभी विषयों में पास होना अनिवार्य है। लेकिन मेरिट में आना काफी हद तक रीजनिंग और मैथ्स की तैयारी पर निर्भर करेगा, क्योंकि इस भाग से १६० नंबर के १०० प्रश्न होंगे। रीजनिंग में ब्लड रिलेशन्स, डायरेक्शन टेस्ट, नंबर व एल्फाबेट सीरीज, स्टेटमेंट टेस्ट, क्यूब ऐंड डाइस, पजल टेस्ट, विभिन्न आकृतियों की छाया आदि से संबंधित प्रश्नों की अच्छी तैयारी करें। बोडमास का नियम जरूर याद रखें। मैथ्स में समय-काम-दूरी, नंबर सिस्टम, मेंसुरेशन, नंबर सिस्टम, ब्याज, प्रतिशत, लाभ-हानि आदि टॉपिक्स पर अच्छी कमांड होनी चाहिए। अंगरेजी के लिए ग्रामर के नियम याद रखें।
कुल पद :----------१२१०

उत्तर प्रदेश -----------७०

चंडीगढ़ --------------१०

दिल्ली ---------------१००

हरियाणा -------------३०

हिमाचल प्रदेश -------२०

जम्मू-कश्मीर --------०६

पंजाब ----------------४०

उत्तराखंड -------------२०

अन्य राज्यों में -------९१४

अंतिम तिथि- ३१ जुलाई, २०१०
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बनिए टीचर बनाइए फ्यूचर

प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, बायोटेक्नोलॉजी, बीफार्मा आदि के छात्रों की दिलचस्पी भी यदि टीचिंग की ओर होने लगे तो निश्चय ही अब इस प्रोफेशन में कुछ खास बात नजर आने लगी है। पिछले दिनों बीटीसी कोर्स के लिए ऐसे कई स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है जो पहले कोई प्रोफेशनल कोर्स कर चुके हैं। करें भी क्यों न, जब एक टीचर की शुरुआती सैलरी इन प्रोफेशनल कोर्सेज की नौकरी से कहीं अधिक है। सुरक्षित जॉब, साल में अधिक छुट्टियां और बेहतरीन पैकेज जैसी बातें सबको

इस प्रोफेशन की ओर आकर्षित करने लगी हैं।
कार्य की प्रकृति
                       शुरुआती स्तर यानी नर्सरी लेवल, जूनियर स्कूल लेवल, सेकेंडरी स्कूल लेवल और कॉलेज व यूनिवर्सिटी लेवल पर पढ़ाई के लिए अलग-अलग तरह के शिक्षकों की जरूरत होती है। इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों के अधिकांश मामलों में भी अध्यापक ही किसी न किसी रूप में नियुक्त होते हैं।
पाठ्यक्रम और योग्यता

नर्सरी टीचिंग ः प्री-प्राइमरी टीचर नर्सरी के बच्चों को पढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। नर्सरी टीचिंग के लिए किसी पॉलिटेक्निक या वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके लिए १२वीं में कम-से-कम ५० प्रतिशत अंक होने चाहिए।
                                       प्राइमरी टीचिंग ः प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने के लिए एजुकेशन में डिप्लोमा या ग्रेजुएशन जरूरी है। होम साइंस स्नातकों की नियुक्ति भी प्राइमरी टीचर के रूप में होती है।
                बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने की योग्यता बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट) कोर्स है। यह कोर्स भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार चलाया जाता है। इसके लिए योग्यता किसी भी विषय से ग्रेजुएशन है। नामांकन के लिए प्रवेश-परीक्षा आयोजित की जाती है। उत्तीर्ण होने पर सरकारी और निजी दोनों ही तरह के संस्थानों में दाखिला मिलता है।
                       सेकेंडरी/सीनियर सेकेंडरी टीचर ः ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) के लिए ग्रेजुएशन के बाद बीएड और पोस्टग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) के लिए पोस्टग्रेजुएशन के बाद बीएड करना होता है। बीएड के बाद एमएड भी किया जा सकता है।
                             खास स्कूल ः ऐसे स्कूल शारीरिक या मानसिक रूप से विकलांगों के लिए होते हैं। इनमें शिक्षक के रूप में नियुक्ति केलिए १२वीं उत्तीर्ण होने के साथ-साथ संबंधित विषय/क्षेत्र में डिप्लोमा/डिगरी जरूरी है।
          कॉलेज लेक्चचर ः इसके लिए मास्टर डिगरी में कम-से-कम ५५ प्रतिशत अंक होने चाहिए। इसके अलावा यूजीसी/सीएसआईआर द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) भी उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसके अलावा लेक्चररों की बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य स्तरीय जांच (एसएलईटी) परीक्षा भी होती है। इसके लिए योग्यता नेट की ही तरह होती है।
                           एनसीटीई ः जो शिक्षक अभी पढ़ा रहे हैं, पर प्रशिक्षित नहीं हैं, उनके लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) तथा कुछ अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से टीचिंग की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे टीचिंग की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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कंप्यूटर वायरस



 virus



एक खास तरह का प्रोग्राम होता है, जो कंप्यूटर के डाटा को नुकसान पहुंचा सकता है या उसे चुरा सकता है। यह आमतौर पर ईमेल, पेनड्राइव या सीडी से डाटा ट्रांसफर करते समय और इंटरनेट से डाउनलोड करते समय आता है।
वायरस से लड़ने के लिये एंटी वायरस बनाये जाते हैं। एंटी वायरस सॉफ्टवेयर किन्हीं खास तरह के कोड्स को ध्यान में रखकर बनाये जाते हैं। जब कोई फाइल इन कोड्स से मिलती-जुलती होती है, तो यह प्रोग्राम उसे ब्लॉक कर देता है और इसके साथ ही आपको आगाह कर देता है कि आपके कंप्यूटर में वायरस है और उसको हटाने की जरूरत है। हर हफ्ते सैकड़ों नये वायरस पैदा होते हैं और एंटी वायरस कंपनियां खुद को इसके लिये तैयार करती रहती हैं।
       उनकी कोशिश यही होती है कि इस जंग में कहीं वो पिछड़ न जायें। इसलिये यह बेहद जरूरी है कि आप अपने कंप्यूटर के एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करते रहें। कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर ‘ऑटोमैटिक अपडेट’ के साथ आते हैं, यानी वे खुद-ब-खुद अपने को अपडेट करते रहते हैं।
                          मैक्फे, एवीजी, अवास्ट, अवीरा आदि कई एंटी वायरस सॉफ्टवेयर मौजूद हैं। इन्हें ऑनलाइन या सॉफ्टवेयर की दुकान से खरीद सकते हैं या फिर इनके फ्री वर्जन इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं। फ्री वर्जन कुछ सीमित समय के लिये मिलते हैं। साथ ही कई बार इनमें पूरा प्रोटेक्शन भी नहीं मिलता।
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Sunday, June 6, 2010

IITM News Paper advertize

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Thursday, April 15, 2010

P004 Twelve Advance Diploma in Web Designing & Development

Duration : One Year
Fees : 18000 Rs.


 HTML
 Adobe Photoshop
 CorelDraw
 Adobe Illustrator
 Adobe Flash
 Internet Technology
 Adobe Dreamwaver
 Java Script
Eligibility : The candidate seeking admission in Advance Diploma in Web Designing & Development course must have passed Pre-University / Higher Secondary / 10+2 Examination or equivalent or any recognized Board / Council in any discipline.
The candidate who has successfully completed three years of Polytechnic diploma from State Technical Board after 10th standard is also eligible take admission in first semester of Advance Diploma in Web Designing & Development
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P003 Advance Diploma in Computer Science

Duration : One Year
Fees : 16000 Rs.


1st Semester :
 Fundamental of Computer
 MS-Windows (XP/Vista/7)
 MS-Office(Word, Excel, Power Point, Access)
 Multimedia
 Internet, E-mail, g-mail, chatting.
 HTML
 Project
2nd Semester:
 PageMaker
 Photoshop (CS4)
 Adobe Flash (CS4)
 Adobe Dreamweaver (CS4)
 CorelDraw (X4)
 Web cam Operating
 Chip/Card Loading (PC+Mobile)
 CD/DVD Operating & Writing
 Scanning, Printing
 Project
Eligibility: The candidate seeking admission in Advance Diploma in Computer Science course must have passed Pre-University / Higher Secondary / 10+2 Examination or equivalent or any recognized Board / Council in any discipline.
The candidate who has successfully completed three years of Polytechnic diploma from State Technical Board after 10th standard is also eligible take admission in first semester of Advance Diploma in Computer Science.
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P002 Advance Diploma in Computer Application

Duration: One Year
Fees : 16000 Rs.


1st Semester:
 Fundamental of Computer.
 MS-Windows (XP/Vista/7).
 MS-Office(Word, Excel, Power Point, Access).
 Multimedia.
 Internet, E-mail, g-mail, chatting.
 Tally (Latest Version).
 HTML.
 Project.

2nd Semester:
 PageMaker.
 Photoshop(CS4).
 Adobe Flash(CS4).
 Adobe Dream weaver (CS4).
 CorelDraw(X4).
 Web cam Operating.
 Chip/Card Loading (PC + Mobile).
 CD/DVD Operating & Writing.
 Scanning, Printing.
 Project.

Eligibility : The candidate seeking admission in Advance Diploma in Computer Application course must have passed Pre-University / Higher Secondary / 10+2 Examination or equivalent or any recognized Board / Council in any discipline.
The candidate who has successfully completed three years of Polytechnic diploma from State Technical Board after 10th standard is also eligible take admission in first semester of Advance Diploma in Computer Application.
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Advance Diploma in Computer Software, Hardware & Networking

Advance Diploma in Computer Software, Hardware & Networking

Duration: Two Year                                                                                               
 Fees: .......... Rs.
1st Semester:
 Fundamental of Computer
 MS-DOS
 MS-Windows (XP/Vista/7)
 MS-Office(Word, Excel, Power Point, Access)
 Media/Multimedia
 Internet, E-mail, g-mail, chatting.
 HTML
 Tally (Latest Version)
 Project

2nd Semester:
 PageMaker
 Photoshop(CS4)
 Adobe Flash(CS4)
 Adobe Dream weaver (CS4)
 CorelDraw(X4)
 Web cam Operating
 Chip/Card Loading (PC + Mobile)
 CD/DVD Operating & Writing
 Scanning, Printing
 Project

3rd Semester:
 Basic Information of Computer
 Basic Electronics
 MS-DOS
 Part of Computer(Processor, Motherboard, RAM, Hard Disk, Floppy Disk Drive, DVD Drive Cabinet, Keyboard, Mouse, Speaker, UPS)
 Assembling / Dissembling
 Fault Recognized
 Jumper Setting
 Hard Disk Format/Partition(New/Old)
 Installing Different O/S
 Software Loading, Driver Loading
 Printer (DMP, DeskJet, Laser Printer)
 Types of CD,DVD, HD-DVD, B/u ray disk
 Symptoms of virus infection
 Latest technology (Blue tooth , scanner, infrared, USB)
 Wireless devices
 Network basics
 Networking Model
 Network Hardware
 Trouble shooting Operating system, Hardware
 Project

4th Semester:
 Basic Networking
 Network Connections
 LAN, MAN & WAN.
 Networking Architecture
 Networking Topology, Protocols
 Network Devices (Hub, Switch , Router, NIC Card, Cables, Connectors)
 Network Topology
 Network Software
 OSI Reference Module
 TCP/IP Fundaments
 TCP/IP Configuration
 Remote Network Access
 Network Security
 Introduction Of 2003 And Requirement
 Conversion Of Workgroup And Domain
 To make PDC, CDC, ADC and Clients And Difference B/W
 Active Directory and it terms and components
 Planning and installing a network
 Network maintenance and trouble shooting
 Project

Eligibility: The candidate seeking admission in Advance Diploma in Computer Software, Hardware & Networking course must have passed Pre-University / Higher Secondary / 10+2 Examination or equivalent or any recognized Board / Council in any discipline.
The candidate who has successfully completed three years of Polytechnic diploma from State Technical Board after 10th standard is also eligible take admission in first semester of Advance Diploma in Computer Software, Hardware & Networking.
Note : In rare cases 10th passed students can apply for P001.
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ओ लेवल कंप्यूटर कोर्स - O level Computer Course in Hindi

ईर्ष्या और जलन दोनों में आखिर अंतर क्या है ?

ईर्ष्या और जलन दोनों में आखिर अंतर क्या है ? ज्यादातर लोगो को यह लगता होगा की ईर्ष्या और जलन (Jealousy) एक ही है। दरसल दोनों अलग है। ई...

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